Sunday, 27 April 2008

'युवराज कहा जाना अपमानजनक'

Good News!
कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी ने उन्हें युवराज की संज्ञा देने वालों की ओलचना करते हुए कहा कि ये शब्द उन्हें अपमानजनक लगता है. छत्तीसगढ़ में पत्रकारों से बातचीत हुए राहलु गांधी ने कहा, "युवराज कहे जाना मुझे अपमानजनक लगता है. भारत एक लोकतांत्रिक देश है और आज की तारीख़ में इस शब्द का कोई मतलब नहीं है." कुछ दिन पहले कांग्रेस पार्टी के सदस्य एएम सुदर्शन ने राहुल गांधी को लोगों का युवराज की संज्ञा दी थी. उस बयान को लेकर 21 अप्रैल को राज्य सभा में भी हंगामा हुआ था. भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान को लोकतंत्र पर धब्बा कहा था.
राहुल गांधी ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि कुछ लोग उन्हें देश के भावी प्रधानमंत्री के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वे वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का समर्थन करते हैं और वे पूरी तरह से प्रधानमंत्री पद के लिए सक्षम हैं. कुछ दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन सिंह ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का समर्थन किया था. इसके बाद विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी इसका समर्थन कर दिया था. लेकिन राहुल गांधी को अगले चुनाव में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने संबंधी सुझावों को कांग्रेस ने 'राजनीतिक अटकलबाजी' करार दिया था. कांग्रेस का कहना था कि प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने अच्छा काम किया है और फ़िलहाल यह पद खाली नहीं है. राहुल गांधी इन दिनों छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के चार दिनों के दौरे पर हैं. वे आदिवासी इलाक़ों का दौरा कर रहे हैं.

