Nov 06, 12:59 pm
जयपुर। राजस्थान विधान सभा की दो सौ सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस के घोषित प्रत्याशियों में राष्ट्रपति, पूर्व उप राष्ट्रपति, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, पूर्व उप मुख्यमंत्री, बुजुर्ग नेताओं तथा पूर्व मंत्रियों के रिश्तेदारों का बोलबाला है।
राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों द्वारा जाने-माने लोगों के रिश्तेदारों को टिकट देना नई बात नहीं है।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार कांग्रेस द्वारा घोषित 146 उम्मीदवारों में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व उप राष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत, राज्यपाल पं.नवल किशोर शर्मा, उप राज्यपाल गोबिंद सिंह गुर्जर, केंद्रीय मंत्री शीश राम ओला, राजस्थान की पूर्व उप मुख्यमंत्री कमला, पूर्व सांसदों, पूर्व मंत्रियों तथा बुजुर्ग नेताओं या दिवगंत नेताओं के निकटतम रिश्तेदारों के उन्नीस नाम सूची में शामिल हैं।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार घोषित उम्मीदवारों में विजेंद्र सिंह [उदयपुरवाटी] राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के निकटतम रिश्तेदार हैं। घोषित उम्मीदवारों में मौजूदा विधायक बृज मोहन शर्मा [हवामहल], गुजरात के राज्यपाल पं.नवल किशोर शर्मा के पुत्र हैं। उप राज्यपाल गोबिंद सिंह गुर्जर के करीबी रिश्तेदार महेंद्र सिंह अजमेर जिले की नसीराबाद विधान सभा सीट से भाग्य आजमाएंगे। गोबिंद सिंह गुर्जर नसीराबाद सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं।
यह अलग तथ्य है कि पूर्व उप राष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत संवैधानिक पद संभालने से पूर्व तक भाजपा से जुड़े रहे, लेकिन कई साल पूर्व कांग्रेस से नाता जोड़ चुके उनके भतीजे प्रताप सिंह खाचरियावास इस चुनाव में कांग्रेस टिकट पर सिविल लाइंस [जयपुर] विधान सभा सीट से चुनाव मैदान में हैं।
केंद्रीय मंत्री शीश राम ओला के पुत्र बिजेंद्र सिंह ओला चौथी बार झुंझुनूं विधान सभा सीट से चुनाव मैदान में हैं। बिजेंद्र ओला तीन दफे विधान सभा चुनाव में पराजय का सामना कर चुके हैं। इसके बावजूद कांग्रेस ने ओला के पुत्र को ही जिताऊ उम्मीदवार मानकर चुनाव मैदान में उतारने का निर्णय किया।
राजस्थान की पूर्व उप मुख्यमंत्री कमला के पुत्र आलोक कुमार शाहपुरा [जयपुर] सीट से भाग्य अजमाएंगे। कांग्रेस का टिकट पाने में विफल रहे एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस के दोहरे मापदंड चुनाव में भारी पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी उच्च कमान ने उम्मीदवार चयन में जिताऊ मतदाताओं की पंसद को आधार माना तो फिर बिजेंद्र ओला को कौन से मापदंड पूरे करने पर टिकट दिया गया, यह सोच का विषय है।
कांग्रेस के घोषित प्रत्याशियों में पूर्व सांसद जमुना बांपाल की पुत्रवधू सुषमा बांपाल, पूर्व मंत्री लेकिन अब चुनाव दौड़ से बाहर हीरा लाल इंदौरा के पुत्र कुलदीप इन्दौरा, अनूपगढ़ सीट से पूर्व मंत्री चंदन मल, बैद के विधायक पुत्र डा.सीएस बैद, तारानगर से पूर्व मंत्री और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम नारायण चौधरी की पुत्री रीटा कुमारी मंडावा सीट से चुनाव मैदान में है।
पूर्व मंत्री स्व.तैयब हुसैन की पुत्री जाहिदा कांमा से पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल जगन्नाथ पहाडिया के पुत्र संजय पहाडिया, वैर से पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह भाटी के पुत्र सुरेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री खेत सिंह राठौड़ के पुत्र उम्मेद सिंह, पूर्व मंत्री नरपत सिंह बरबड़ की पत्नी हीरा देवी, पूर्व मंत्री राम सिंह विश्नोई के पुत्र मलखान सिंह, पूर्व मंत्री खेम राज कटारा की पत्नी सज्जन कटारा, पूर्व मंत्री भीखा भाई का पुत्र सुरेंद्र धामनिया चुनाव मैदान में किस्मत आजमाएंगे।
पूर्व मंत्री दुला राम के पुत्र दौलत राज नायक रायसिंह नगर से पूर्व गृहमंत्री गुलाब सिंह शक्तावत के पुत्र गजेंद्र सिंह शक्तावत वल्लभनगर से राजस्थान के आबकारी मंत्री देवी सिंह भाटी के रिश्तेदार सुनिता भाटी भी कांग्रेस टिकट पर चुनाव मैदान में है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहन प्रकाश ने रिश्तेदारों को टिकट देने को जायज बताते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों तथा केंद्रीय मंत्री या जनप्रतिनिधियों के परिजनों को टिकट पार्टी के लिए किए कार्यो को देखते हुए दिए गए हैं।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी का मानना है कि कांग्रेस में वंशवाद की परंपरा रही है। यदि किसी को पार्टी में सक्रिय होने की वजह से टिकट मिला है तो जायज है, लेकिन केवल रिश्तेदार के मापदंड के आधार पर टिकट दिया गया है तो यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वंशवाद पर ही सालों से चली आ रही है तो इससे मोह कैसे दूर हो सकता है।
कांग्रेस मुख्यालय में आए नागौर के एक कार्यकर्ता दशरथ सिंह ने राजनीतिक दलों में परिवारवाद को लेकर अपनी चिंता का जिक्र करते हुए कहा कि मेरा दुर्भाग्य है कि मेरे परिवार में कांग्रेस या अन्य पार्टी के टिकट पर चुनाव नहीं जीता वरना मुझे इतनी मशक्कत नहीं करनी पड़ती। सालों बाद काम करने के बावजूद मुझे विधायक के नाम पर विचार करना तो दूर पंचायत समिति के चुनाव में भी पार्टी ने टिकट देना उचित नहीं समझा क्योंकि मेरे नाम को आगे बढ़ाने के लिए मेरा रिश्तेदार बड़ा नेता नहीं है।
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