
यूपीए सरकार के विश्वास प्रस्ताव पर बहस चल रही है
लोकसभा में यूपीए सरकार के विश्वास प्रस्ताव पर बहस चल रही है जहां मतदान भी होना है लेकिन इस राजनीतिक जोड़ तोड़ के लगभग सभी बड़े खिलाड़ी विश्वास प्रस्ताव पर वोट नहीं डालेंगे.
अगर पिछले पंद्रह बीस दिनों की राजनीतिक हलचल पर नज़र डालें तो महत्वपूर्ण धुरियों के रुप में उभरे नेता या तो राज्यसभा के हैं या फिर विधायक हैं.
भारत अमरीका परमाणु समझौते पर वाम दलों ने समर्थन वापस लिया जिसे कई लोगों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत की लड़ाई भी क़रार दे दिया था.
ये दोनों नेताओं की नाक की लड़ाई भले न हो लेकिन ये दोनों महत्वपूर्ण नेता हैं और ये दोनों ही विश्वास प्रस्ताव पर वोट नहीं डालेंगे क्योंकि ये दोनों राज्यसभा के सदस्य हैं और विश्वास प्रस्ताव पर मतदान सिर्फ लोकसभा में होगा.
इतना ही नहीं पूरे जोड़ तोड़ में सबसे महत्वपूर्ण नेता के तौर पर उभरी मायावती भी वोट नहीं डालेंगी क्योंकि वो यूपी से विधायक हैं.
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य भूमिका निभाने वाले समाजवादी पार्टी के दोनों महत्वपूर्ण नेता यानी मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह भी वोट नहीं डालेंगे क्योंकि अमर सिंह राज्यसभा सांसद हैं और मुलायम सिंह विधायक.
बड़े नेताओं में सिर्फ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ही ऐसे हैं जो लोकसभा सांसद हैं विश्वास प्रस्ताव के दौरान वोट डालेंगे.



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