Friday, 25 April 2008

चुनावी साल में कश्मीर पैकेज

GoodNews! भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर में साल 2008 में प्रस्तावित चुनावों के मद्देनज़र एक आकर्षक पैकेज की घोषणा की है जिसमें कश्मीरी मुसलमानों, सिखों और कश्मीरी पंडितों का दिल जीतने की कोशिश की गई है.
भारतीय प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने जम्मू क्षेत्र के सीमावर्ती शहर अखनूर में शुक्रवार को एक रैली को संबोधित करते हुए इस आर्थिक पैकेज की घोषणा की. इस रैली में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद भी मौजूद थे.
ग़ौरतलब है भारत प्रशासित कश्मीर (जम्मू-कश्मीर) में कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की गठबंधन सरकार है.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस आर्थिक पैकेज के तहत कुछ नौकरियाँ देने, विस्थापित परिवारों की मासिक राहत राशि और पेंशन बढ़ाने और विस्थापित परिवारों को राज्य में लौटने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए भी कुछ योजनाओं की घोषणा की है.
उन्होंने मौजूद मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद और पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद मुफ़्ती मोहम्मद सईद की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन दोनों नेताओं ने जम्मू कश्मीर के टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए उल्लेखनीय काम किया है.
प्रधानमंत्री ने इस बात पर ख़ुशी जताई कि राज्य के लोग शिक्षा, कृषि, बागबानी, सड़कों, ऊर्जा, दूर संचार और पर्यटन के क्षेत्रों में काफ़ी सुधार आया है और तरक्की हुई है जिसके लिए राज्य के लोग बधाई के पात्र हैं.
चरमपंथी हिंसा का प्रभाव
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों का कोई सदस्य चरमपंथी हिंसा में मारा गया है उनके निकट संबधी को सरकारी नौकरी देने के बहुत से मामले अभी पूरे नहीं हुए हैं.
उन्होंने कहा, "इसकी एक वजह ये भी है कि इतनी सारी सरकारी नौकरियाँ उपलब्ध ही नहीं हैं. बहुत से ऐसे परिवार भी हैं जिनके ये निकट संबंधी बहुत सा ढीलापन देने के बाद भी नौकरी पाने की शर्तें पूरी नहीं करते हैं और अगर नौकरी की शर्तें बहुत ढीली कर दी जाएँ तो ऐसा सरकारी अमला तैयार हो जाएगा जो उत्पादक कार्य ठीक तरह से नहीं कर पाएगा."
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि इन हालात को देखते हुए हर ऐसे व्यक्ति को पाँच-पाँच लाख रुपए की मुआवज़ा राशि दी जाएगी जिसने चरमंपथी हिंसा में अपना निकट संबंधी खोया है. यह राशि पाने के बाद उस व्यक्ति का नौकरी पाने का अधिकार ख़त्म हो जाएगा.
विधवाओं की पेंशन भी बढ़ाकर 750 रुपए प्रतिमाह करने की घोषणा की गई है और अनाथ बच्चों को सहायता देने के कार्यक्रम का दायरा बढ़ाया जाएगा जिसमें बिना किसी भेदभाव के सभी बच्चों को सहायता दी जाएगी.
घर को वापसी
प्रधानमंत्री ने कहा, "जम्मू कश्मीर की परंपरा विभिन्न आस्थाओं वाले लोगों में मेलजोल की रही है लेकिन पिछले क़रीब दो दशकों की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की वजह से लगभग 55 हज़ार परिवार कश्मीर घाटी में अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं और हमारी सबकी ज़िम्मेदारी बनती है कि इन उजड़े हुए परिवारों को फिर से उनके घर बसाया जाए जो राज्य की."
घर बसाया जाए
जम्मू कश्मीर की परंपरा विभिन्न आस्थाओं वाले लोगों में मेलजोल की रही है लेकिन पिछले क़रीब दो दशकों की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की वजह से लगभग 55 हज़ार परिवार कश्मीर घाटी में अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं और हमारी सबकी ज़िम्मेदारी बनती है कि इन उजड़े हुए परिवारों को फिर से उनके घर बसाया जाए जो राज्य की.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
चरमपंथी गतिविधियों की वजह से कश्मीर घाटी से विस्थापित होने वाले बहुत से परिवारों को अपने मकान और संपत्ति औने-पौने दामों पर बेचने पड़े थे और यह सिलसिला तब तक जारी रहा जब 1997 में सरकार ने एक क़ानून बनाकर इस पर रोक लगाई.
प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार से कहा गया है कि वह ऐसे विस्थापित परिवारों के लिए ग्रुप हाउसिंग सोसायटी बनाने और ज़मीन मुहैया कराने के विकल्पों पर विचार करे. उन्होंने कहा, "सरकार उन परिवारों को नए घर बनाने या घर ख़रीदने के लिए एकमुश्त साढ़े सात लाख रुपए तक की राशि देगी जो घाटी को लौटना चाहते हैं."
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार ऐसे विस्थापित परिवारों को भी इसी तरह की एकमुश्त राशि देने पर विचार कर रही है घाटी में जिनके घर पूरी तरह से टूट-फूट चुके हैं या उन्हें आंशिक रूप से नुक़सान पहुँचा है, "सरकार शुरूआती ख़र्च भी उठाएगी और उनके लौटने की प्रक्रिया में मदद भी करेगी."
उन्होंने कहा कि जम्मू और दिल्ली में रहने वाले विस्थापित कश्मीरी परिवारों को जो 15 हज़ार रुपए की मासिक राशि दी जा रही है यह राशि इन परिवारों को वापिस लौटने पर भी दो साल तक जारी रहेगी.
नौकरियाँ
प्रधानमंत्री ने घोषणा की राज्य सरकार विस्थापित परिवारों को योग्य युवकों को नौकरी देने के लिए छह हज़ार पदों पर भर्ती करेगी, "इसमें राज्य सरकार की मदद करने के लिए लगभग तीन हज़ार पदों के वेतन का ख़र्च तब तक उठाएगी जब तक कि राज्य सरकार इन लोगों को एक समय सीमा के दायरे में पदों पर नियमित नहीं कर देती है."
उन्होंने कहा कि सरकार विस्थापित परिवारों के अन्य बेरोज़गार युवकों के लिए भी आर्थिक पैकेज मुहैया कराने पर विचार कर रही है ताकि वे अपना कोई रोज़गार शुरू कर सकें. इसके तहत ऐसे युवकों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. सरकार कश्मीरी विस्थापितों के ऐसे क़र्ज़ पर ब्याज को भी माफ़ करने पर विचार कर रही है जो वे अदा नहीं कर सके हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रस्तावों पर कुल 1600 करोड़ रुपए ख़र्च होने का अनुमान है और ये लाभ सभी विस्थापित परिवारों के लिए उपलब्ध होंगे जिनमें कश्मीरी पंडित, मुस्लिम और सिख भी शामिल हैं जिन्हें 1989 में अपना घर और सामान पीछे छोड़कर ही भागना पड़ा था.
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में आर्थिक और सामाजिक चुनौतियाँ बहुत बड़ी हैं और इनका मुक़ाबला करने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा.

