Thursday, 2 October 2008

राहुल ने मिट्टी ढोई, फावडा भी चलाया


बारां।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी के आगमन से आदिवासी सहरिया बाहुल्य गांवों के लोग अभिभूत हो गए। लोगों को सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि राजनीति की बडी शख्सियत उनके गांव व घर की दहलीज पर है। राहुल ने भी अभावग्रस्त जीवन जी रहे लोगों से आत्मीयता जोडने में कोई कसर नहीं छोडी। उन्होंने बुजुर्गो की पीडा को धीरज से सुन दिलासा दिलाई। छोटे बच्चों पर जमकर प्यार उंडेला।

राहुल के गुरूवार को किशनगंज तहसील पींजना गांव में पहुंचने पर आदिवासी हैरत में पड गए। उन्हें जब यह बताया गया कि वे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी व कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के पुत्र है तो चौंक गए। इस गांव में आधे घंटे से भी अधिक समय तक रूके राहुल वृद्ध विधवा रामबाई खैरवा के जीर्ण-शीर्ण कच्चे घर में गए। उन्होंने वृद्धा के परिवार के बारे में जानकारी लेकर मदद का भरोसा दिलाया तो उसकी आंखों में खुशी के आंसू छलछला उठे।

राहुल ने वृद्धा के चार वर्षीय पौत्र से हाथ मिलाया। उससे खेल खेलने के बारे में पूछा। उसके स्वीकृति में सिर हिलाने पर वे उसे अलग ले गए, लेकिन भीड को देख बालक विचलित हो गया। बाद में राहुल गांव के सरकारी स्कूल परिसर में पहुंचे। वहां उन्होंने महिलाओं से राजनीति में सक्रिय होने के बारे में सवाल पूछे। एक महिला ने उन्हें नोट से वोट खरीदे जाने की जानकारी दी वे चौंक उठे। राहुल जब इस गांव में घूम रहे थे तो सैकडों ग्रामीणों की भीड उनके साथ थी। इनमें बडी संख्या में महिलाएं भी थी।

खूब बहाया पसीना
सुबह लगभग साढे नौ बजे पींजना गांव पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने गांधी जयन्ती के अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना के तहत तलाई की खुदाई कार्य में एक घंटे से भी अधिक समय तक श्रमदान किया। लगातार मिट्टी से भरी तगारियां पाल डालते समय वे पसीने में तरबतर रहे। उनके साथ युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक तंवर, विधायक भंवर जितेन्द्र सिंह व युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष निर्मल माथोडिया आदि नेताओं ने भी श्रमदान किया।

पूरी मदद करूंगा
उपसरपंच पूरणमल खैरवा समेत गांव के लोगों ने एक स्वर में उन्हें अन्य पिछडा वर्ग से निकालकर अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने की मांग की। राहुल ने कहा कि राज्य सरकार यदि केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भिजवाएगी तो वे पूरी मदद करेंगे। गांव में बडी संख्या में खैरवा जाति के लोग निवास करते है। ग्रामीणों ने उनसे भंवरगढ स्थित सेन्ट्रल बैंक की शाखा में ऋण स्वीकृति नहीं किए जाने की शिकायत की। जिसे उन्होंने गंभीरता से लिया।

काली चाय के साथ सिवाइयां
राहुल ने गांव के एक युवक के आग्रह को स्वीकार कर बिना दूध की काली चाय पिलाने को कहा। बाद में वह युवक चाय लेकर स्कूल परिसर पहुंचा। राहुल ने ग्रामीण महिलाओं के साथ इस चाय की चुस्कियां ली। एक मुस्लिम परिवार ने राहुल को ईद की मुबारकबाद देते हुए उन्हें मीठी सिवाइयां खिलाई।

नेताओं से दूरी
राहुल ने इस दौरे को निजी बताते हुए जिले के कांग्रेस नेताओं से दूरी बनाए रखी। पूरे दौरे में उन्होंने पींजना गांव में श्रमदान के लिए युवक कांग्रेस के करीब डेढ दर्जन पदाधिकारियों को बुलाया। राहुल के साथ चल रहे एसपीजी के अधिकारियों ने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को उनके नजदीक तक नहीं जाने दिया। इससे कई कांग्रेस नेता कुपित रहे।

जाते ही सताने लगी मीठी याद
बारां। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के पुत्र व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी को अपने बीच पाकर अमरोली गांव के लोग निहाल हो गए। अब कोई राहुल द्वारा मिलाए गए हाथ को सहला रहा तो कोई उस कंधे को देख हर्षित है जिस पर राहुल ने प्यार से हाथ धरा था। ग्रामीणों के लिए अब तो वह बर्तन भी अमूल्य हो गए है जिनमे राहुल ने उनके साथ बैठकर खाना खाया था। हर कोई उस खाट पर बैठना चाहता है जिस पर राहुल ने रात बिताई थी। गांव सहरिया बंगला की चौपाल गुरूवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के जाने के बाद भी पूरे दिन जमी।

