
राहुल गांधी का कहना है कि समझौते पर पीछे नहीं हटेंगे
ख़बरें हैं कि विश्वास मत पर कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी भी चर्चा में हिस्सा लेंगे.
कांग्रेस की ओर से पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, पवन कुमार बंसल, आनंद शर्मा और यूपीए की ओर से आरजेडी नेता लालू यादव, लोक जनशाक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान के चर्चा में हिस्सा लेने की उम्मीद है.
सीपीआई की ओर से गुरुदास दासगुप्ता, सीपीएम की ओर से मोहम्मद सलीम और रूपचंद पाल अमरीका के साथ परमाणु समझौते को लेकर सरकार पर निशाना साधेंगे.
भाजपा की ओर से लालकृष्ण आडवाणी पार्टी की कमान संभालेंगे.
इसके पहले राहुल गांधी ने अमेठी में मीडिया से बातचीत में कहा था कि 'सरकार को ख़तरा है लेकिन प्रधानमंत्री नेतृत्व दिखा रहे हैं और देशहित के लिए सरकार गिरती है तो गिर जाए.'
उनका कहना था कि प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और अनेक अन्य दलों में युवाओं से उनकी बात हुई है और वे सब भारत-अमरीका परमाणु समझौते के पक्ष में हैं.
राहुल की खरी खरी
एक सवाल के जवाब में उनका कहना था, "सरकार को रिस्क (यानी ख़तरा) है. प्रधानमंत्री नेतृत्व दे रहे हैं. प्रधानमंत्री ने कहा है कि ये समझौता देश के हित में है और मुझे उन पर पूरा विश्वास है....मैं उनका सौ प्रतिशत समर्थन करुँगा."
यदि परमाणु समझौता लोगों के हित में है तो में तो यही कहता हूँ कि प्रधानमंत्री ये ख़तरा दोबारा उठाएँ. यदि सरकार भी गिरती है तो गिर जाए
राहुल गांधी
जब उन्हें सरकार के गिरने के ख़तरे के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "हाँ, ख़तरा है. लेकिन यदि ये लोगों के हित में है तो में तो यही कहता हूँ कि प्रधानमंत्री ये ख़तरा दोबारा उठाएँ. यदि सरकार भी गिरती है तो गिर जाए..."
राहुल गांधी का कहना था कि जब प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने तय किया है कि ये (परमाणु समझौता) भारत के भविष्य के लिए सही फ़ैसला है तो फिर और कोई निर्णय करने की ज़रूरत नहीं रह जाती है.
उनका कहना था कि कौन कह सकता है कि परमाणु ऊर्जा अगले कुछ साल में केवल तीन प्रतिशत उपलब्ध होगी, क्या पता है कि भारत का कोई प्रतिभाशाली वैज्ञानिक इससे कही अधिक ऊर्जा भारत के लिए उपलब्ध करा दे.



1 टिप्पणियाँ:
भारत के नेता का स्तर इतना गिर जाएगा आम आदमी की कल्पना शक्ति से परे है.अवसरवादी और स्वार्थी राजनीति देश पर बिल्कुल हावी हो गई है. राजनीतिक दल परमाणु मुद्दे को ध्यान में रख कर निर्णय नहीं ले रहे हैं, सब अपना-अपना हित देख रहे हैं. भारत के लिए यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.
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