Monday, 10 November 2008

सिर्फ जीत ही लक्ष्य


चुनाव के लिए कांग्रेस की क्या तैयारी है
हमने प्रयास किए है कि जमीनी कार्यकर्ता को मोबलाइज किया जाए। चुनाव में अब माइक्रो मैनेजमेंट की बडी भूमिका है। हमने सद्भावना सम्मेलनों, राजनीतिक सम्मेलनों के जरिए कार्यकर्ताओं को गियरअप किया। अब एआईसीसी के 100 पर्यवेक्षक और प्रदेश के 200 कोर्डिनेटर सभी क्षेत्रों में चुनाव प्रबंधन देखेंगे।

प्रचार की क्या रणनीति रहेगी
सोनिया और राहुल के दौरें तो होंगे ही, अन्य बडे नेता भी सभाएं करेंगे। बूथ लेवल कार्यकर्ता भी भूमिका निभाएंगे।

वे कौनसे मुद्दे हैं, जिन पर भाजपा सरकार विफल रही और आप उसे उन मुद्दों पर कैसे घरेंगे
भाजपा अच्छी सरकार और सुशासन देने में विफल रही। जातिगत आंदोलनों के कारण सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचा। कानून व्यवस्था बिगडी रही और सरकार खुद के झगडों को निपटाने में लगी रही। ऎसे बहुत से मुद्दे हैं, जिन पर भाजपा को घेरेंगे।

चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस का सबसे मजबूत पक्ष कौन सा हैै
कांग्रेस का सबसे मजबूत पक्ष यह रहा कि हमने अपने संगठन को सही समय पर गियरअप किया। चुनाव सम्बन्धी सभी निर्णयों में प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय भागीदारी रही।

सक्रिय भागीदारी की बात कह रहे हैं, जबकि टिकट वितरण मेंं एकराय नहीं बन पाई
देखिए एकराय इस बात पर है कि हमें जीत कर आना है और सरकार बनानी है। छोटी-मोटी बातें होती रहती है जो कांग्रेस जैसी लोकतांत्रिक पार्टी के लिए सामान्य बात है।

एंटनी कमेटी की सिफारिशें बदले हालात में कितनी लागू हो पाई
देखिए एंटनी कमेटी ने सिर्फ चुनाव से पहले का एक कैलेण्डर तैयार किया था, जिसके तहत चुनाव से एक-दो माह पहले सूची जारी करने की बात मुख्य थी। पार्टी की प्राथमिकता कुछ और रही, इसलिए देरी हो गई।

प्रत्याशी चयन में जातिगत व धार्मिक समीकरण कितने प्रभावी रहे
कांग्रेस का पूरा प्रयास रहा कि अच्छे उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरें। हमने जिला व पंचायतस्तर तक के नेताओं को मौका देने की कोशिश की है।

आपके हिसाब से मतदाताओं को उम्मीदवार चुनने में सबसे ज्यादा क्या चीज प्रभावित करती है
देखिए राजस्थान में मतदाता विचारधारा पर वोट देता है। जाति व धर्म दूसरे स्थान पर आते हैं।

बसपा कितना नुकसान पहुंचाएगी
देखिए बसपा अपना वोट प्रतिशत तो प्रदेश में बढा सकती है, लेकिन यह बहुत ज्यादा असर डालेगी, इसमें मुझे संदेह है।नुकसान की बडी सम्भावना नहीं दिखती है।

पिछले चुनाव में हार के क्या कारण रहे
यह सही है हमने भारी बहुमत हासिल किया, लेकिन समस्या यह रही कि जीत कर आने वाले विधायकों ने पांच साल के दौरान समर्पित कार्यकर्ताओं की वह फौज तैयार नहीं की जो दुबारा उन्हें जिता सके। इस कमी को दूर करने के लिए ही इस बार हमनें माइक्रो मैनेजमेंट का सहारा लिया है।

कांग्रेस किसी को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट क्यो नहीं करती
कांग्रेस संसदीय लोकतंत्र में विश्वास करने वाली पार्टी है। चुने हुए विधायक कांग्रेस आलाकमान को अपनी राय भेजते हैं। कांग्रेस की परम्परा हमेशा से यही रही है।

पर क्या जनता को यह पता नहीं होना चाहिए कि जिस पार्टी को वे वोट दे रहें हैं, उसका भावी नेता कौन होगा
हमारे यहां राष्ट्रपति प्रणाली नहीं है। ऎसा वहीं होता है।

क्या आप भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में हैं
सिर्फ एक लक्ष्य है कि पार्टी को जिता कर लाना है। यह लक्ष्य पार्टी ने मुझे दिया है। ऎसा कोई सवाल ही नहीं है।

विपक्ष के नाते कांग्रेस के प्रदर्शन पर क्या राय है
कांग्रेस ने सक्रिय विपक्ष की भूमिका निभाई और खासतौर पर विधानसभा के मंच का सही उपयोग किया।

हर पार्टी चहुमंखी विकास का सपना दिखाती है, आखिर जनता के सपने कब पूरे होंगे
हर पार्टी को अपनी प्राथमिकता तय कर के काम करना चाहिए। विकास की बहुत सी परियोजनाएं केन्द्र की नीतियों पर निर्भर करती है। हमारी सरकार के समय सिर्फ सात हजार करोड केन्द्र ने दिए, जबकि इस सरकार के समय तीस हजार करोड मिले। ऎसी बहुत सी बाते हैं

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