
Nov 17, 7:21 pm जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण को लेकर भाजपा में असंतोष फूट पड़ा है और सांसदों को विधानसभा टिकट देने से कार्यकर्ता खासे नाराज हैं।
भाजपा प्रदेश मुख्यालय में मौजूदा विधायक कन्हैया लाल मीणा का टिकट कटने का विरोध करने आए सैकड़ों कार्यकर्ताओं में शामिल सुरेश मीणा ने कहा कि भाजपा निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दगा देगी, ऐसा मैंने नहीं सोचा था। एक ओर जितने वाले उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया, दूसरी ओर सांसदों को टिकट दे दिया। कार्यकर्ता विधानसभा टिकट मिलने की आस में काम करता है, लेकिन जब रोटी [टिकट] दूसरे को मिलती है तो कौन काम करेगा इस पार्टी के लिए।
सत्ता में पुन: काबिज होने में लगी भाजपा को उस समय करारा झटका लगा जब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक सलाहकार भरतपुर से भाजपा सांसद विश्वेंद्र सिंह उद्योग मंत्री डा. दिगंबर सिंह को पुन: टिकट देने पर विरोध जताते हुए न केवल राजनीतिक सलाहकार पद से बल्कि पार्टी से भी नाता तोड़ कर कांगे्रस में शामिल हो गए।
भाजपा के एक दिग्गज वरिष्ठ नेता ने विश्वेंद्र सिंह के इस कदम पर प्रतिक्रिया में कहा कि जब विश्वेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाने की बात चल रही थी उसी समय मैंने मुख्यमंत्री से कह दिया था कि आप तकलीफ पाएंगी। मुख्यमंत्री ने मेरी बात पर उस समय गौर नहीं किया और आज तकलीफ में पड़ गई। यह तो होना ही था।
राजस्थान के राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र शर्मा का कहना है कि वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर चुनाव मैदान में उतरी भाजपा की राहें आसान नजर नहीं आ रही है। शुरुआत में भाजपा कुछ आराम की स्थिति में नजर आ रही थी, लेकिन मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ ही स्थिति बदल रही है।
भाजपा में बगावती तेवर दिखाने वालों में सांसद विश्वेंद्र सिंह के अलावा वसुंधरा राजे मंत्रिमंडल में आबकारी मंत्री देवी सिंह भाटी, पूर्व खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री डा. किरोड़ी सिंह मीणा, अजमेर के सांसद रासा सिंह रावत, राजस्थान के संसदीय सचिव गोबिंद राम मेघवाल, बीस सूत्रीय क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह देवड़ा प्रमुख हैं।
इसके अलावा टिकट कटने से करीब बारह भाजपा विधायक नाराज होकर अंतिम क्षण तक भाजपा का टिकट मिलने की आस लगाए बैठे हैं। भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर इन विधायकों ने भाजपा से नाता तोड़ कर निर्दलीय या बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरने के संकेत दिए हैं।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि टिकट वितरण को लेकर कुछ स्थानों से शिकायतें मिली है। इस विरोध को सामान्य बताते हुए उन्होंने कुछ समय बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई है।
भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सांसद रामदास अग्रवाल का कहना है कि नए लोगों को चुनने पर पुराने लोगों को वेदना होती है, यह स्वाभाविक भी है। पार्टी नए लोगों को चुनती है तो यह सब कुछ होता है, लेकिन कुछ समय बाद आपसी मनमुटाव भूलकर पार्टी को जिताने में जुट जाते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी सोच-समझकर ही निर्णय करती है इस बारे में इससे कुछ अधिक कहना निरर्थक है।
राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र कुमार का कहना है कि भाजपा को सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने का फैसला भारी पड़ सकता है। सांसदों को टिकट देने से विधानसभा का चुनाव लड़ने का सपना संजोए कार्यकर्ताओं का उत्साह खत्म हुआ है।
उन्होंने कहा कि सांसदों को चुनाव में उतारकर पार्टी ने निचले स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी की है। पार्टी रूठे कार्यकर्ताओं को मना पाती है या नहीं, यह पार्टी के ब्लाक स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं पर निर्भर करता है। इस कैडर के कार्यकर्ताओं की कमी से भाजपा ही नहीं, कांगे्रस भी जूझ रही है।
महेंद्र कुमार ने कहा कि टिकट नहीं मिलने वाला हताश और निराश विधायक और कार्यकर्ता जीत की संभावना को लेकर या पार्टी को हराने की मन में ठान कर अन्य राजनीतिक पार्टी के बाड़े में चला जाता है। मौजूदा समय ऐसे लोगों की शरणस्थली बसपा बनी हुई है।
भाजपा ने बांसवाड़ा के सांसद थान सिंह जाटव को बांसवाड़ा से चित्तौड़गढ़ के सांसद श्रीचंद कृपलानी को बड़ी सादड़ी से, उदयपुर की सांसद किरण माहेश्वरी को राजसमंद से तथा कोटा के सांसद रधुवीर सिंह कौशल को अंता विधान सभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है।



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