Tuesday, 15 April 2008

मैं हिंसा और नफ़रत में विश्वास नहीं करती: प्रियंका

GoodNews! अपने पिता राजीव गांधी की हत्या की एक अभियुक्त से मिल कर चर्चा का विषय बनने वाली प्रियंका गांधी ने कहा है कि वह ग़ुस्से, नफ़रत और हिंसा में विश्वास नहीं करतीं और इन भावनाओं को वह कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने देंगी.
ग़ौरतलब है कि प्रियंका गांधी ने राजीव गाँधी की हत्या के मुक़दमे में एक अभियुक्त नलिनी से 19 मार्च को तमिलनाडु की जेल में मुलाक़ात की थी. यह घटना ख़ासी चर्चा में आई है.
प्रियंका गांधी वढेरा ने कहा, "यह सच है कि मैं नलिनी श्रीहरन से वेल्लोर कारावास में 19 मार्च, 2008 को मिली थी."
एक टीवी चैनल से बातचीत में प्रियंका का कहना था, "यह मेरा निजी दौरा था. मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहती. मैं ग़ुस्से या नफ़रत में विश्वास नहीं रखती. अपने पिता की मौत के सदमे से उबरने का ये मेरा अपना तरीका था."
मुरुगन की पत्नी नलिनी को राजीव गांधी की हत्या के मामले में कुछ जुर्माने के साथ मौत की सज़ा सुनाई गई थी.
बाद में सोनिया गांधी ने नलिनी की छोटी सी बेटी की वजह से क्षमायाचना की थी और इस सज़ा को आजीवन कारावास में बदलने का अनुरोध किया था.
राहुल नहीं मिलेंगे नलिनी se
नलिनी की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदलने के लिए अपनी माँ सोनिया गांधी के प्रयास के बारे में प्रियंका ने कहा, "वह भी हिंसा और नफ़रत में विश्वास नहीं करतीं."
सोनिया गाँधी के प्रयासों से नलिनी की मौत की सज़ा आजीवन कारावास में बदल गई
प्रियंका गांधी के भाई और सांसद राहुल गाँधी ने इस बारे में कहा, "मैं प्रियंका की इस मुलाक़ात के बारे में जानता था. हम दोनों का ही हिंसा में विश्वास नहीं है.
राहुल गांधी ने कहा कि नलिनी से मिलने का उनका कोई इरादा नहीं है.
इससे पहले एक अख़बार में नलिनी के वकीलों के हवाले से लिखा गया था कि उन्हें नलिनी ने मुलाक़ात के बारे में विस्तार से बताया है और ये मुलाक़ात 'सौहार्दपूर्ण' माहौल में हुई.
ग़ौरतलब है कि 1991 में 21 मई को चेन्नई के पास श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी जनसभा के दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने राजीव गांधी की हत्या कर दी थी.
इस मामले में चार लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई थी जबकि बाक़ी लगभग बीस लोगों को अलग-अलग वर्षों के लिए कारावास का दंड दिया गया था.
राजीव गांधी की हत्या के आरोप में जिन चार लोगों को मौत की सज़ा हुई उनमें नलिनी और मुरुगन भी शामिल थे.
बाद में सोनिया गाँधी के अनुरोध पर नलिनी की मौत की सज़ा को उम्र क़ैद में बदल दिया गया था और वह जेल में है.

