
लखनऊ, 12 अक्टूबर। भूमि पूजन से ठीक दो दिन पहले अचानक आज राज्य सरकार द्वारा रेलवे को दी गयी 189.25 हेक्टेयर भूमि ग्राम समाज को वापस कर दिये जाने से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में स्थापित होने वाली 2200 करोड़ की महत्वाकांक्षी रेल कोच फैक्ट्री परियोजना अधर में लटक गयी। इस फैसले से पूरे रायबरेली में आक्रोश फैल गया और लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदेश कांग्रेस ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्णपूर्ण बताया और कहा कि मुख्यमंत्री मायावती का यह निर्णय विकास विरोधी और बेरोजगारों के साथ अन्याय है। कांग्रेस ने इस के खिलाफ आन्दोलन का एलान किया है।मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव विजय शंकर पाण्डेय ने आज सायं संवाददाताओं को शासन के इस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीणों के तीव्र विरोध के चलते राज्य सरकार ने 19 मई 2008 के अधिग्रहण आदेश की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करते हुए भूमि पुन: ग्राम सभा को वापस कर दी है। इसके साथ ही जिलाधिकारी रायबरेली को परियोजना के लिए अन्यत्र भूमि तलाशने का निर्देश दिया गया है।प्रमुख सचिव ने बताया कि रायबरेली के जिलाधिकारी ने 10 अक्टूबर को शासन को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि रेल कोच फैक्ट्री को स्थानान्तरित की गयी भूमि को लेकर प्रभावित गांवों तथा आसपास के निवासियों में आक्रोश है। रिपोर्ट में कहा गया कि ग्राम सभा की यह भूमि 30 वर्षो तक केन्द्र सरकार के कृषि फार्म के पास थी लेकिन इस पर कोई लाभकारी काम नहीं किया गया। वर्षों से खाली पड़ी जमीन देख कर गांव के लोगों को यह उम्मीद होने लगी थी कि ग्राम सभा की यह खाली पड़ी भूमि उन्हें पट्टे पर मिल मिल जाएगी लेकिन रेल कोच फैक्ट्री के लिए भूमि दिये जाने से इनकी भावनाओं को झटका लगा। जिलाधिकारी ने कहा कि इससे गरीबों में यह संदेश भी जा रहा था कि राज्य सरकार जमीन उनको न देकर उघोगों को दे रही है जो भूमिहीन मजदूरों के हितों के विरूद्ध है। जिलाधिकारी ने लिखा है कि गांववासियों में इस बात से भी आक्रोश है कि रेल कोच फैक्ट्री के लिए 700 एकड़ भूमि और ली जाएगी जिससे और गांवों के लोग भी भूमिहीन हो जाएंगे और उनके बच्चों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ेगा। इन परिस्थितियों के चलते स्थानीय जनता में आक्रोश है जो कि शान्ति-व्यवस्था की दृष्टि से घातक साबित हो सकती है। जिलाधिकारी ने आशंका जतायी कि गांव वालों के आक्रोश के चलते आत्मदाह व खूनखराबे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में जिलाधिकारी ने शासन से अधिग्रहीत भूमि को निरस्त कर गांव सभा में निहित करने का अनुरोध किया। प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य सरकार ने राजस्व विभाग से इन सभी परिस्थितियों का सम्यक विचार कर अधिग्रहण को निरस्त कर ग्राम सभा को भूमि वापस करने तथा जमा धनराशि संबंधित संस्था को तत्काल वापस करने के निर्देश दिये हैं।इस बीच प्रदेश कांग्रेस ने फैसले को दुर्भाग्यपूर्णपूर्ण बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मायावती का यह निर्णय विकास विरोधी और बेरोजगारों के साथ अन्याय है। कांग्रेस ने कहा हैै कि राजनैतिक विद्वेष के कारण मुख्यमंत्री मायावती ने जमीन वापस लेने का निर्णय किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. रीता बहुगुणा जोशी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार विकास विरोधी है और हजारों बेरोजगारों को रोजगार से वंचित कर रही है। उन्होेंने कहा कि कांग्रेस इसके खिलाफ आन्दोलन करेगी।कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उत्तर प्रदेश को एक तोहफा दे रही थीं जिसमें दस हजार से अधिक बेरोजगारों को रोजगार मिलता। डा. जोशी ने प्रदेश मुख्यालय पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार सरासर झूठ बोल रही है कोई भी किसान नाराज नहीं है और न ही किसी प्रकार के आन्दोलन की चेतावनी दी गयी है। पार्टी प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह का कहना है कि ग्राम सभा की 189 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गयी थी इसके लिए जुलाई में 8.20 करोड़ मुआवजा भी रेलवे द्वारा दिया जा चुका है और ग्राम सभा की जमीन होने के कारण किसानों के मुआवजा को लेकर आक्रोशित होने का सवाल ही नहीं उठता? उन्होंने कहा कि एक 2 फरवरी 2007 को रेल कोच फैक्ट्री का शिलान्यास किया गया और इसके बाद जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई हुई। श्री सिंह ने बताया कि जिन ग्राम सभाओं दौहार, सुहावल और बन्नामऊ में यह फैक्ट्री लग रही थी उन सभी ग्राम सभाओं ने फैक्ट्री लगाने के लिए जमीन देने का प्रस्ताव दिया था जिसे एसडीएम और डीएम तथा कमिश्नर की अनुमति के बाद रेलवे को हस्तान्तरित किया गया। डा. सिंह का कहना है कि इस दौरान किसी भी प्रकार की शिकायत स्थानीय किसानों एवं जनता द्वारा नहीं की गयी और जब भूमि पूजन की तिथि 14 अक्टूबर को प्रस्तावित हुई तब राज्य सरकार ने हड़बड़ाहट में अधिकारियों पर दबाव बनाकर जमीन वापस लेने का निर्णय किया है।



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