बुधवार रात ग्यारह बजे अचानक सघन जंगल के बीच स्थित अमरोली गांव पहुंचे राहुल ने बीरबल सहरिया की झौंपडी के बाहर सहरियाओं के बीच बैठकर आत्मीयता के साथ उनके हाल-चाल जाने। गांव के लोगों ने उन्हें हैंडपम्पों से लाल पानी निकलने, स्कूल में एक ही अध्यापक होने जैसी समस्याएं बताई। सौ- सवा सौ घरों की आबादी वाले इस गांव में राहुल सहज रूप से पैदल भी घूमे। वे बीरबल, गेंदीलाल व बाबूलाल सहरिया की टापरियों के भीतर भी गए व सहरियाओं के रहन-सहन को बारीकी से देखा। गेंदीलाल सहरिया के घर में उन्होंने पीपी देखकर पूछा इसमें क्या है तो सहरिया ने कहा कि इसमें मिट्टी का तेल है।

तब उन्होंने पूछा इसका क्या करते हो तो उसने कहा कि इससे उजाला करते हैं। मध्यरात्रि को उन्होंने सहरियाओं के साथ बैठकर चावल की रोटी व आलू की सब्जी खाई व पास ही रखी मटकी से पानी भी पीया। खाना खाने के कुछ देर बाद ही राहुल यहां बीरबल की झौंपडी के बाहर बिना बिस्तर की खाट पर लेट गए। वे करीब साढे चार घंटे सोए।

"राजीवजी का लडका हूं"
रात करीब ग्यारह बजे अमरोली पहुंचे राहुल ने लोगों से राम-राम करते हुए जब यह कहते हुए अपना परिचय दिया कि वह राजीवजी के लडके हैं तो मौजूद सहरियाओं की खुशी परवान चढ गई। गांव के नंदू ने बताया कि उन्होंने सोचा था कि कोई बडा अधिकारी मीटिंग लेने आया है।

नीम की डाली से मांजे दांत
सुबह करीब छह बजे जागने के बाद राहुल ने पास ही नीम के एक पेड की डाल से दातून किया। इसके बाद यहां से रवाना होते समय भी उन्होंने लोगों से हाथ जोडकर राम-राम किया।

वे सोए, यह जागे
राहुल के अपने बीच होने की खुशी में इस गांव के कई लोग राहुल के सोने के बाद भी उनके कुछ दूर ही बैठकर जागते रहे। गांव के भोगीलाल सहरिया ने बताया कि कुछ लोगों को तो रात को भी राहुल के आने का पता नहीं था। सुबह जब पता चला तो ऎसे कई लोग वहां पहुंच गए। करीब सवा छह बजे राहुल गांव के लोगों से फिर राम-राम कर भंवरगढ के लिए रवाना हो गए।

नाम सुना था, अब देख लिया
राहुल गांधी को देर तक निहार व उनसे बात कर गांव के लोग खुद को धन्य मान रहे हैं। घींसी बाई सहरिया, भोगीलाल, व नंदू जाटव आदि ने कहा कि राजा का बेटा गरीब की झौंपडी में आए, उनके साथ बैठे, खाना खाया, इससे बडी बात क्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह तो अब तक राहुल गांधीजी का नाम ही सुनते आए हैं कि वह राजीवजी के बेटे हैं लेकिन अब देख भी लिया।

नरेगा के बारे में की पूछताछ
राहुल ने यहां सहरियाओं से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना के बारे में जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सात दिन पूर्व ही योजना की पहली मस्टररोल जारी हुई है। फिलहाल 19 लोगों को रोजगार मिल रहा है। यहां संकल्प संस्था के मोतीलाल ने राहुल की कई जिज्ञासाओं को शान्त किया।

[घनश्याम दाधीच]

होटल में कचौरी खाई, चाय पी
अन्ता। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने गुरूवार को फिर से यहां आम जनता के बीच पहुंचकर सबको चौंका दिया। बारां से कोटा जाते समय दोपहर दो बजे राहुल अन्ता की मुख्य सडक पर अपनी गाडी रूकवाकर एक चाय की दुकान में चले गए एवं वहां लगे हैंडपम्प पर साबुन से हाथ-मुंह धोया। बाद में उन्होंने दुकानदार राधेश्याम चौरसिया से चाय पिलाने को कहा।

हक्के-बक्के दुकानदार ने चाय में कॉफी मिला दी तो राहुल ने उसे लौटाकर फिर से केवल चाय बनाने की पेशकश की। इस दौरान राहुल एवं उनके साथ चल रहे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सचिव भंवर जितेन्द्र सिंह सहित एक अन्य ने दुकान में रखे फ्रीज से स्वयं ही ठंडे पेय की बोतलें निकालकर पी तथा पास की दुकान से कचोरी एवं बिस्कुट मंगवाए।

राहुल के रूकने की खबर से यहां जनता का हुजूम एकत्रित हो गया किन्तु उनके सुरक्षा कमांडों ने किसी को भी होटल के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। बाद में राहुल गांधी होटल मालिक को एक सौ का नोट थमाकर बाहर आए तथा पैदल चलकर वहां खडे कांग्रेस कार्यकर्ताओं सहित आम जनता से मिले। इस बीच उन्होंने कुछ युवकों के कंधे पर हाथ रखकर उनका हालचाल पूछा एवं कई से हाथ मिलाया। राहुल ने कांग्रस नेता दीनदयाल शर्मा के प्रतिष्ठधान पर प्रतीक्षारत पार्टी कार्यकर्ताओं से भी गाडी रूकवाकर मालाएं पहनी।

[विजय बत्रा] 

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