Monday, 14 April 2008

राहुल में प्रधानमंत्री के सारे गुण: अर्जुन सिंह


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन सिंह ने अगले लोक सभा चुनाव में कांग्रेस के युवा नेता राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप पेश किए जाने का सुझाव दिया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के सारे गुण मौजूद हैं.
उन्होंने कहा, " राहुल में पिता के सभी गुण हैं. वे सारी ज़रूरी जानकारी और ज्ञान पाने की कोशिश में लगे हुए हैं."
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद युवा नेता राजीव गाँधी को प्रधानमंत्री बनाया गया था.
नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार के इस बात पर कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ही अगले प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया जाना चाहिए, उन्होंने कहा, " ये विचार व्यक्तिगत हैं...संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को इस बारे में तय करना होगा. पार्टी जिसे भी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुनेगी वह मुझे भी मान्य होगा."
बातचीत में अर्जुन सिंह ने माना कि महँगाई का मुद्दा चुनाव पर अपना असर दिखाएगा.
साथ ही उनका कहना था कि सरकार बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए हर ज़रूरी क़दम उठा रही है.
यह पूछने पर कि क्या अगला चुनाव कांग्रेस को गठबंधन में लड़ना चाहिए या अकले दम पर, उनका कहना था कि इस सवाल का जवाब देने में वे असमर्थ हैं.

Saturday, 12 April 2008

THE CONGRESS PARTY'S PRIORITIES, PLANS AND PROGRAMMES


DALITS AND ADIVASIS
The Congress will create a national consensus on the issue of dalits and adivasis getting a reasonable share of jobs in the private sector. A dialogue with private industry will be initiated to identify how best Indian industry could fulfill in tangible measure the aspirations of youth, especially those belonging to the weaker sections of society.
Determined efforts will be made to promote a culture of entrepreneurship among the dalits and adivasis by providing businesses run by them with preferential treatment in government procurement and by extending bank credit at affordable terms.
State governments will be urged to make legislation for conferring ownership rights in respect of minor forest produce on adivasis particularly who work in forests.
All reservation quotas, including those relating to promotions will be fulfilled in a time-bound manner. Special recruitment drives particularly for Class land II vacancies will be launched.
A comprehensive national programme for minor irrigation of all lands owned by dalits and adivasis will be introduced. Landless families will be endowed with some land through the proper implementation of land ceiling and land redistribution legislation.
There is need to reconcile the objectives of faster economic growth and environmental conservation as far as tribal communities dependent on forests are concerned. The Forest Conservation Act, 1980 has prevented a wholesale loss of forests. At the same time, concerns have been raised that in its implementation rigidities have developed depriving tribal communities the benefits of economic growth. These concerns have to be recognized and addressed in an ecologically sustainable manner. In addition, there is need to put in place more effective systems of relief and rehabilitation for tribal communities displaced by development projects.
Taking note of the growing unrest in tribal areas in various states, the Congress will have a fresh look at development strategies for tribal areas and work out new designs of sustainable livelihoods. Income accruing to the government from forest will be earmarked as additional assistance for programmes of tribal development.

Thursday, 10 April 2008

RAHUL "IN HIS OWN WORDS"


"My heart beats for India..."
I have come to win the heart, not election..."
"We believe that we should remain focused on our target and strive towards achieving it. Let our enemies say whatever they wish to. We are what we are and people will know us by what we do, not by what such people have to say about us."
"I once asked my father as to why he never launched a counterattack in a case in which he was hounded by the opposition for 17 long years, but he told me that as long as one followed the path of truth, stood on the right track and was clear in his mind about what he was doing, there was no need to waste time and energy on issuing clarifications."
"The main thing is to get people to start looking at what the main issues are and to make them believe that they can solve them."
"The thought comes to my mind that a lot of work needs to be done. In India there are a lot of poor people. And as a young Indian, it annoys me that we refuse to focus on the real issues and do so only on non-issues. By doing this we distract and slow ourselves down."


