वरुण के बयान से हैरान हूँ: राहुल

25 Mar 2009





कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी ने कहा है कि हाल में की कई वरुण गांधी की विवादित टिप्पणियों से वे हैरान हैं.
कुछ दिन पहले प्रियंका गांधी ने भी अपने चचेरे भाई वरुण गांधी के विवादित बयान पर टिप्पणी की थी और कहा था कि वरुण का बयान गांधी-नेहरू परिवार की परंपराओं के ख़िलाफ़ है.
वरुण गांधी पर आरोप है कि उन्होंने छह मार्च को अपने चुनाव क्षेत्र पीलीभीत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण दिया था.इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भाजपा नेता वरुण गांधी की अपील ख़ारिज कर दी है कि कथित भड़काऊ भाषण के लिए उनके ख़िलाफ़ दायर एफ़आईआर को ख़त्म कर दिया जाए.पुडुचेरी में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे किसी के प्रति नफ़रत लेकर नहीं रहते.इसी दौरान चर्चा में राहुल ने एलटीटीई के बारे में कहा, मेरे पिता की हत्या एलटीटीई ने की थी, इसलिए मुझे एलटीटीई से कोई लगाव नहीं है.
'मनमोहन काबिल नेता'
मनमोहन सिंह ने बहुत कुछ हासिल किया है. देश में तेज़ी से विकास हुआ है. मुंबई हमलों के बाद उन्होंने पड़ोसी देशों पर ख़ासा दवाब बनाया
राहुल गांधी
चुनावों पर चर्चा करते हुए राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कमज़ोर नहीं है.
राहुल ने कहा, "मनमोहन सिंह ने बहुत कुछ हासिल किया है. देश में तेज़ी से विकास हुआ है. मुंबई हमलों के बाद उन्होंने पड़ोसी देशों पर ख़ासा दवाब बनाया."
मनमोहन सिंह की उपलब्धियाँ गिनाते हुए राहुल ने कहा कि उन्होंने अमरीका के साथ अहम समझौता किया जो पूर्व सरकारें नहीं कर पाईं.
राहुल ने कहा कि वे मनमोहन सिंह का भरपूर समर्थन करते हैं.
जब पत्रकारों ने मनमोहन सिंह और लाल कृष्ण आडवाणी की तुलना करने को कहा तो राहुल का कहना था, "मैं आडवाणी के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता, वो वरिष्ठ नेता हैं लेकिन मैं मनमोहन सिंह के बारे में ज़रूर बात करूँगा."
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे ख़ुद को भविष्य में प्रधानमंत्री के तौर पर देखते हैं तो राहुल ने कहा कि ये सवाल पहले भी पूछा जा चुका है और वे चाहते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा युवा राजनीति में आएँ.
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तबादलों पर रोक हटी

16 Feb 2009

जयपुर। कांग्रेस सरकार ने राज सम्भालने के बाद सोमवार को तबादलों पर से पहली बार प्रतिबंध हटाया। लेकिन यह रोक भी दस दिन के लिए हटाई गई है। इसमें शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा ऊर्जा विभाग शामिल नहीं हैं। राज बदलने के बाद से कांग्रेसी विधायकों और कार्यकर्ताओं का सरकार पर तबादलों पर से रोक हटाने के लिए दबाव बना हुआ था। 

कुछ समय बाद लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने वाली है, ऎसे में प्रतिबंध हटाना राजनीतिक मजबूरी हो गई। परीक्षाएं नजदीक आने से शिक्षा विभाग, मौसमी बीमारियों की वजह से चिकित्सा विभाग और रबी सीजन में बिजली की आपूर्ति के कारण ऊर्जा विभाग में स्थानान्तरण पर प्रतिबंध बरकरार रहेगा। इन महकमों में लोकसभा चुनाव बाद ही तबादले हो सकेंगे। 

शेष विभागों में 25 फरवरी तक तबादले हो सकेंगे लेकिन 13 जिलों में मतदाता सूचियों के कार्य से जुडे कर्मचारियों के तबादले 20 फरवरी बाद ही हो सकेंगे। 13 जिलों के 50 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन 20 फरवरी को होगा। 
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सोनिया ने किया जनता की ताकत को सलाम

3 Feb 2009


जयपुर। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वोट की ताकत को सर्वोपरि करार देते हुए जनता की ताकत को सलाम किया। प्रदेश में लोकसभा चुनाव की तैयारियों का आगाज और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए जनता को धन्यवाद देने जयपुर आई सोनिया गांधी ने अमरूदों वाला बाग में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि "वोट की ताकत तानाशाही और राजशाही सभी से उपर है और प्रदेशवसियों के प्रयासों से ही राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ है।"
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि "राज्य की जागरूक जनता ने साबित कर दिया है कि वो जाति, धर्म और आतंकवाद के नाम पर राजनीतिक लाभ उठाने वालों के साथ नहीं हैं। काढ की हांडी दोबारा नहीं चढती और जनता ने अपनी वोट की ताकत से इसे साबित कर दिखाया है।" उन्होंने कहा कि "कांग्रेस के लिए समाज के कमजोर वर्ग के लोगों और किसानों का हित सबसे उपर है और उनके हितों की रक्षा करना हमारा सबसे पहला लक्ष्य है।" 
काम से धन्यवाद देंगे
सोनिया ने कहा कि कांग्रेस झूठे वादों से जनता को धन्यवाद नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि "हम अपने काम से जनता का शुक्रिया अदा करेंगे और हमें पूरी उम्मीद है कि हम प्रदेश की जनता की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।" सोनिया ने कहा कि राज्य की गहलोत सरकार चुनाव के दौरान किए गए वादों को एक-एक कर पूरा करेगी। कमजोर को ताकत, किसानों के हितों का ख्याल और सभी को न्याय दिलाना कांग्रेस का फर्ज है। उन्होंने कहा कि भय और भ्रष्टाचार से मुक्त राजस्थान का निर्माण करना हमारा लक्ष्य है। सोनिया ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में सभी के हक का सम्मान किया जाएगा और उसकी सुरक्षा की जाएगी। 
विकास में नहीं लगा पैसा
कांग्रेस अध्यक्ष ने राजस्थान की पूर्व भाजपा सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने बताया कि पिछले पांच सालों में केन्द्र की मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने राजस्थान सरकार को 40 हजार कारोड रूपए दिए, जो केन्द्र की पिछली एनडीए सरकार के मुकाबले चार गुणा अधिक है। लेकिन इसके बावजूद राजस्थान का चहुंमुखी विकास नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यदि यह पैसा इमानदारी से खर्च किया जाता तो आज राजस्थान की तस्वीर कुछ और होती। 
भ्रष्टाचार को दूर करें गहलोत
सोनिया गांधी ने कहा कि "मैं उम्मीद करती हूं कि राज्य की गहलोत सरकार राजस्थान को भ्रष्टाचार से मुक्त करेगी।" उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने सभी वर्ग के लोगों अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और युवाओं, महिलाओं व बच्चों के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इन सभी योजनाओं को पारदर्शिता से लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है और सरकार अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेगी। 
लोकसभा चुनाव बडी चुनौती
कांग्रेस अध्यक्ष ने लोकसभा चुनाव को चुनौती करार देते हुए कार्यकर्ताओं से जी-जान से जुट जाने का आह्वान किया है। उन्होंने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया और कहा कि जिस तरह से उन्होंने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का झंडा बुलंद किया है उसी तरह एकजुट होकर लोकसभा सीटों के लिए भी काम करें। 
इससे पहले सोनिया गांधी दोपहर लगभग 1.15 बजे चार्टेड विमान से सांगानेर एयरपोर्ट पहुंची। हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया का स्वागत किया। सोनिया यहां से हेलीकॉप्टर से अमरूदों वाला बाग के लिए रवाना हो गई। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सोनिया गांधी की प्रदेश में यह पहली रैली थी। कांग्रेस ने इसे धन्यवाद रैली का नाम दिया। रैली में राज्य प्रभारी मुकुल वासनिक, विवेक बंसल, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक व प्रमुख नेता उपस्थित थे। 
लखी रैली
सोनिया की रैली में भाग लेने के लिए दूर-दराज के इलाकों से सुबह से ही लोगों का जयपुर आना शुरू हो गया था। अमरूदों के बाग में भारी संख्या में लोग सोनिया गांधी को सुनने के लिए आतुर नजर आ रहे थे। वहां मौजूद विशाल जनसमुदाय में भारी उत्साह था। 
शहर को लगा ब्रेक
सोनिया गांधी की रैली में शामिल होने के लिए भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक जयपुर पहुंचे हैं। लोगों की भीड के कारण जगह-जगह पर ट्रैफिक जाम है या काफी धीमी गति से आगे बढ रहा है। 
सोनिया के रंग में रंगा गुलाबी नगर
राजस्थान में कांग्रेस की जीत के बाद सोनिया गांधी क यह पहली रैली है। इस अवसर पर गुलाबी नगर पूरी तरह से सोनिया के रंग में रंग गया है। शहर में जगह-जगह पर सोनिया गांधी के बडे-बडे बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं। शहर के प्रमुख चौराहे और सडकें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी के झंडे व बैनरों अटे पडे हैं। 
कार्यकर्ताओं में उत्साह
प्रदेश में शासन में आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बडी रैली के मद्देनजर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ सोनिया गांधी का स्वागत किया। 
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मधुशाला पर लगेगा ताला

29 Jan 2009

राजस्थान में नई बनी कांग्रेस सरकार ने राज्य में शराब की दुकानों की संख्या में कटौती कर दी है.

साथ ही, शराब की दुकानों और मयख़ानों पर अतिरिक्त टैक्स लगाकर सरकार ने शराब की बिक्री को नियंत्रित करने की कोशिश की है.

सरकार को ज्यादा चिंता पबों को लेकर है, सरकार का कहना है कि पब राज्य के युवाओं को पथभ्रष्ट कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री अशोक गहलौत कहते हैं, "हम शराब की संस्कृति को प्रोत्साहित नहीं करेंगे, हम उस संस्कृति को ख़त्म करना चाहेंगे जिसमें लड़के लड़की हाथ में हाथ डालकर पब में जाते हैं".

सरकार की नई आबकारी नीति के तहत शराब पीने वालों को अब ज्यादा टैक्स देना होगा. सरकार ने शराब परोसने वाले होटलों और बारों की लाइसेंस फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है.

ताज़ा सरकारी फरमान से राज्य में शराब की 800 दुकानें बंद हो जाएँगीं. इससे पहले सरकार ने धार्मिक स्थलों और स्कूलों के करीब बनी लगभग 150 दुकानों को बंद करवा दिया था.



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मधुशाला पर लगेगा ताला

राजस्थान में नई बनी कांग्रेस सरकार ने राज्य में शराब की दुकानों की संख्या में कटौती कर दी है.

