Wednesday, 8 October 2008

दो दर्जन नेताओं का राजनीतिक भविष्य संकट में

Oct 07, 11:12 pm
जयपुर, जागरण संवाद केंद्र : राज्य विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस आलाकमान द्वारा तय की गई गाइडलाईन के कारण दो दर्जन नेताओं का राजनीतिक अस्तित्व संकट में आ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी और चुनाव छानबीन समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह जांच गाइडलाईन से हटने को तैयार नहीं है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गाइड लाईन में कुछ ढि़लाई चाहते है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा रक्षा मंत्री एके एंटोनी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गाइडलाइन तैयार करने के निर्देश दिए थे। एंटनी कमेटी ने लगातार दो बार चुनाव हार चुके नेताओं को इस बार टिकट नहीं देने के साथ ही 70 साल से अधिक उम्र के नेताओं की टिकट काटने की सिफारिश भी की है। इसके साथ पिछले विधानसभा चुनाव में 15 हजार से अधिक मतों से हारने वालों को भी टिकट नहीं देने की बात कही गई है। कमेटी की सिफारिश से जिन नेताओं का राजनीतिक भविष्य संकट में आ गया उनमें पूर्व उपमुख्यमंत्री कमला, बनवारी लाल बैरवा, दिग्गज नेता रामनारायण, चौधरी, पूर्व प्रदेश कांग्रेस नारायण सिंह, पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर, केसी विश्नोई, परसादी लाल मीणा, दिपेंद्र सिंह शेखावत, हीरा लाल इंदौर,जनार्दन सिंह गहलोत अब्दुल हादी, विजय लक्ष्मी विश्नोई प्रमुख हैं। अगर कांग्रेस यह गाइड लाइन लागू करती है तो हनुमानगढ़ और गंगानगर जिलों में कांग्रेस को नब्बे फीसदी नए लोगों को चुनाव लड़ाना पड़ेगा। इससे कांग्रेस को फायदा होगा या नुकसान यह तो भविष्य बताएगा, लेकिन अगर आलाकमान गाइडलाइन पर अड़ा रहता है तो कई बड़े नेताओं को मुश्किल होती है। गाइडलाइन को लेकर कांग्रेस में दो मत हैं। एक तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा.सीपी जोशी और छानबीन समिति के दिग्विजय सिंह हैं। वही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कुछ नेता भी हैं। जोशी और सिंह जहां गाइड लाइन में बिल्कुल ढिलाई देने के पक्ष में नहीं है। वहीं गहलोत चाहते है कि गाइडलाइन में कुछ संशोधन करते हुए ऐसे नेताओं के टिकट दिया जाना चाहिए जो अगला चुनाव जीत सकते है। असंतुष्ट माने जाने वाले जाट नेता भी गाइड लाइन में संशोधन चाहते है। पिछले माह दिल्ली में चार दिन तक हुई छानबीन समिति की बैठक में गाइड लाइन में आने वाले नेताओं को टिकट नहीं देने पर चर्चा हुई। ऐसे नेताओं के नाम पैनल में भी शामिल किए गए। अब इस बारे में अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ही करेगी। कांग्रेसी नेताओं को चिंता इस बात को लेकर भी है कि
गाइडलाइन से प्रभावित होने वाले नेता बागी होकर चुनाव लड़ते तो है उससे कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है।

1 टिप्पणियाँ:

परमजीत बाली said...

बढिया जानकारी है आभार।