Rahul Gandhi

संसदीय सचिव अब मंत्री की श्रेणी में नहीं रह सकेंगे

जयपुर,, विशेष संवाददाता।
राजस्थान में संसदीय सचिव अब मंत्री की श्रेणी में नहीं रह सकेंगे। विधानसभा उपाध्यक्ष रामनारायण विश्नोई की अध्यक्षता वाली समिति ने इस संबंध में सदन के कार्य संचालन नियमों में संशोधन की सिफारिश की है।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा 24 दिसंबर को किए गए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मंत्रियों और संसदीय सचिवों की संख्या 30 के बजाय 33 हो गई। कांग्रेस ने इसे विधानसभा में और बाहर मुद्दा बनाते हुए मंत्रिमंडल विस्तार को गैर संवैधानिक बताया। कांग्रेस ने निर्धारित संख्या से ज्यादा बनाए गए मंत्रियों अथवा संसदीय सचिवों को हटाने की मांग की थी। वर्ष 2003 में हुए संविधान संशोधन के बाद राज्य मंत्रिमंडलों में कुल सदस्य संख्या के 15 फीसदी से ज्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते है। संसदीय सचिवों के मुद्दे पर कांग्रेस ने विधानसभा के बजट सत्र में तीन दिन तक कार्यवाही नहीं चलने दी थी। कांग्रेस का कहना था कि विधानसभा के नियमों में संसदीय सचिवों को मंत्री की परिभाषा में माना गया है। एक संसदीय सचिव ने मंत्री की हैसियत से वर्ष 2005 में सदन में विधेयक भी पेश किया। उसमें विधानसभा अध्यक्ष ने यह रूलिंग दी थी कि संसदीय सचिव मंत्रियों की परिभाषा में आते है। कांग्रेस की मांग थी कि या तो नियमों में संशोधन किया जाए या संसदीय सचिवों को हटाया जाए। इस पर उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी जिसमें सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़, कानून मंत्री घनश्याम तिवाड़ी, कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष हेमाराम चौधरी और पूर्व वित्तमंत्री प्रद्युम्नसिंह को शामिल किया गया था।
विश्नोई ने कहा कि कमेटी ने विधानसभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों में संशोधन की सिफारिश की है। वर्ष 2003 में संविधान संशोधन के बाद संसदीय सचिवों को मंत्रियों की परिभाषा में नहीं माना गया है। कुछ राज्यों ने विधानसभा नियमों में संशोधन कर लिए है, लेकिन राजस्थान में किन्हीं कारणों से यह संशोधन नहीं हो पाया था। इस भ्रांति की वजह से अनावश्यक विवाद हो रहा था।

परिसीमन के बाद बने नए विधानसभा क्षेत्रों के नक्शे तैयार



जयपुर, , विशेष संवाददाता। परिसीमन लागू होने के बाद बने नए विधानसभा क्षेत्रों के नक्शे सेटेलाइट से लिए चित्रों व डाटा बेस अध्ययन के आधार पर स्टेट रिमोट सेंसिंग सेंटर ने तैयार किए है। इंटरनेट पर किसी विधानसभा क्षेत्र का नाम अंकित करते ही उसका परिसीमन से पहले और बाद की स्थिति का नक्शा, कैटेगरी और नंबर की जानकारी मिल जाएगी। साथ ही हर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट और पोलिंग बूथ की जानकारी वाला साफ्टवेयर भी तैयार किया जाएगा।
राजस्थान में परिसीमन लागू किए जाने का फैसला होने के बाद पुनर्गठित विधानसभा क्षेत्रों के जोधपुर स्थित स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर ने सेटेलाइट चित्रों और डाटा बेस अध्ययन के आधार पर प्रदेश और हर जिले के नक्शे तैयार किए है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर एन.सी. कालरा ने बताया कि नक्शे में परिसीमन के बाद दो सौ विधानसभा क्षेत्रों में आए बदलाव को प्रदेश के 33 जिलों, 41 हजार गांवों और 237 पंचायत समितियों में दर्शाया गया है। इस नक्शे में विधानसभा क्षेत्रों की कैटेगरी और नम्बर में आए बदलाव को दर्शाया गया है। सॉफ्टवेयर में किसी भी विधानसभा का नाम अंकित करते ही उसके बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी। मतदाता या उम्मीदवार इस साफ्टवेयर से यह भी जान सकता है कि कौनसा गांव या पंचायत समिति किस विधानसभा क्षेत्र में है।
परिसीमन के बाद राज्य के दो सौ विधानसभा क्षेत्रों की बदली तस्वीर को दर्शाने वाले तैयार नक्शे को मुख्य चुनाव अधिकारी विनोद जुत्शी की अध्यक्षता में हुई बैठक में हरी झण्डी दे दी गई। इसमें राजस्थान और हर जिले के नक्शे और सॉफ्टवेयर को राजस्थान चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जारी करने और जिला कलेक्टरों को उनके जिले के नक्शे भेजने का निर्णय लिया गया।
स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट और पोलिंग बूथ की जानकारी वाला सॉफ्टवेयर तैयार करेगा। इससे कोई भी मतदाता अपना नाम वोटर लिस्ट में देख सकेगा और उसे अपने पोलिंग बूथ के बारे में भी जानकारी मिल जाएगी। इस सॉफ्टवेयर के आधार पर ई-मित्र केन्द्र से मतदाताओं को मतदाता पर्ची देने की व्यवस्था की जाएगी।