साथ ही, शराब की दुकानों और मयख़ानों पर अतिरिक्त टैक्स लगाकर सरकार ने शराब की बिक्री को नियंत्रित करने की कोशिश की है.

सरकार को ज्यादा चिंता पबों को लेकर है, सरकार का कहना है कि पब राज्य के युवाओं को पथभ्रष्ट कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री अशोक गहलौत कहते हैं, "हम शराब की संस्कृति को प्रोत्साहित नहीं करेंगे, हम उस संस्कृति को ख़त्म करना चाहेंगे जिसमें लड़के लड़की हाथ में हाथ डालकर पब में जाते हैं".

सरकार की नई आबकारी नीति के तहत शराब पीने वालों को अब ज्यादा टैक्स देना होगा. सरकार ने शराब परोसने वाले होटलों और बारों की लाइसेंस फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है.

ताज़ा सरकारी फरमान से राज्य में शराब की 800 दुकानें बंद हो जाएँगीं. इससे पहले सरकार ने धार्मिक स्थलों और स्कूलों के करीब बनी लगभग 150 दुकानों को बंद करवा दिया था.



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मारवाड़ में फहराएगा तिरंगाः- राहुल गांधी

29 Nov 2008



भीनमाल। भीनमाल, 29 नवम्बर।
मुंबई में आतंकवादी हमला हम पर हमला है। यह हिन्दुस्तान की अवाम पर हमला है एवं अमाव के लिए चुनौती भी। हिन्दुस्तान के लोग आतंकवादियों को मुह तोड़ जवाब देंगे।
यह बात कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने शनिवार को भीनमाल के शिवराज स्टेडियम में आयोजित जिले की आमसभा को संबोधित करते हुए कही। गांधी ने कहा कि आतंकवादी सोचते हे कि वे इस तरह हमे डरा देंगे और हमे बाट देंगे। उन्होंने कहा कि इससे हम तो लड़ेंगे तथा एकसाथ जुड़कर इसे खत्म करेंगे। और जीतेंगे भी। यूपीए की सरकार को आम आदमी की सरकार कहते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यीपीए की सरकार ने दुनिया में सबसे बड़ा रोजगार गारंटी प्रोग्राम, स्कूलों में बच्चों को खाना देने का कार्यक्रम चलाया। आदिवासियों के लिए ट्राईबिल बील बनाया। मगर राजस्थान सरकार ने इन योजनाओं से जनता को लाभान्वित नहीं किया। राजस्थन में गरीब जनता व किसान को हक मांगने पर गोली मिली। परमाणु करार का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा कि इसका सबसे बड़ा फायदा देश की गरीब जनता को मिलेगा। गांधी ने राजस्थान में चुनावी लड़ाई लडऩे का आह्वान करते हुए कांग्रेस को विजयी बनाने की बात कही। उन्होंने एक बार फिर कहा कि आतंकवादी यह सुन ले कि हिन्दुस्तान के लोग किसी से डरते नहीं है। 
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने कहा कि यह चुनाव देश की राजनीति को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि नीतियों के आधार पर निर्णय करें तब ही लोकतंत्र मजबूत हो सकता है। नीतियां कांग्रेस के पास ही है। भाजपा के शासन को उन्होंने काला अध्याय करार दिया। जोशी ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के पास 52 हजार करोड़ के प्रस्ताव भिजवाए जिनमें से वह 26 हजार करोड़ ही खर्च कर पाई है। शेष राशि अभी भी सरकार के खजाने में पड़ी है। विधानसभा में प्रतिपक्ष नेता हेमाराम चौधरी ने राज्य की भाजपा सरकार ने किसानों के कर्जे माफ नहीं किए। जबकि कांग्रेस ने बिना कोई वायदा किए 72 हजार करोड़ रुपए के कर्ज माफ कर दिए। भीनमाल विधायक डॉ. समरजीतसिंह ने संचालन किया एवं अपनी ओर से स्वागत भाषण भी दिया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव भंवर जितेन्द्रसिंह भी राहुल गांधी के साथ आए थे। मंच पर भीनमाल प्रत्याशी डॉ. समरजीत सिंह, रानीवाड़ा प्रत्याशी रतन देवासी, सांचोर प्रत्याशी सुखराम विश्रोई, जालोर प्रत्याशी रामलाल मेघवाल व आहोर प्रत्याशी भगराज चौधरी उपस्थित रहे जिन्होंने राहुल गांधी का स्वागत किया। जिले की आम सभा में बड़ी तादाद में लोग पहुंचे।

ओढ़ाया पटुडा
रानीवाड़ा के कांग्रेस उम्मीदवार रतन देवासी ने राहुल गांधी को देवासी समाज का पटुडा ओढ़ाकर उनका स्वागत किया।
पन्द्रह मिनट दिया संबोधन
राहुल गांधी हेलीकॉप्टर से सीधे महाविद्यालय के पीछे बनाए गए हेलीपेड़ पर उतरे। वहां से वाहन द्वारा शिवराज स्टेडियम आए जहां कांग्रेस के पांचों प्रत्याशियों, कुंदनमल जैन, युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष परसराम ढ़ाका, जिला प्रमुख मंजु मेघवाल सहित 
वरिष्ठ कांग्रेसियों ने गांधी का मालाओं से स्वागत किया। राहुल गांधी 3 बजकर 20 मिनट पर स्टेडियम पहुंचे तथा 15 मिनट में अपना संबोधन पूरा कर लिया।
फिसल गई जुबान
भीनमाल, 29 नवम्बर।
राहुल गांधी की भीनमाल के शिवराज स्टेडियम में आयोजित आमसभा में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी की जुबान बोलते-बोलते फिसल गई। अपने भाषण में जोशी जब यह कह रहे थे कि इस देश के लिए गांधी परिवार ने बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि देश के लिए इंदिरा गांधी शहीद हुई, इसके बाद कह दिया राहुल गांधी शहीद हो गए जबकि उन्हें यह कहना था कि राजीव गांधी शहीद हो गए। जोशी के इस कथन पर वहां उपस्थित लोगों ने अचरज भी किया फिर हॅसने लगे।

अपूर्व सुरक्षा बंदोवस्त
राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर यहां अभूतपर्वू सुरक्षा बंदोवस्त किए गए थे। करड़ा चौराहे से नैत्र चिकित्सालय के बीच के मार्ग को सुरक्षित कर दोनों तरफ बल्लियां लगा दी गई थी। भारी तादाद में पुलिस बल एवं अधिकारी तैनात थे। एसपीजी के जवान पूरी निगरानी संभाले हुए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही। हेलीपेड़ से सभा स्थल तक पूरे रास्ते पुलिस का पहरा रहा एवं इस मार्ग में किसी को फटकने तक नहीं दिया गया। सभा स्थल पर आए हरेक लोगों की पूरी जांच कर उन्हें अंदर प्रवेश दिया गया। सभा स्थल पर वीआईपी के लिए बैठने की अलग से प्रबन्ध था। मंच भी इतना छोटा कि छ: सात लोग ही चढ़ पाए एवं धरातल से काफी ऊंचा बनाया गया था। भीड़ को नियोजित करने का पूरा प्रबन्ध था। 
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भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने जारी की चार्जशीट

22 Nov 2008

जयपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने भाजपा सरकार को कुशासन की संज्ञा देते हुए प्रदेश के मतदाताओं का भाजपा को सत्ता से बेदखल करने का आह्वान किया है।
आज यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा गांधी भवन में मुख्यमंत्री वसुधरा राजे सरकार के पांच साल के शासन पर चार्जशीट जारी करते हुए उन्होंने कहा कि इस चार्जशीट के आधार पर प्रदेश की जनता यह निर्णय करेगी कि वोट किसको पार्टी को दिया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की केबिनेट के लोग ही उन पर पारदर्शी नहीं होने का आरोप लगाते रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि वे निर्णय केबिनेट की सहमति से नहीं करती थी। उन्होंने कहा कि राजस्थान में नौ हजार से अधिक शराब की दुकानें खुलवाई। उन्होंने कहा कि राजशाही तरीके से सरकारी कोष का अपव्यय किया, करोड़ों रूपए की राशि अलग से मुख्यमंत्री सचिवालय बनवाने में और खुद का सरकारी निवास के सौंदर्यीकरण पर खर्च किए। मुख्यमंत्री के शासनकाल में ही प्रदेश पर 83 हजार करोड़ रूपए का कर्जा बढ़ा और प्रदेश को जातीय संघर्ष की आग में धकेल दिया गया।
चार्जशीट में वसुंधरा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया गया है कि पानी मांग रहे किसानों पर गोलियां चलाई गई, राजे सरकार के शासन में प्रदेश में दर्जनों गोलीकांड हुए और सरकारी जमीनों की बंदरबांट की गई। इसमें गंगानगर का फर्जी हथियार लाइसेंस, पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाके में लाखों बीघा जमीन की खरीद-फरोख्त जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है। 

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सांसद विश्वेन्द्र समेत 17 को भाजपा ने निकाला

जयपुर। भरतपुर के सांसद विश्वेन्द्र सिंह एवं दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सहित सत्रह बागियों को भाजपा ने आज बाहर का रास्ता दिखाते हुए छह साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। इनमें पार्टी के दस मौजूदा और तीन पूर्व विधायक भी शामिल हैं। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि 22 नवम्बर की शाम तक इनमें कोई पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव मैदान से हट जाता है तो उसके निष्कासन पर पुनर्विचार भी किया जा सकता है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आ॓मप्रकाश माथुर ने आज यहां पत्रकारों को बताया कि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे इन नेताओं के कृत्य को अनुशासनहीनता का दोषी पाते हुए यह कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि जिन लोगों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित किया गया है उनमें भरतपुर के सांसद विश्वेन्द्र सिंह भी शामिल हैं। गौरतलब है कि विश्वेन्द्र ने कुछ ही दिनों पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सलाहकार व सांसद से इस्तीफा देने के बसाथ ही भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। वह भरतपुर के डीग-कुम्हेर सीट से उघोग मंत्री डॉ. दिगम्बर सिंह को टिकट जाने से खफा थे। कांग्रेस ने उन्हें इसी सीट से प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा पार्टी ने दिग्गज नेता एवं पूर्व खाघ एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया है। टिकट बंटवारे से नाराज किरोड़ी ने सवाई माधोपुर व टोडाभीम से खुद चुनाव मैदान में उतरने के साथ ही कई सीटों पर अपने समर्थकों को भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतार दिया है। मीणा बहुल सीटों पर जबर्दस्त पकड़ रखने वाले किरोड़ी को मनाने के लिए पार्टी हर संभव प्रयास किया लेकिन वे अपनी जिद पर अडे़ रहे। इसके अलावा पार्टी ने जिन बागियों को निष्कासित किया है उनमें संसदीय सचिव एवं खाजूवाला से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे गोविन्द चौहान, विधायक लक्ष्मी बारूपाल (सोजत), जीवाराम चौधरी (सांचोर), अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा), अर्जुन जीनगर (कपासन), केडी बाबर (लक्ष्मणगढ़), कन्हैयालाल मीणा (बस्सी), राकेश मेघवाल (परबतसर) और दाताराम गुर्जर (खेतड़ी) भी शामिल हैं।
इसके अलावा पूर्व विधायक रामेश्वर भाटी (सुजानगढ़), हीरासिंह चौहान (जैतारण) और बद्री गुरूजी (मांडलगढ़) के साथ ही झुंझुनूं जिला कार्यकारिणी के सदस्य रामनिवास सैनी (उदयपुरवाटी), भीलवाड़ा के जिला प्रमुख कन्हैयालाल धाकड़ (मांडलगढ़) और मंडावा (झुंझुनूं) के प्रधान नरेन्द्र को भी पार्टी से निकाल दिया गया है।