सम्मेलनों के जरिये कांग्रेस खोजेगी प्रत्याशी

जयपुर, , विशेष संवाददाता। बेणेश्वर में हुई विशाल जनसभा के साथ शुरू हुई कांग्रेस की चुनावी मुहिम का अगला पड़ाव जयपुर के आठ विधानसभाई क्षेत्रों में होगा। इन इलाकों में अब 'राजनैतिक सम्मेलनों' का आयोजन किया जाएगा। इन सम्मेलनों के जरिये विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं को जोड़ने और संभावित उम्मीदवारों के चयन को लेकर विचार-मंथन किया जाएगा।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस की ओर से जारी निर्देशों के तहत जयपुर जिला कांग्रेस की ओर से इन सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। जिले के सभी आठ विधानसभा क्षेत्रों में यह सम्मेलन 10 से 30 अप्रैल के बीच होंगे। बेणेश्वर से राज्य में चुनावी अभियान के आगाज के बाद सबसे पहले राजधानी से चुनावी प्रचार शुरू होगा।
सम्मेलन में विधानसभा क्षेत्र के ब्लॉक, जिले, प्रदेश पदाधिकारियों समेत यहां टिकट मांगने वाले नेताओं को बुलाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा के सम्मेलनों में टिकट मांगने वाले उम्मीदवारों के जनाधार व आम लोगों पर पकड़ का विश्लेषण कर उनकी उम्मीदवारी पर भी विचार किया जाएगा।
जयपुर जिला कांग्रेस के महासचिव आरआर तिवाड़ी के मुताबिक, सम्मेलन से आम मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। सम्मेलनों में प्रदेश मुखिया सीपी जोशी के अलावा प्रदेश के बड़े नेता भी मौजूद रहेगे।

राज्य सरकार से मुआवजा दिलाने की मांग

जयपुर, (विशेष संवाददाता)
प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री डॉ.चंद्रभान ने बताया कि प्रदेश में आंधी-तूफान, ओलावृष्टि एवं बेमौसम की बारिश से किसानों की फसल को हुए नुकसान का राज्य सरकार से मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस की ओर से सभी जिला कांग्रेस अध्यक्षों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गए है। डॉ.चंद्रभान ने प्राकृतिक आपदा प्रबंधन में राज्य की भाजपा सरकार को पूर्णतया विफल बताते हुए कहा कि सरकार केवल थोथी घोषणाएं करती है। उन्होंने कहा कि शीतलहर एवं पाले से रबी की फसल को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा घोषित 126 करोड़ रुपए के राहत पैकेज का प्रदेश के प्रभावित किसानों को आज तक कोई लाभ नहीं मिला है। उन्होंने इस बात पर अफसोस प्रकट किया कि दो माह की अवधि बीत जाने के बावजूद अभी तक नुकसान की जानकारी के लिए कराई गई गश्त गिरदावरी तक का कार्य पूरा नहीं हुआ है।
प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही ओलावृष्टि एवं बेमौसम की बारिश से किसानों की फसल को हुए नुकसान का सर्वे करवाकर मुआवजा राशि नहीं दी तो प्रदेश कांग्रेस और राज्य के किसान चैन से नहीं बैठेगे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में भविष्य की रणनीति तय करने के लिए 8 अप्रैल को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर एक अत्यावश्यक बैठक रखी गई है। डॉ. चन्द्रभान ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं कृषि मंत्री शरद पंवार से भी राजस्थान के पीड़ित किसानों की हर संभव मदद करने का आग्रह किया है।

Tuesday, 8 April 2008

'युवाओं को प्रभावी भूमिका दिलवाएँगे'


कांग्रेस सांसद और महासचिव राहुल गांधी ने कहा है कि देश की राजनीतिक पार्टियों ने युवाओं को वो स्थान और अवसर नहीं दिया है जो उन्हें मिलना चाहिए था.
उड़ीसा की चिंताजनक स्थिति पर बोलते हुए राहुल ने कहा कि उड़ीसा जैसे बदतर हाल और राज्यों में नहीं हैं. उत्तर प्रदेश में भी केवल बुंदेलखंड में उड़ीसा जैसी स्थिति दिखती है.
अपनी 'भारत खोज यात्रा' के दौरान उड़ीसा के गुनपुर में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस सहित देश की किसी भी पार्टी में युवाओं के लिए स्थान नहीं है.
राहुल गांधी शनिवार को उड़ीसा के गुनपुर में अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की याद में आयोजित एक रैली को संबोधित कर रहे थे.
ग़ौरतलब है कि गुनपुर वही जगह है जहाँ राजीव गांधी ने अपने जीवन का अंतिम भाषण दिया था. इसके बाद वो तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर गए थे जहाँ एक जनसभा में पहुंचने के कुछ मिनटों बाद ही उनकी हत्या हो गई थी.
राहुल गांधी ने इस अवसर पर कहा कि उनकी मंशा है कि संगठन का ऐसा ढांचा खड़ा किया जाए जिसमें युवाओं को केंद्रीय भूमिका में रखा जा सके.
चुनाव के सुर
उड़ीसा में चुनाव क़रीब हैं और इसलिए कांग्रेस मतदाताओं को अपनी ओर खींचना चाहती है. राहुल गांधी की इस यात्रा के साथ ही कांग्रेस ने चुनाव प्रचार का अनौपचारिक बिगुल फूंक दिया है.
उड़ीसा सरकार की निंदा करते हुए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने कहा, "पहले मैं सोचता था कि उत्तर प्रदेश ही सबसे पिछड़ा प्रदेश है, लेकिन उड़ीसा के दौरे के बाद उन्होंने अपनी यह धारणा बदल ली है."
उन्होंने कहा कि अपने अमेठी दौरे के दौरान वो ऐसा गांव ढूंढते हैं जहाँ बिजली न पहुँची हो पर यहां वो ऐसा गांव ढूंढते रहे जहाँ बिजली पहुँची हो.
उन्होंने कहा, "युवा कांग्रेस और एनएसयूआई में युवाओं के लिए जगह बनाउंगा और ऐसा संगठन तैयार करूँगा जो हर युवा, हर धर्म, हर जाति के लोगों का संगठन हो और जो हिंदुस्तान के लोगों की आवाज़ पूरी दुनिया में ले जा सके."
राहुल गांधी ने कहा कि राजीव गांधी की मौत के साथ ही देश के युवाओं की आवाज़ मंद पड़ गई.

Sunday, 6 April 2008

'राहुल ने मंत्री बनने से इनकार किया'


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का कहना है कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने संगठन के कामकाज में अत्यधिक व्यस्तता के कारण मनमोहन सरकार में मंत्री बनने से इनकार कर दिया.
केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की प्रमुख सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति भवन में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में ये जानकारी दी.
ये पूछे जाने पर कि मनमोहन सरकार में युवा मंत्री शामिल हुए तो राहुल गांधी क्यों नहीं मंत्री बने, सोनिया गांधी ने कहा,'' मुझे अच्छा लगता अगर वो केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होते लेकिन उनका दृढ़ मत है कि उन्हें पार्टी में कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ मिली हुई हैं, ख़ासतौर से युवा कांग्रेस को उन्हें मजबूत करना है इसलिए उन्हें सरकार में शामिल नहीं होना चाहिए.''
मुझे अच्छा लगता अगर वो केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होते लेकिन उनका दृढ़ मत है कि उन्हें पार्टी में कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ मिली हुई हैं ख़ासतौर से युवा कांग्रेस को उन्हें मजबूत करना है इसलिए उन्हें सरकार में शामिल नहीं होना चाहिए

सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष
मनमोहन मंत्रिमंडल में जो सात मंत्री शामिल किए गए दो युवा चेहरे ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद शामिल किए गए हैं.
गुना से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को दूरसंचार और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय विभाग का राज्यमंत्री बनाया गया है जबकि जितिन प्रसाद को इस्पात मंत्रालय के राज्यमंत्री की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है.
ये पूछे जाने पर कि क्या महाराष्ट्र में कोई परिवर्तन हो रहा है, सोनिया गांधी ने कहा कि सब कुछ यथावत है.
ग़ौरतलब है कि मीडिया में ऐसी अटकलें थीं कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को हटाकर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे को उनकी जगह लाया जा रहा है.