Last Updated [ 11/22/2008 12:05:35 AM]
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राजस्थान विधानसभा चुनाव -History

17 Nov 2008

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2003 कुल सीटें-200
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
भाजपा19712039.2
बीएसपी124023.97
सीपीएम18010.77
कांग्रेस2005635.65
आईएनएलडी50042.58
जद [यू]10020.92
एलजेएनएसपी3601-
आएएसएनएम6501-
निर्दलीय-1311.37
-राजस्थान में कांग्रेस ने अपने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा। ऐसा माना जा रहा था कि गहलोत फिर से राज्य की कमान संभालने में कामयाब होंगे। लेकिन भाजपा ने वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर चुनाव को दिलचस्प बना दिया। भाजपा ने अपने भरोसेमंद मैनेजर व नेता प्रमोद महाजन को चुनावी रणनीति की जिम्मेदारी सौंपी। महाजन ने भाजपा को निराश नहीं होने दिया।भाजपा ने 200 सीटों में 120 सीटें हासिल कर शानदार जीत दर्ज की।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 1998 कुल सीटें-200
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
भाजपा1963332.23
बीएसपी108022.17
सीपीएम14010.81
कांग्रेस20015344.95
जनता दल69031.97
जद [यू]10020.92
आरजेडी18010.28
निर्दलीय-07-
1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सभी 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए जिनमें 153 सीटों पर उसे सफलता मिली। विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी को 33 सीटों पर ही जीत मिली। कांग्रेस ने अशोक गहलोत के नेतृत्व में सरकार का गठन किया।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 1993 कुल सीटें-199
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
भाजपा1969538.60
सीपीएम12010.98
कांग्रेस1997638.27
जनता दल146066.93
निर्दलीय-21-
-राजस्थान के 1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 95 सीटें लेकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। लेकिन वह पूर्ण बहुमत से 5 सीट दूर ही थी। विपक्षी पार्टी कांग्रेस को 76 सीटों से संतोष कराना पड़ा। भाजपा ने अन्य दलों के सहयोग से भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व में सरकार का गठन किया। दोनों प्रमुख पार्टियों के अलावा निर्दलीय उम्मीदवारों ने 21 स्थानों पर विजयी हासिल की।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 1990 कुल सीटें-200
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
भाजपा1288525.25
कांग्रेस2005033.64
सीपीएम22011.03
जनता दल1205521.58
निर्दलीय-09-
-राजस्थान के 1990 के विधानसभा चुनाव में जनता ने किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं दिया। भाजपा ने 128 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए जिसमें से उसे 85 सीटों पर ही सफलता प्राप्त हुई। कांग्रेस और जनता दल को क्रमश: 50 और 55 सीटें मिली। भाजपा ने जनता दल के साथ मिलकर सरकार बनाई। भैरोंसिंह शेखावत ने दूसरी बार चार मार्च 1990 को सत्ता संभाली।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 1985 कुल सीटें-200
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
भाजपा1183921.24
कांग्रेस19911346.57
सीपीआई47011.23
जेएनपी31105.88
एलकेडी602711.86
निर्दलीय-10-
-राजस्थान के 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 200 सीटों में 113 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर ली। भाजपा को 39 सीटें मिली जबकि जनता पार्टी व लोकदल को क्रमश: 10 और 27 सीटों से ही संतोष करना पड़ा।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 1980 कुल सीटें-200
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
भाजपा1233218.60
कांग्रेस [आई]19913342.96
सीपीआई25010.97
सीपीएम160101.02
कांग्रेस [यू]69065.59
जेएनपी [जेपी]76087.34
जेएनपी [एससी]103079.55
निर्दलीय-12-
-राजस्थान के 1980 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 200 सीटों में 133 सीटों पर कब्जा जमाकर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। अपने जन्म के तुरंत बाद भाजपा ने राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन उसे कुछ खास सफलता हाथ लगी और उसे 32 सीटों पर ही सफलता मिली।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 1977 कुल सीटें-200
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
सीपीआई10011.11
सीपीएम14010.75
कांग्रेस1864131.49
जेएनपी20015250.39
निर्दलीय-05-
-इंदिरा गांधी द्वारा देश में इमरजेंसी लगाए जाने के बाद हुए राजस्थान के 1977 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ ने कांग्रेस को पटखनी देते हुए 200 में से 152 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस 41 सीटों पर ही सिमटकर रह गई।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 1972 कुल सीटें-184
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
बीजेएस1190812.20
सीपीआई05041.56
कांग्रेस17914551.13
एनसीओ37011.34
एसओपी36042.44
एसडब्ल्यूए1191112.32
निर्दलीय-11-
-राजस्थान के 1972 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 184 में से 145 सीटों पर विजयी हासिल की। मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनसंघ को निराशा हाथ लगी और वह आठ सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी। वहीं स्वतंत्र पार्टी को 11 सीटों पर जीत मिली।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 1967 कुल सीटें-184
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
बीजेएस632211.69
सीपीआई20010.97
कांग्रेस1828941.42
एसएसपी38084.76
एसडब्ल्यूए1074822.10
निर्दलीय-16-
-राजस्थान के 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से तीन सटें दूर रही। लेकिन उसने कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों का समर्थन किया था। इस आधार पर कांग्रेस प्रदेश में सरकार बनाने में सफल रही। पार्टी को 89 सीटें मिली जबकि स्वतंत्र पार्टी को 48 और भारतीय जनसंघ को 22 सीटें प्राप्त हुई। संघट सोशलिस्ट पार्टी ने भी आठ सीटों पर जीत दर्ज की।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 1962 कुल सीटें-176
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
सीपीआई45055.40
कांग्रेस1760439.98
जेएस94159.15
पीएसपी22021.46
एसओसी40053.68
एसडब्ल्यूए933617.11
आरआरपी23032.01
निर्दलीय-22-
-राजस्थान के 1962 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 176 में 88 सीटें प्राप्त हुई। वह बहुमत से मात्र एक सीट दूर रही। स्वतंत्र पार्टी ने इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करते हुए 36 सीटों पर सफलता प्राप्त की जबकि जनसंघ को 15 सीटों से ही संतोष करना पड़ा।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 1957 कुल सीटें-176
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
बीजेएस48065.55
सीपीआई23013.02
कांग्रेस17611945.13
पीएसपी25012.48
आरआरपी57179.89
निर्दलीय-75-
-राजस्थान के 1957 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने शानदार सफलता हासिल की। पार्टी ने 176 में 119 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद सबसे ज्यादा 75 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। वहीं अखिल भारतीय राम राज्य परिषद ने 17 सीटों पर सफलता प्राप्त की।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 1951 कुल सीटें-160
पार्टियांचुनाव लड़ेजीतेवोट प्रतिशत
बीजेएस50085.93
एचएमएस06020.86
कांग्रेस1568239.46
केएलपी46078.30
केएमपीपी06010.50
आरआरपी592412.26
केएमपीपी51014.17
निर्दलीय-35-
-राजस्थान के 1951 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 160 में 82 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं अखिल भारतीय राम राज्य परिषद ने 24 सीटें जीती जबकि भारतीय जनसंघ को आठ स्थानों पर सफलता मिली।

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सरदारपुरा: गहलोत हैट्रिक के मूड में

  
Nov 17, 2:04 pm   

पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। जोधपुर जिले में आने वाले इस विधानसभा क्षेत्र को कांग्रेस का दबदबा वाला क्षेत्र माना जाता है। गहलोत ने पहली बार यहां से 1999 में उपचुनाव जीते थे। कांग्रेस के मानसिंह देवडा तीन बार और भाजपा के राजेंद्र गहलोत यहां से जीत दर्ज कर चुके हैं। अशोक गहलोत के यहां से चुनाव लड़ने के कारण यह सीट सुर्खियों में आ गया है।

कांग्रेस ने तीसरी बार गहलोत को यहां से प्रत्याशी बनाया है। 179272 मतदाताओं वाले से इस विधानसभा क्षेत्र में पुरुषों की संख्या 95423 जबकि महिलाओं की संख्या 83849 है। गहलोत ने 2003 में चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार महेंद्र कुमार झावक को 18991 मतों से पराजित किया था। गहलोत को 58509 मत मिले, जबकि झावक को 39618 मत प्राप्त हुए थे।

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मतदाताओं के नाम कांग्रेस की अपील

 Nov 13, 11:07 pm   

जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार के शासनकाल में भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था, दलितों, आदिवासियों, किसानों और महिलाओं पर हुए अत्याचारों, सरकारी फिजूलखर्ची, अकुशल वित्तीय प्रबंधन सहित अनेक मुद्दों के साथ जनता के बीच जाएगी।

राज्य की पूर्व उप मुख्यमंत्री कमला की अध्यक्षता में हुई राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की चुनाव अभियान समिति की बैठक में यह निर्णय किया गया। समिति के सदस्यों ने मतदाताओं के नाम संयुक्त अपील की। इसमें कहा गया है कि पांच साल से भ्रष्ट, विफल एवं संवेदनहीन भाजपा सरकार के शासन से त्रस्त जनता इसे आगामी 4 दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में जड़ से उखाड़ फेंके। मतदाताओं से अपील की गई है कि वह राज्य में त्वरित विकास करने वाली संवेदनशील, आमजन की भावनाओं के अनुरूप एवं सुशासन देने वाली सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के पक्ष में मत मतदान करें।

बैठक में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डा. सी पी जोशी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सचिव विवेक बंसल, केंद्रीय मंत्री शीशराम ओला, केंद्रीय राज्यमंत्री नमोनारायण मीणा समेत वरिष्ठ नेता मौजूद थे।


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टिकट वितरण पर भाजपा में जमकर विरोध


Nov 17, 7:21 pm   जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण को लेकर भाजपा में असंतोष फूट पड़ा है और सांसदों को विधानसभा टिकट देने से कार्यकर्ता खासे नाराज हैं।

भाजपा प्रदेश मुख्यालय में मौजूदा विधायक कन्हैया लाल मीणा का टिकट कटने का विरोध करने आए सैकड़ों कार्यकर्ताओं में शामिल सुरेश मीणा ने कहा कि भाजपा निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दगा देगी, ऐसा मैंने नहीं सोचा था। एक ओर जितने वाले उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया, दूसरी ओर सांसदों को टिकट दे दिया। कार्यकर्ता विधानसभा टिकट मिलने की आस में काम करता है, लेकिन जब रोटी [टिकट] दूसरे को मिलती है तो कौन काम करेगा इस पार्टी के लिए।

सत्ता में पुन: काबिज होने में लगी भाजपा को उस समय करारा झटका लगा जब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक सलाहकार भरतपुर से भाजपा सांसद विश्वेंद्र सिंह उद्योग मंत्री डा. दिगंबर सिंह को पुन: टिकट देने पर विरोध जताते हुए न केवल राजनीतिक सलाहकार पद से बल्कि पार्टी से भी नाता तोड़ कर कांगे्रस में शामिल हो गए।

भाजपा के एक दिग्गज वरिष्ठ नेता ने विश्वेंद्र सिंह के इस कदम पर प्रतिक्रिया में कहा कि जब विश्वेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाने की बात चल रही थी उसी समय मैंने मुख्यमंत्री से कह दिया था कि आप तकलीफ पाएंगी। मुख्यमंत्री ने मेरी बात पर उस समय गौर नहीं किया और आज तकलीफ में पड़ गई। यह तो होना ही था।

राजस्थान के राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र शर्मा का कहना है कि वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर चुनाव मैदान में उतरी भाजपा की राहें आसान नजर नहीं आ रही है। शुरुआत में भाजपा कुछ आराम की स्थिति में नजर आ रही थी, लेकिन मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ ही स्थिति बदल रही है।

भाजपा में बगावती तेवर दिखाने वालों में सांसद विश्वेंद्र सिंह के अलावा वसुंधरा राजे मंत्रिमंडल में आबकारी मंत्री देवी सिंह भाटी, पूर्व खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री डा. किरोड़ी सिंह मीणा, अजमेर के सांसद रासा सिंह रावत, राजस्थान के संसदीय सचिव गोबिंद राम मेघवाल, बीस सूत्रीय क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह देवड़ा प्रमुख हैं।

इसके अलावा टिकट कटने से करीब बारह भाजपा विधायक नाराज होकर अंतिम क्षण तक भाजपा का टिकट मिलने की आस लगाए बैठे हैं। भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर इन विधायकों ने भाजपा से नाता तोड़ कर निर्दलीय या बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरने के संकेत दिए हैं।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि टिकट वितरण को लेकर कुछ स्थानों से शिकायतें मिली है। इस विरोध को सामान्य बताते हुए उन्होंने कुछ समय बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई है।

भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सांसद रामदास अग्रवाल का कहना है कि नए लोगों को चुनने पर पुराने लोगों को वेदना होती है, यह स्वाभाविक भी है। पार्टी नए लोगों को चुनती है तो यह सब कुछ होता है, लेकिन कुछ समय बाद आपसी मनमुटाव भूलकर पार्टी को जिताने में जुट जाते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी सोच-समझकर ही निर्णय करती है इस बारे में इससे कुछ अधिक कहना निरर्थक है।

राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र कुमार का कहना है कि भाजपा को सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने का फैसला भारी पड़ सकता है। सांसदों को टिकट देने से विधानसभा का चुनाव लड़ने का सपना संजोए कार्यकर्ताओं का उत्साह खत्म हुआ है।

उन्होंने कहा कि सांसदों को चुनाव में उतारकर पार्टी ने निचले स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी की है। पार्टी रूठे कार्यकर्ताओं को मना पाती है या नहीं, यह पार्टी के ब्लाक स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं पर निर्भर करता है। इस कैडर के कार्यकर्ताओं की कमी से भाजपा ही नहीं, कांगे्रस भी जूझ रही है।

महेंद्र कुमार ने कहा कि टिकट नहीं मिलने वाला हताश और निराश विधायक और कार्यकर्ता जीत की संभावना को लेकर या पार्टी को हराने की मन में ठान कर अन्य राजनीतिक पार्टी के बाड़े में चला जाता है। मौजूदा समय ऐसे लोगों की शरणस्थली बसपा बनी हुई है।

भाजपा ने बांसवाड़ा के सांसद थान सिंह जाटव को बांसवाड़ा से चित्तौड़गढ़ के सांसद श्रीचंद कृपलानी को बड़ी सादड़ी से, उदयपुर की सांसद किरण माहेश्वरी को राजसमंद से तथा कोटा के सांसद रधुवीर सिंह कौशल को अंता विधान सभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है।


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भाजपा शासन का अंत तय: सिब्बल


Nov 16, 9:08 pm 
जयपुर। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि जिस शासन में रात आठ बजे बाद जनता की सुनवाई नहीं हो, उस प्रदेश की जनता को ऐसा मुख्यमंत्री और ऐसा शासन नहीं चाहिए। ऐसे शासन का अंत होना तय है।

सिब्बल ने यहां प्रदेश कांगे्रस मुख्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राजस्थान में पांच साल से छाए अंधेरे का अंत होने वाला है। जब तक प्रशासन और सरकार जनता के बारे में नहीं सोचे या रात आठ बजे बाद जनता के लिए दरवाजे बंद हो जाए, वहां की जनता ऐसे शासन को बदलने का मानस बना चुकी है।

उन्होंने राजस्थान की भाजपा सरकार को महिला और दलित विरोधी बताते हुए कहा कि पांच साल में दलितों और महिलाओं पर जमकर अत्याचार हुए पुलिस फायरिंग में नब्बे लोग मारे गए हैं।

सिब्बल ने कहा कि शासन का काम जान लेना नहीं होता। जनता चार दिसंबर को मतदान करके इस बात का जवाब देगी।

सिब्बल ने आंकड़ों के आधार पर बताया कि राजस्थान की भाजपा सरकार ने केंद्र से प्राप्त की गई आर्थिक मदद का या तो दुरुपयोग किया या राशि खर्च नहीं की जिससे आम लोगों को योजना का फायदा नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना को सही ढंग से लागू नहीं किया जिससे जरूरतमंद योजना का फायदा नहीं उठा सके।

सिब्बल ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि राजस्थान सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण गारंटी योजना का झालावाड़ और बांसवाड़ा में सामाजिक अंकेक्षण नहीं होने दिया जिससे सही स्थिति सामने नहीं आ सकी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने इस योजना के तहत श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं कर सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान में इस योजना के तहत अधिकतम 51 रुपये प्रति दिन मजदूरी का भुगतान किया गया, जबकि न्यूनतम मजदूरी 73 रुपये है। 22 रुपये कहां गए, यह सरकार को बताना चाहिए।

सिब्बल ने केंद्रीय मंत्रियों द्वारा राजस्थान दौरों के समय राज्य सरकार के कार्यो की प्रशंसा को लेकर किये प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि मंत्रियों ने किस आधार पर तथा किस वजह से प्रशंसा की यह तो वे ही बता सकते हैं, लेकिन मैं आंकड़ों के आधार पर कह रहा हूं, हवा में नहीं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 12 लाख लोग पंजीकृत है तो राज्य सरकार ने मात्र दो लाख चालीस हजार लोगों को ही काम क्यों दिया सरकार को जवाब देना चाहिए।

सिब्बल ने इससे पूर्व जयपुर के कांगे्रस प्रत्याशी प्रताप सिंह खाचरियावास और राजीव अरोड़ा के समर्थन में चुनाव प्रचार भी किया।

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भाजपा ने बिजली संकट बढ़ाया : चंद्रभान

10 Nov 2008

जयपुर,  पूर्व ऊर्जा मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान ने राज्य की भाजपा सरकार पर बिजली संकट बढ़ाने को आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली उत्पादन को जो गति कांग्रेस सरकार के समय मिली थी वह मौजूदा सरकार के समय बिल्कुल थम गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय 1750 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ है। भाजपा सरकार के समय में 750 मेगावाट बिजली उत्पादन हुआ है। डॉ. चंद्रभान ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वसुंधरा राजे ने भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से पांच साल पहले राज्य को आत्मनिर्भर बनाने का वायदा किया था। लेकिन इस लिहाज से कोई प्रयास नहीं किए गए। भाजपा सरकार के समय बिजली का घाटा 2500 करोड़ का हो गया जबकि कांग्रेस सरकार के समय यह घाटा केवल 1200 करोड़ था। उन्होंने कोयला खरीद में घोटाले का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय में छह से आठ घंटे बिजली मिलती थी। जबकि अब बिजली आपूर्ति का कोई समय निश्चित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में पौने दो लाख बिजली कनेक्शन लंबित है। उन्होंने कहा कि पांच साल में एक भी नया उद्योग नहीं आया। पांच साल में न तो उद्योग नीति बन सकी और न ही निवेश नीति बनी।

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भाजपा से नाराज राजपूतों का फैसला 12 को

जयपुर,  भारतीय जनता पार्टी का परंपरागत वोट समझा जाने वाला राजपूत समाज विधानसभा चुनावों में इस बार साथ छोड़ सकता है। भाजपा से टिकटों में उपेक्षा के अंदेशे को भांपकर राजपूतों के सबसे बड़े संगठन श्री प्रताप फाउंडेशन ने 12 नवंबर को नई रणनीति के लिए प्रबुद्ध नेताओं की जयपुर बैठक बुलाई है। पता चला है कि फाउंडेशन के संयोजक भगवान सिंह रोलसाहबसर ने हाल ही कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की है। इसे सियासी हलके में नए संकेत माना जा रहा है। बदली परिस्थितियों में प्रदेश में नए सियासी समीकरणों की संभावना प्रबल हो गई है। बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से जाति विशेष को ही महत्व दिए जाने से राजपूत समाज में नाराजगी है। समाज के प्रबुद्ध नेताओं के भारी दबाव के चलते भगवान सिंह रोलसाहबसर ने यह बैठक बुलाई है। संभावना जताई जा रही है कि फाउंडेशन विधानसभा चुनावों को लेकर कोई बड़ा निर्णय ले सकता है। श्री प्रताप फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एंव भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर को प्रदेश में 42 सीटों पर राजपूत प्रत्याशियों की सूची सौंपकर टिकट देने की मांग रखी। भाजपा की ओर से उत्साहजनक आसार नहीं मिलने एवं उपेक्षापूर्ण रवैये को देखकर फाउंडेशन से जुड़े पदाधिकारी नाराज हो गए है। टिकट नहीं मिलने पर राजपूत प्रभाव वाली सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी उतारकर चुनाव लड़ने पर भी विचार किया जा सकता है। 

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टिकटों को लेकर रूठों को मनाने में जुटी कांग्रेस

जयपुर, कांग्रेस में टिकटों को लेकर आए उबाल को ठंडा करने के लिए अब रूठों को मानने की कवायद शुरू हो गई है। पार्टी वरिष्ठ नेताओं ने असंतुष्टों को मनाने की कोशिश तेज कर दी है। प्रत्याशियों की अगली सूची शीघ्र जारी होने की संभावनाओं के मद्देनजर टिकटार्थियों ने दिल्ली और जयपुर में नेताओं के घरों पर डेरा डाले रखा। प्रत्याशियों को दो सूचियां आने के बाद भी विरोध के सुर थम नहीं रहे है। इस कारण अब वरिष्ठ नेता टिकटों को लेकर असंतुष्टों को मनाने में लगे है। कोटों से पूर्व मंत्री रामकिशन वर्मा ने विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को मनाया। वहीं प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी और राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहन प्रकाश ने भी छठे कार्यकर्ताओं को समझाने के लिए जिला स्तर के नेताओं को प्रयास करने को कहा है। प्रांतीय नेता अब इस तैयारी में है कि टिकट से वंचित लोगों को संगठन या सरकार आने पर अन्य कहीं 'एडजेस्ट' करने का भरोसा दिलाया जाए। इस कारण जयपुर में आदर्श नगर, किशन पोल, विद्याधर नगर सीटों पर विरोध कम हो गया है।

चुनाव आयोग ने पर्यवेक्षकों को प्रत्याशियों के खिलाफ शिकायत सुनने के लिए भी अधिकृत किया है। आयोग ने उनसे विधानसभा क्षेत्र का दौरान कर कमजोर एवं गरीब तबके के लोगों को भयमुक्त वातावरण में मतदान करने के लिए पुख्ता व्यवस्था करने को कहा है। पर्यवेक्षक क्षेत्र में लाइसेंसशुदा हथियार थाने में जमा कराने एवं अवैध हथियारों के बारे में भी पुलिस प्रशासन को निर्देश दे सकेंगे। प्रत्याशियों के नामांकन पत्र भरते समय शपथ पत्र में उल्लेखित संपत्तिा, मुकदमे एवं न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों के बारे में आमजन तक जानकारी पहुंचाना सुनिश्चित करेगे।

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सिर्फ जीत ही लक्ष्य


चुनाव के लिए कांग्रेस की क्या तैयारी है
हमने प्रयास किए है कि जमीनी कार्यकर्ता को मोबलाइज किया जाए। चुनाव में अब माइक्रो मैनेजमेंट की बडी भूमिका है। हमने सद्भावना सम्मेलनों, राजनीतिक सम्मेलनों के जरिए कार्यकर्ताओं को गियरअप किया। अब एआईसीसी के 100 पर्यवेक्षक और प्रदेश के 200 कोर्डिनेटर सभी क्षेत्रों में चुनाव प्रबंधन देखेंगे।

प्रचार की क्या रणनीति रहेगी
सोनिया और राहुल के दौरें तो होंगे ही, अन्य बडे नेता भी सभाएं करेंगे। बूथ लेवल कार्यकर्ता भी भूमिका निभाएंगे।

वे कौनसे मुद्दे हैं, जिन पर भाजपा सरकार विफल रही और आप उसे उन मुद्दों पर कैसे घरेंगे
भाजपा अच्छी सरकार और सुशासन देने में विफल रही। जातिगत आंदोलनों के कारण सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचा। कानून व्यवस्था बिगडी रही और सरकार खुद के झगडों को निपटाने में लगी रही। ऎसे बहुत से मुद्दे हैं, जिन पर भाजपा को घेरेंगे।

चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस का सबसे मजबूत पक्ष कौन सा हैै
कांग्रेस का सबसे मजबूत पक्ष यह रहा कि हमने अपने संगठन को सही समय पर गियरअप किया। चुनाव सम्बन्धी सभी निर्णयों में प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय भागीदारी रही।

सक्रिय भागीदारी की बात कह रहे हैं, जबकि टिकट वितरण मेंं एकराय नहीं बन पाई
देखिए एकराय इस बात पर है कि हमें जीत कर आना है और सरकार बनानी है। छोटी-मोटी बातें होती रहती है जो कांग्रेस जैसी लोकतांत्रिक पार्टी के लिए सामान्य बात है।

एंटनी कमेटी की सिफारिशें बदले हालात में कितनी लागू हो पाई
देखिए एंटनी कमेटी ने सिर्फ चुनाव से पहले का एक कैलेण्डर तैयार किया था, जिसके तहत चुनाव से एक-दो माह पहले सूची जारी करने की बात मुख्य थी। पार्टी की प्राथमिकता कुछ और रही, इसलिए देरी हो गई।

प्रत्याशी चयन में जातिगत व धार्मिक समीकरण कितने प्रभावी रहे
कांग्रेस का पूरा प्रयास रहा कि अच्छे उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरें। हमने जिला व पंचायतस्तर तक के नेताओं को मौका देने की कोशिश की है।

आपके हिसाब से मतदाताओं को उम्मीदवार चुनने में सबसे ज्यादा क्या चीज प्रभावित करती है
देखिए राजस्थान में मतदाता विचारधारा पर वोट देता है। जाति व धर्म दूसरे स्थान पर आते हैं।

बसपा कितना नुकसान पहुंचाएगी
देखिए बसपा अपना वोट प्रतिशत तो प्रदेश में बढा सकती है, लेकिन यह बहुत ज्यादा असर डालेगी, इसमें मुझे संदेह है।नुकसान की बडी सम्भावना नहीं दिखती है।

पिछले चुनाव में हार के क्या कारण रहे
यह सही है हमने भारी बहुमत हासिल किया, लेकिन समस्या यह रही कि जीत कर आने वाले विधायकों ने पांच साल के दौरान समर्पित कार्यकर्ताओं की वह फौज तैयार नहीं की जो दुबारा उन्हें जिता सके। इस कमी को दूर करने के लिए ही इस बार हमनें माइक्रो मैनेजमेंट का सहारा लिया है।

कांग्रेस किसी को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट क्यो नहीं करती
कांग्रेस संसदीय लोकतंत्र में विश्वास करने वाली पार्टी है। चुने हुए विधायक कांग्रेस आलाकमान को अपनी राय भेजते हैं। कांग्रेस की परम्परा हमेशा से यही रही है।

पर क्या जनता को यह पता नहीं होना चाहिए कि जिस पार्टी को वे वोट दे रहें हैं, उसका भावी नेता कौन होगा
हमारे यहां राष्ट्रपति प्रणाली नहीं है। ऎसा वहीं होता है।

क्या आप भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में हैं
सिर्फ एक लक्ष्य है कि पार्टी को जिता कर लाना है। यह लक्ष्य पार्टी ने मुझे दिया है। ऎसा कोई सवाल ही नहीं है।

विपक्ष के नाते कांग्रेस के प्रदर्शन पर क्या राय है
कांग्रेस ने सक्रिय विपक्ष की भूमिका निभाई और खासतौर पर विधानसभा के मंच का सही उपयोग किया।

हर पार्टी चहुमंखी विकास का सपना दिखाती है, आखिर जनता के सपने कब पूरे होंगे
हर पार्टी को अपनी प्राथमिकता तय कर के काम करना चाहिए। विकास की बहुत सी परियोजनाएं केन्द्र की नीतियों पर निर्भर करती है। हमारी सरकार के समय सिर्फ सात हजार करोड केन्द्र ने दिए, जबकि इस सरकार के समय तीस हजार करोड मिले। ऎसी बहुत सी बाते हैं
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कांग्रेस के लिए वोट मांगेगी एनएसयूआई

6 Nov 2008

Nov 06, 05:51 pm
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के कार्यकर्ता अपने वरिष्ठ नेताओं के लिए घर-घर जाकर वोट मांगेंगे, लेकिन भाजपा को युवा शक्ति के लिए किसी अन्य विकल्प की तलाश करनी होगी, क्योंकि इसकी छात्र इकाई एबीवीपी ने चुनाव प्रचार में भाग लेने से मना कर दिया है।
चुनाव से तीन सप्ताह पहले एनएसयूआई ने प्रचार के लिए विस्तृत योजना तैयार की है जिसमें घर-घर जाकर प्रचार करना भी शामिल है। उनका लक्ष्य पहली बार मतदान करने वाले लोगों और छात्रों को रिझाना है। एनएसयूआई का दावा है कि दिल्ली में 40 हजार छात्र उनके सदस्य हैं और प्रचार के लिए 20 हजार छात्रों को लगाए जाने की उम्मीद है।
एनएसयूआई के प्रवक्ता आनंद पांडेय ने कहा कि इस बार हम एक विशेष लक्ष्य के तहत काम करेंगे। नेता और कार्यकर्ता छात्रों एवं युवाओं को संबोधित करेंगे। हमारे प्रखंड एवं कालेज इकाइयों को उनके क्षेत्रों में कांग्रेस उम्मीदवारों के समर्थन में काम करने का निर्देश दिया गया है।
एबीवीपी ने हालांकि कहा कि वह संगठन स्तर पर चुनाव प्रचार अभियान में हिस्सा नहीं लेगी। एबीवीपी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष राज कुमार शर्मा ने कहा कि चुनाव में हम संगठन स्तर पर शामिल नहीं होंगे क्योंकि हमारा उद्देश्य छात्रों के कल्याण के लिए काम करना है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि छात्रों को भाजपा उम्मीदवारों के लिए काम करने पर मनाही नहीं होगी। शर्मा ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय होगा।
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कांग्रेस में फिर रहा वंशवाद का बोलबाला

Nov 06, 12:59 pm
जयपुर। राजस्थान विधान सभा की दो सौ सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस के घोषित प्रत्याशियों में राष्ट्रपति, पूर्व उप राष्ट्रपति, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, पूर्व उप मुख्यमंत्री, बुजुर्ग नेताओं तथा पूर्व मंत्रियों के रिश्तेदारों का बोलबाला है।
राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों द्वारा जाने-माने लोगों के रिश्तेदारों को टिकट देना नई बात नहीं है।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार कांग्रेस द्वारा घोषित 146 उम्मीदवारों में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व उप राष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत, राज्यपाल पं.नवल किशोर शर्मा, उप राज्यपाल गोबिंद सिंह गुर्जर, केंद्रीय मंत्री शीश राम ओला, राजस्थान की पूर्व उप मुख्यमंत्री कमला, पूर्व सांसदों, पूर्व मंत्रियों तथा बुजुर्ग नेताओं या दिवगंत नेताओं के निकटतम रिश्तेदारों के उन्नीस नाम सूची में शामिल हैं।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार घोषित उम्मीदवारों में विजेंद्र सिंह [उदयपुरवाटी] राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के निकटतम रिश्तेदार हैं। घोषित उम्मीदवारों में मौजूदा विधायक बृज मोहन शर्मा [हवामहल], गुजरात के राज्यपाल पं.नवल किशोर शर्मा के पुत्र हैं। उप राज्यपाल गोबिंद सिंह गुर्जर के करीबी रिश्तेदार महेंद्र सिंह अजमेर जिले की नसीराबाद विधान सभा सीट से भाग्य आजमाएंगे। गोबिंद सिंह गुर्जर नसीराबाद सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं।
यह अलग तथ्य है कि पूर्व उप राष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत संवैधानिक पद संभालने से पूर्व तक भाजपा से जुड़े रहे, लेकिन कई साल पूर्व कांग्रेस से नाता जोड़ चुके उनके भतीजे प्रताप सिंह खाचरियावास इस चुनाव में कांग्रेस टिकट पर सिविल लाइंस [जयपुर] विधान सभा सीट से चुनाव मैदान में हैं।
केंद्रीय मंत्री शीश राम ओला के पुत्र बिजेंद्र सिंह ओला चौथी बार झुंझुनूं विधान सभा सीट से चुनाव मैदान में हैं। बिजेंद्र ओला तीन दफे विधान सभा चुनाव में पराजय का सामना कर चुके हैं। इसके बावजूद कांग्रेस ने ओला के पुत्र को ही जिताऊ उम्मीदवार मानकर चुनाव मैदान में उतारने का निर्णय किया।
राजस्थान की पूर्व उप मुख्यमंत्री कमला के पुत्र आलोक कुमार शाहपुरा [जयपुर] सीट से भाग्य अजमाएंगे। कांग्रेस का टिकट पाने में विफल रहे एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस के दोहरे मापदंड चुनाव में भारी पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी उच्च कमान ने उम्मीदवार चयन में जिताऊ मतदाताओं की पंसद को आधार माना तो फिर बिजेंद्र ओला को कौन से मापदंड पूरे करने पर टिकट दिया गया, यह सोच का विषय है।
कांग्रेस के घोषित प्रत्याशियों में पूर्व सांसद जमुना बांपाल की पुत्रवधू सुषमा बांपाल, पूर्व मंत्री लेकिन अब चुनाव दौड़ से बाहर हीरा लाल इंदौरा के पुत्र कुलदीप इन्दौरा, अनूपगढ़ सीट से पूर्व मंत्री चंदन मल, बैद के विधायक पुत्र डा.सीएस बैद, तारानगर से पूर्व मंत्री और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम नारायण चौधरी की पुत्री रीटा कुमारी मंडावा सीट से चुनाव मैदान में है।
पूर्व मंत्री स्व.तैयब हुसैन की पुत्री जाहिदा कांमा से पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल जगन्नाथ पहाडिया के पुत्र संजय पहाडिया, वैर से पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह भाटी के पुत्र सुरेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री खेत सिंह राठौड़ के पुत्र उम्मेद सिंह, पूर्व मंत्री नरपत सिंह बरबड़ की पत्नी हीरा देवी, पूर्व मंत्री राम सिंह विश्नोई के पुत्र मलखान सिंह, पूर्व मंत्री खेम राज कटारा की पत्नी सज्जन कटारा, पूर्व मंत्री भीखा भाई का पुत्र सुरेंद्र धामनिया चुनाव मैदान में किस्मत आजमाएंगे।
पूर्व मंत्री दुला राम के पुत्र दौलत राज नायक रायसिंह नगर से पूर्व गृहमंत्री गुलाब सिंह शक्तावत के पुत्र गजेंद्र सिंह शक्तावत वल्लभनगर से राजस्थान के आबकारी मंत्री देवी सिंह भाटी के रिश्तेदार सुनिता भाटी भी कांग्रेस टिकट पर चुनाव मैदान में है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहन प्रकाश ने रिश्तेदारों को टिकट देने को जायज बताते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों तथा केंद्रीय मंत्री या जनप्रतिनिधियों के परिजनों को टिकट पार्टी के लिए किए कार्यो को देखते हुए दिए गए हैं।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी का मानना है कि कांग्रेस में वंशवाद की परंपरा रही है। यदि किसी को पार्टी में सक्रिय होने की वजह से टिकट मिला है तो जायज है, लेकिन केवल रिश्तेदार के मापदंड के आधार पर टिकट दिया गया है तो यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वंशवाद पर ही सालों से चली आ रही है तो इससे मोह कैसे दूर हो सकता है।
कांग्रेस मुख्यालय में आए नागौर के एक कार्यकर्ता दशरथ सिंह ने राजनीतिक दलों में परिवारवाद को लेकर अपनी चिंता का जिक्र करते हुए कहा कि मेरा दुर्भाग्य है कि मेरे परिवार में कांग्रेस या अन्य पार्टी के टिकट पर चुनाव नहीं जीता वरना मुझे इतनी मशक्कत नहीं करनी पड़ती। सालों बाद काम करने के बावजूद मुझे विधायक के नाम पर विचार करना तो दूर पंचायत समिति के चुनाव में भी पार्टी ने टिकट देना उचित नहीं समझा क्योंकि मेरे नाम को आगे बढ़ाने के लिए मेरा रिश्तेदार बड़ा नेता नहीं है।
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जब मंच छोड़ भागे डॉ. किरोड़ीलाल

1 Nov 2008


Oct 29, 11:34 pm
जयपुर, सवाई माधोपुर के खंडीप में आयोजित मीणा समाज की महापंचायत में पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री की गंगापुर से चुनाव लड़ने की इच्छा को उस समय करारा झटका लगा जब मीणा समाज के लोगों ने किरोड़ी को समर्थन देने से इनकार कर दिया। पिछले दिनो किरोड़ी लाल मीणा व उनके समर्थकों की ओर से आयोजित मीणा समाज की पंचायत उन्हीं के भारी पड़ी। हालात इस कदर हो गए कि डॉ. मीणा की मंच छोड़कर भागना पड़ा। मीणा समाज के लोगों ने बसपा प्रत्याशी रामकेश मीणा का खुलेआम समर्थन किया। दोपहर दो बजे खंडीप गांव में आयोजित मीणा समाज की महापंचायत में डॉ.किरोड़ीलाल मीणा के समर्थकों ने मीणा से गंगापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का भी भरोसा दिलाया। समाज के लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि इस बार मीणा समाज का व्यक्ति ही विधायक चुन कर जाएं। इस बीच उपजिला प्रमुख विजय मीणा ने कहा कि यदि किरोड़ी खड़े होते है तो वे भी उनका समर्थन करेगी साथ में पूर्व जिला प्रमुख पंखी लाल मीणा ने भी उनका समर्थन किया। लेकिन बसपा प्रत्याशी रामकेश मीणा की जब बारी आई तो उन्होंने कहा कि अब तीर कमान से निकल चुका है तथा बसपा ने उन्हे अपना उम्मीदवार बनाया है। यदि समाज के लोग उन्हें समर्थन करते है तो वे जरूर चुनाव जीतेंगे। इस बार पर उपस्थित लोगों ने हाथ खड़े कर रामकेश मीणा का समर्थन किया। डॉ. किरोड़ी लाल व उसके समर्थक भड़क गए वे किरोड़ी मंच पर जा पहुंचे। उन्होंने समाज के लोगों से कहा कि उन्होंने समाज के लिए इतना कुछ किया। जहां तक कि मंत्री निकालने तक की तैयारी हो चुकी थी। इतना बलिदान देने के बाद भी यदि समाज के लोग उनका समर्थन नहीं करते है तो उनका त्याग बेकार है। लेकिन फिर भी समाज के लोगों ने डॉ. किरोड़ी का समर्थन नहीं किया इस पर डॉ.मीणा गुस्सा हो माइक को मंच पर पटक कर अपने समर्थकों के साथ भाग खड़े हुए। इधर मीणा समाज के समर्थक के बाद रामकेश मीणा के समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला। बसपा प्रत्याशी रामकेश मीणा का कहना है कि जनता सर्वे सर्वा है व वह जिसका चाहे समर्थन कर सकती है। महापंचायत में समाज के लोगों ने उनका समर्थन कर उनका उत्साह और बढ़ा दिया। मीणा समाज की महापंचायत में खंडीप सरपंच किरोड़ी मीणा, मक्खन, लाल मीणा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बृजलाल मीणा सहित समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित थे।



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सूची में कुछ बदलाव कर सकती है कांग्रेस

Nov 01, 12:14 am

जयपुर,राज्य विधानसभा चुनाव के लिए घोषित 116 उम्मीदवारों की सूची में कांग्रेस कुछ बदलाव कर सकती है। कांग्रेस आलाकमान ने इस बारे में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी से चर्चा की है। तय सूची में संशोधन का कारण कुछ उम्मीदवारों का विरोध एवं भाजपा प्रत्याशी के सामने कमजोर होना है। बदलने वाले उम्मीदवारों की संख्या करीब आधा दर्जन हो सकती है। इधर दिग्गज किसान नेता और असंतुष्ट गुट के नेता परसराम मदेरणा ने लंबे समय बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए उम्मीदवारों के चयन में पक्षपात और किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया है। मदेरणा ने जोधपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि टिकट वितरण में पैसे का खेल चला। चापलूसों को खूब टिकट दिए गए। मदेरणा ने कहा कि टिकट वितरण में मेरी राय नहीं मांगी गई। बल्कि मैंने खुद राय दी। किसान को अपना आराध्य देव बताते हुए मदेरणा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मेरी कोई तुलना नहीं है। मदेरणा की चुप्पी तोड़ने के बाद कांग्रेस की राजनीति में उबाल आने की उम्मीद है। आलाकमान की मंशा को देखते हुए तय सीटों के दावेदार एक बार सक्रिय हो गए है। गहलोत शनिवार को सुबह दिल्ली जा रहे है। जोशी भी अगले दो दिन में दिल्ली पहुंचेंगे। दोनों के दिल्ली पहुंचने के बाद ही बदलाव पर विचार-विमर्श होगा। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पहली सूत्री में बदलाव और शेष 84 सीटों के लिए नामों की घोषणा अब नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिनों में होगी। इधर गहलोत और जोशी में आज उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होने के बाद चर्चा हुई। गहलोत ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया के साथ भी चर्चा की। गहलोत के निवास और प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में दिनभर टिकट चाहने वालों की भीड़ रही। वहीं कई सीटों पर तय उम्मीदवारों के खिलाफ विरोध भी दर्ज कराया गया

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राज. के लिए कांग्रेस की 116 उम्मीदवारों की सूची जारी

29 Oct 2008

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (Dingal Times)। कांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए 116 उम्मीदवारों की पहली सूची आज जारी कर दी जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सीपी जोशी और हेमाराम चौधरी के नाम शामिल हैं। राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं। भाजपा से राज्य की सत्ता हासिल करने के लिए प्रयासरत कांग्रेस की सूची के अनुसार गहलोत को फिर से सरदारपुरा से टिकट दिया गया है जबकि जोशी को नाथद्वारा और चौधरी को गुढ़ामालानी सीट से मैदान में उतारा गया है। सूची में शामिल अन्य प्रमुख उम्मीदवारों में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बीडी कल्ला (बीकानेर पश्चिम), चंद्रभान (मालपुरा), पूर्व सांसद शांति धारीवाल (कोटा उत्तर) आदि शामिल हैं। सूची- कुलदीप इंदोरा(अनूपगढ़ सुरक्षित), विनोद कुमार (हनुमानगढ़), अदराम मेघवाल (पीलीबंगा सु.), संजीव बेनीवाल (भद्रा), सुषमा बारूपाल (खाजूवाला सु.),बीडी कल्ला(बीकानेर-पश्चिम), तनवीर मालावत (बीकानेर-पूर्व), वीरेन्द्र बेनीवाल (लूनकरनसर), मंगलाराम गोदारा (डूंगरगढ़), रामेश्वर डूडी (नौखा), नंदलाल पूनिया (सादुलपुर), सीएस बैद (तारानगर), भंवरलाल शर्मा (सरदारशहर), भंवरलाल मेघवाल (सुजानगढ़ .सु), श्रवण कुमार (सूरजगढ़), बृजेन्द्र सिंह आ॓ला (झुंझुनूं), रीता कुमारी (मांडवा), प्रतिभा सिंह (नवलगढ़), विजेन्द्र सिंह (उदयपुरवटी), जितेन्द्र सिंह (खेतड़ी), भंवरू खान (फतेहपुर), गोविंद सिंह दोतसारा (लक्ष्मणगढ़), परशराम मोर्दिया (धौद.सु), राजेन्द्र पारिख (सीकर), नारायन सिंह (दातारामगढ़), महादेव सिंह (खंडेला), भगवान सहाय सैन (चौमू),हरि सिंह (फुलेरा), बाबूलाल नागर (दुदु सु), लालचंद कटारिया (झोटवाड़ा), गोपाल मीणा (जमवारामगढ.़सु), बृजकिशोर शर्मा (हवामहल), विक्रम सिंह शेखावत (विघाधरनगर), प्रताप सिंह खाचरियावास (सिविल लाइंस) मोहम्मद माहिर आजाद (आदर्शनगर), राजीव अरोड़ा (मालवीय नगर) गंगादेवी वर्मा (बांगरू .सु.) वेदप्रकाश सोलंकी (चाकसू .सु), एमामुद्दीन अहमद खान (तिजारा),दीपचंद खेरिया (किशनगढ़ बास) आ॓पी यादव(मुंडवार), टीकाराम जूली (अलवर ग्रामीण.सु.),जुबेर खान (रामगढ़), रमेश खिची (कठुमाड .सु), जाहिदा (कमान), संजय पहाड़िया(वैइर.सु.) निर्भयलाल जाटव (बयाना.सु.), बद्री प्रसाद जाटव (बसेरी.सु.), अलोक शर्मा (धौलपुर), प्रद्धुमन सिंह (राजाखेड़ा),मुरारी लाल मीणा (टोडाभीम .सु) ममता भूपेश (सीकराई.सु), दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर),नवल किशोर मीणा (बामनवास.सु.) अशोक बैरवा (खांदर .सु.) चंद्रभान(मालपुरा) राजकुमार जयपाल (अजमेर, दक्षिण.सु.),महेन्द्र सिंह (नसीराबाद),मंजू मेघवाल (जायल. सु.) रिचपाल मिर्धा (डेगाना), सीडी देवल (जैतारन), मिश्रीलाल मेघवाल (सोजट .सु.), खुशवीर सिंह (मारवाड़ा जंक्शन), आ॓म प्रकाश जोशी (फलोदी), मृगेन्द्र सिंह पुत्र नरेन्द्रसिंह भाटी (लोहावत), उमेद सिंह राठौड़ (शेरगढ़), महिपाल मदेरणा (आ॓सियां), हीरा देवी मेघवाल (भोपालगढ़.सु.) अशोक गहलोत (सरदारपुरा),जुगल काबरा (जोधपुर), सईद अंसारी (सूरसागर),मलखान सिंह बिश्नोई(लूणी),शंकर लाल चौहान (बिलारा .सु.), अमीन खान (शिव), मेवा राम जैन (बाडमेर),हेमाराम चौधरी (गुडामालानी), पराम मेघवाल (चोहतन .सु.), भगराज चौधरी (आहोर), समरजीत सिंह (भीनमाल), संयम लोढा (सिरोही),गंगाबेन गरसिया (पिंडवाड़ा आबू.सु), नीरज डांगी (रेवदर .सु.), मंगीलाल गरसिया (गोगुंडा .सु.), दयाराम परमार (खेरवाडा .सु.), सज्जन कटारा (उदयपुर ग्रामीण.सु.),पुष्कर लाल डांगी (मावली), रघुवीर सिंह मीणा (सलुम्बर .सु.), नागराज मीणा (धारियावाड .सु.),रैया मीणा (असपुर.सु.),सुरेन्द्र बमानिया (सागवाडा.सु.), शंकर लाल अहरी (चोरासी.सु.), महेन्द्रजीत सिंह मालवीय (बागीडोरा.सु.), सावलाल डिंडोर (कुशालगढ़.़सु.), उदयलाल अंजाना (निबोहेड़ा), प्रकाश चौधरी (बाडी सदरी), बहादुर मीणा (प्रतापगढ़.सु.), लक्ष्मण सिंह रावत (भीम),गणेश सिंह परमार (कुंभलगढ़), हरि सिंह राठौड़ (राजसमंद),सीपी जोशी (नाथद्वारा), हंगामीलाल मेवाड़ा (असिंद),रामलाल जाट (मंडल),कैलाश त्रिवेदी (सहारा),हरिमोहन शर्मा (हिंडोली),ममता शर्मा (बूंदी),प्रेम चंद नागर (पिपलड़ा),भरत सिंह (सांगोड़), शांति धारीवाल (कोटा उत्तर),नईमुद्दीन (लाडपुरा),राम गोपाल बैरवा (रामगंज मंडी.सु.),प्रमोद जैन (अंटा), निर्मला सेहरिया (किशनगंज.सु.),करण सिंह राठौड़ (छबरा),मदनलाल वर्मा (डाग .सु.), मीनाक्षी चंद्रावत (खानपुर), कैलाश मीणा (मनोहर थाना)। Last Updated [ 10/30/2008 5:05:41 AM]
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राज्य सरकार पर बरसे गहलोत

20 Oct 2008

जयपुर,

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के महासचिव अशोक गहलोत ने राज्य में मलेरिया, चिकनगुनिया एवं डेगू सहित अन्य मौसमी बीमारियों के जानलेवा प्रकोप से अब तक राज्य में सौ से अधिक लोगों के मरने एवं लाखों लोगों के बीमार होने पर दुख व्यक्त करते हुए राज्य सरकार द्वारा इन पर काबू पाने में बरती जा रही आपराधिक लापरवाही को चिंताजनक बताया है। गहलोत ने एक बयान में कहा कि पिछले तीन महीनों से राजस्थानी जयपुर सहित कमोबेश राज्य के सभी जिलों से मलेरिया, डेंगू एवं अन्य मौसमी बीमारियों के फैलने की ़खबरें आ रही थीं। लेकिन चुनावी चिंता में डूबी भाजपा सरकार ने उन्हे रोकने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उल्टे वह तबादला उद्योग में लगी रही। इसके श्किार डाक्टर ,नर्स और कंपाउंडर सहित वे सभी हजारों कर्मचारी भी हुए जिनका काम इन बीमारियों पर काबू पाना था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एवं स्वस्थ मंत्री नरपत सिंह राजवी द्वारा इस ओर ध्यान नहीं देने तथा डॉक्टरों सहित अन्य सभी कर्मचारियों के अस्पताल, डिस्पेंसरियों में नहीं मिलने से आज पूरे राज्य में इन बीमारियों ने विकराल रूप ले लिया है। अब तो चिकनगुनिया के भी फैलने की रिपोर्ट आने लगी है। राजधानी जयपुर सहित राज्य के हर जिले में घर-घर ये बीमारियां फैली हुई है। खुद सरकार के अफसर राज्य में पचास हजार से अधिक तो अकेले मलेरिया रोगी और दो सौ से ज्यादा डेगू के मरीजों की संख्या मान चुके है। उन्होंने कहा कि बीमारियां होती है, लेकिन दुख की बात यह है कि अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में इनके इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। मरीज गांव से शहरों की ओर दौड़ रहे है और सही इलाज नहीं मिलने पर वही दम तोड़ रहे है। अकेले जयपुर में मलेरिया, डेगू डिप्थीरिया और अन्य बीमारियों से पिछले महीनों में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है।




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कांग्रेस के घोषणा पत्र को लेकर कसरत

जयपुर,

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने विधानसभा चुनाव के लिए घोषणा-पत्र तैयार करना शुरू कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डॉ.बीडी कल्ला की अध्यक्षता में रविवार को हुई चुनाव घोषणा-पत्र समिति की बैठक में मसौदे पर चर्चा हुई। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के दिल्ली से लौट ने के बाद घोषणा पत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा। घोषणा-पत्र समिति की बैठक में पूर्व मंत्री प्रधुम्न सिंह, डा. चंद्रभान शांति धारीवाल मौजूद थे। इधर चुनाव में मीडिया प्रबंधन को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री मुकुल वासनिक ने रविवार को दिल्ली में बैठक ली। बैठक में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मीडिया टीम के सदस्य मौजूद थे।




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चुनाव आयोग ने रोकी भामाशाह योजना

जयपुर,

 मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मह8वाकांक्षी भामाशाह वित्तीय सशक्तीकरण एवं नारी समृद्धि योजना पर अब केंद्रीय चुनाव आयोग ने रोक लगा दी है। आयोग ने राज्य सरकार को साफ तौर पर कहा है कि चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न होने तक इस योजना के तहत न तो स्मार्ट कार्ड बनाएं और न ही किसी महिला के नाम से बैंक खाता खुलवाने पर 1500 रु. की प्रोत्साहन राशि दी जाए। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद जुत्शी ने इस संबंध में मुख्य सचिव डीसी सामंत को पत्र लिखकर योजना की क्रियान्विति आगामी आदेश तक रोकने को कहा था। निर्वाचन विभाग के सूत्रों ने केंद्रीय चुनाव आयोग से योजना की क्रियान्वयन रोके जाने संबंधी निर्देश मिलने की पुष्टि की है। राज्य सरकार ने विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर यह योजना लागू की थी।




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मदेरणा, जाखड़, मिर्धा ने बनाया मुझे सीएम: गहलोत

जयपुर, 

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के महासचिव अशोक गहलोत का कहना है कि वरिष्ठ नेता परसराम मदेरणा, मध्यप्रदेश के राज्यपाल बलराम जाखड़ और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम निवास मिर्धा के कारण ही में मुख्यमंत्री बना था। पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस में चल रहे आंतरिक गतिरोध और मदेरणा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र के बाद गहलोत का बयान आना मह8वपूर्ण माना जा रहा है। गहलोत ने कहा कि पिछले दस साल में कुछ लोगों ने उनके और मदेरणा के बीच गलत फहमी पैदा करने की कोशिश की है। लेकिन वे स्वयं मदेरणा का पूरा सम्मान करते है। गहलोत ने कहा कि खराब स्वास्थ्य के कारण मदेरणा सम्मान जनक ढंग से सक्रिय राजनीति से अलग हुए है।




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कांग्रेस की मीडिया कमेटी गठित

जयपुर, 

 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस ने राज्यस्तरीय मीडिया कमेटी बनाई है। पूर्व मंत्री प्रधुम्न सिंह को कमेटी का अध्यक्ष एवं प्रवक्ता सत्येंद्र राघव को संयोजक बनाया गया है। कमेटी में डा. रघु शर्मा, प्रताप सिंह खाचरियावास, अश्क अली टांक, माहिर आजाद फूल चंद बिलोनिया, सुनीता भावर, विजय गर्ग को सदस्य बनाया गया है।




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सोनिया का ड्रीम प्रोजेक्ट खटाई में

12 Oct 2008


लखनऊ, 12 अक्टूबर। भूमि पूजन से ठीक दो दिन पहले अचानक आज राज्य सरकार द्वारा रेलवे को दी गयी 189.25 हेक्टेयर भूमि ग्राम समाज को वापस कर दिये जाने से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में स्थापित होने वाली 2200 करोड़ की महत्वाकांक्षी रेल कोच फैक्ट्री परियोजना अधर में लटक गयी। इस फैसले से पूरे रायबरेली में आक्रोश फैल गया और लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदेश कांग्रेस ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्णपूर्ण बताया और कहा कि मुख्यमंत्री मायावती का यह निर्णय विकास विरोधी और बेरोजगारों के साथ अन्याय है। कांग्रेस ने इस के खिलाफ आन्दोलन का एलान किया है।मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव विजय शंकर पाण्डेय ने आज सायं संवाददाताओं को शासन के इस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीणों के तीव्र विरोध के चलते राज्य सरकार ने 19 मई 2008 के अधिग्रहण आदेश की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करते हुए भूमि पुन: ग्राम सभा को वापस कर दी है। इसके साथ ही जिलाधिकारी रायबरेली को परियोजना के लिए अन्यत्र भूमि तलाशने का निर्देश दिया गया है।प्रमुख सचिव ने बताया कि रायबरेली के जिलाधिकारी ने 10 अक्टूबर को शासन को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि रेल कोच फैक्ट्री को स्थानान्तरित की गयी भूमि को लेकर प्रभावित गांवों तथा आसपास के निवासियों में आक्रोश है। रिपोर्ट में कहा गया कि ग्राम सभा की यह भूमि 30 वर्षो तक केन्द्र सरकार के कृषि फार्म के पास थी लेकिन इस पर कोई लाभकारी काम नहीं किया गया। वर्षों से खाली पड़ी जमीन देख कर गांव के लोगों को यह उम्मीद होने लगी थी कि ग्राम सभा की यह खाली पड़ी भूमि उन्हें पट्टे पर मिल मिल जाएगी लेकिन रेल कोच फैक्ट्री के लिए भूमि दिये जाने से इनकी भावनाओं को झटका लगा। जिलाधिकारी ने कहा कि इससे गरीबों में यह संदेश भी जा रहा था कि राज्य सरकार जमीन उनको न देकर उघोगों को दे रही है जो भूमिहीन मजदूरों के हितों के विरूद्ध है। जिलाधिकारी ने लिखा है कि गांववासियों में इस बात से भी आक्रोश है कि रेल कोच फैक्ट्री के लिए 700 एकड़ भूमि और ली जाएगी जिससे और गांवों के लोग भी भूमिहीन हो जाएंगे और उनके बच्चों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ेगा। इन परिस्थितियों के चलते स्थानीय जनता में आक्रोश है जो कि शान्ति-व्यवस्था की दृष्टि से घातक साबित हो सकती है। जिलाधिकारी ने आशंका जतायी कि गांव वालों के आक्रोश के चलते आत्मदाह व खूनखराबे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में जिलाधिकारी ने शासन से अधिग्रहीत भूमि को निरस्त कर गांव सभा में निहित करने का अनुरोध किया। प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य सरकार ने राजस्व विभाग से इन सभी परिस्थितियों का सम्यक विचार कर अधिग्रहण को निरस्त कर ग्राम सभा को भूमि वापस करने तथा जमा धनराशि संबंधित संस्था को तत्काल वापस करने के निर्देश दिये हैं।इस बीच प्रदेश कांग्रेस ने फैसले को दुर्भाग्यपूर्णपूर्ण बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मायावती का यह निर्णय विकास विरोधी और बेरोजगारों के साथ अन्याय है। कांग्रेस ने कहा हैै कि राजनैतिक विद्वेष के कारण मुख्यमंत्री मायावती ने जमीन वापस लेने का निर्णय किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. रीता बहुगुणा जोशी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार विकास विरोधी है और हजारों बेरोजगारों को रोजगार से वंचित कर रही है। उन्होेंने कहा कि कांग्रेस इसके खिलाफ आन्दोलन करेगी।कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उत्तर प्रदेश को एक तोहफा दे रही थीं जिसमें दस हजार से अधिक बेरोजगारों को रोजगार मिलता। डा. जोशी ने प्रदेश मुख्यालय पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार सरासर झूठ बोल रही है कोई भी किसान नाराज नहीं है और न ही किसी प्रकार के आन्दोलन की चेतावनी दी गयी है। पार्टी प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह का कहना है कि ग्राम सभा की 189 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गयी थी इसके लिए जुलाई में 8.20 करोड़ मुआवजा भी रेलवे द्वारा दिया जा चुका है और ग्राम सभा की जमीन होने के कारण किसानों के मुआवजा को लेकर आक्रोशित होने का सवाल ही नहीं उठता? उन्होंने कहा कि एक 2 फरवरी 2007 को रेल कोच फैक्ट्री का शिलान्यास किया गया और इसके बाद जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई हुई। श्री सिंह ने बताया कि जिन ग्राम सभाओं दौहार, सुहावल और बन्नामऊ में यह फैक्ट्री लग रही थी उन सभी ग्राम सभाओं ने फैक्ट्री लगाने के लिए जमीन देने का प्रस्ताव दिया था जिसे एसडीएम और डीएम तथा कमिश्नर की अनुमति के बाद रेलवे को हस्तान्तरित किया गया। डा. सिंह का कहना है कि इस दौरान किसी भी प्रकार की शिकायत स्थानीय किसानों एवं जनता द्वारा नहीं की गयी और जब भूमि पूजन की तिथि 14 अक्टूबर को प्रस्तावित हुई तब राज्य सरकार ने हड़बड़ाहट में अधिकारियों पर दबाव बनाकर जमीन वापस लेने का निर्णय किया है।
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पीएम ने दिखाई घाटी में पहली ट्रेन को हरी झंडी

11 Oct 2008

Dingal Times!
श्रीनगर। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज यहां सुरक्षा के कडे बंदोबस्त के बीच कश्मीर घाटी में श्रीनगर से बडगाम के बीच चलने वाली पहली ट्रेन को श्रीनगर के नौगांव स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, रेल मंत्री लालू प्रसाद, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोज, राज्यपाल एन एन वोहरा, पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद और पुलिस एवं प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। जैसे ही रेल ने रफ्तार पकडनी शुरू की उत्साहित लोगों ने "मनमोहन सिंह जिंदाबाद", "लालू प्रसाद यादव जिंदाबाद" के नारे लगाने शुरू कर दिए। स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था एकदम चाक चौबंद थी और केवल उन्हीं लोगों को स्टेशन में प्रवेश की अनुमति दी गई जिनके पास इस अवसर पर जारी विशेष पास मौजूद था।
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दो दर्जन नेताओं का राजनीतिक भविष्य संकट में

8 Oct 2008

Oct 07, 11:12 pm
जयपुर, जागरण संवाद केंद्र : राज्य विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस आलाकमान द्वारा तय की गई गाइडलाईन के कारण दो दर्जन नेताओं का राजनीतिक अस्तित्व संकट में आ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी और चुनाव छानबीन समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह जांच गाइडलाईन से हटने को तैयार नहीं है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गाइड लाईन में कुछ ढि़लाई चाहते है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा रक्षा मंत्री एके एंटोनी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गाइडलाइन तैयार करने के निर्देश दिए थे। एंटनी कमेटी ने लगातार दो बार चुनाव हार चुके नेताओं को इस बार टिकट नहीं देने के साथ ही 70 साल से अधिक उम्र के नेताओं की टिकट काटने की सिफारिश भी की है। इसके साथ पिछले विधानसभा चुनाव में 15 हजार से अधिक मतों से हारने वालों को भी टिकट नहीं देने की बात कही गई है। कमेटी की सिफारिश से जिन नेताओं का राजनीतिक भविष्य संकट में आ गया उनमें पूर्व उपमुख्यमंत्री कमला, बनवारी लाल बैरवा, दिग्गज नेता रामनारायण, चौधरी, पूर्व प्रदेश कांग्रेस नारायण सिंह, पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर, केसी विश्नोई, परसादी लाल मीणा, दिपेंद्र सिंह शेखावत, हीरा लाल इंदौर,जनार्दन सिंह गहलोत अब्दुल हादी, विजय लक्ष्मी विश्नोई प्रमुख हैं। अगर कांग्रेस यह गाइड लाइन लागू करती है तो हनुमानगढ़ और गंगानगर जिलों में कांग्रेस को नब्बे फीसदी नए लोगों को चुनाव लड़ाना पड़ेगा। इससे कांग्रेस को फायदा होगा या नुकसान यह तो भविष्य बताएगा, लेकिन अगर आलाकमान गाइडलाइन पर अड़ा रहता है तो कई बड़े नेताओं को मुश्किल होती है। गाइडलाइन को लेकर कांग्रेस में दो मत हैं। एक तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा.सीपी जोशी और छानबीन समिति के दिग्विजय सिंह हैं। वही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कुछ नेता भी हैं। जोशी और सिंह जहां गाइड लाइन में बिल्कुल ढिलाई देने के पक्ष में नहीं है। वहीं गहलोत चाहते है कि गाइडलाइन में कुछ संशोधन करते हुए ऐसे नेताओं के टिकट दिया जाना चाहिए जो अगला चुनाव जीत सकते है। असंतुष्ट माने जाने वाले जाट नेता भी गाइड लाइन में संशोधन चाहते है। पिछले माह दिल्ली में चार दिन तक हुई छानबीन समिति की बैठक में गाइड लाइन में आने वाले नेताओं को टिकट नहीं देने पर चर्चा हुई। ऐसे नेताओं के नाम पैनल में भी शामिल किए गए। अब इस बारे में अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ही करेगी। कांग्रेसी नेताओं को चिंता इस बात को लेकर भी है कि
गाइडलाइन से प्रभावित होने वाले नेता बागी होकर चुनाव लड़ते तो है उससे कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है।

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