मनमोहन की टीम में दो युवा मंत्री शामिल

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रिपरिषद में सात नए चेहरे शामिल किए हैं जिनमें दो युवा सांसद शामिल हैं.
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने मंत्रियों के कार्यभार में भी कुछ फेरबदल किए हैं.
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने एक सादे समारोह में नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
पूर्व चुनाव आयुक्त एमएस गिल, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, वी नारायणस्वामी, रामेश्वर उराँव, रघुनाथ झा और संतोष बागरोड़िया को मंत्री पद मिला है.
इस विस्तार की मार पड़ी है खेल और युवा मामलों के मंत्री मणिशंकर अय्यर पर जिनसे मंत्री पद छीनकर एमएस गिल को दे दिया गया है.
नए मंत्री
एमएस गिल , ज्योतिरादित्य सिंधिया , जितिन प्रसाद, वी , नारायणस्वामी , रामेश्वर उराँव , रघुनाथ झा ,
संतोष बागरोड़िया
रघुनाथ झा राष्ट्रीय जनता दल के कोटे से मंत्री बने हैं जबकि संतोष बागरोड़िया का संबंध राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से है.
गुना से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्य मंत्री बनाया गया है जबकि राज्यसभा सांसद संतोष बागरोड़िया कोयला मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार संभालेंगे.
रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री बिजोय कृष्ण हांडिक को खान मंत्रालय का स्वतंत्र रुप से अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जयराम रमेश को ऊर्जा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.
मंत्रिमंडल विस्तार से ठीक पहले कांग्रेस के छह राज्य मंत्रियों ने अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया था जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया था.
सुरेश पचौरी, दसारी नारायण राव, एमवी राजशेखरन, टी सुब्बीरामी रेड्डी, अखिलेश दास और माणिकराव गावित ने अपनी कुर्सियाँ खाली कीं.

केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावना


भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रविवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं. इसमें कुछ युवा चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है.
संभावना जताई जा रही है कि नए मंत्री मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश से हो सकते हैं.
जिन नामों की चर्चा है वे हैं- ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, जितिन प्रसाद और वी हनुमंत राव.
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल नए मंत्रियों को रविवार शाम ही पद और गोपनीयता की शपथ दिला सकती हैं.
पिछले कई महीनों से मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की संभावना जताई जा रही है.
अभी प्रियरंजन दासमुंशी सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ-साथ संसदीय कार्य मंत्रालय की ज़िम्मेदारी भी संभाल रहे हैं. संभावना है कि फेरबदल के बाद उनसे कोई एक मंत्रालय ले लिया जाएगा.
दो केंद्रीय मंत्रियों सुरेश पचौरी और एमवी राजशेखरन की राज्यसभा सदस्यता की अवधि ख़त्म हो रही है लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि वो मंत्रिमंडल में बने रहेंगे या नहीं.
शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाक़ात की थी जिसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना तेज़ हो गई.

Thursday, 3 April 2008

आडवाणी मामला स्पष्ट करें: सोनिया


भारत में सत्तारूढ़ गठबंधन की प्रमुख सोनिया गांधी ने पूर्ववर्ती एनडीए सरकार और उसके नेताओं पर चरमपंथियों के प्रति नर्म रुख़ अपनाने का आरोप लगाया है.
सोनिया गाँधी ने गुरुवार को राजस्थान में अपनी एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कंधार विमान अपहरण कांड का मुद्दा फिर उठाया और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी से तत्कालीन गृहमंत्री के तौर पर सफ़ाई मांगी.
दक्षिण राजस्थान के आदिवासी बहुल डूंगरपुर ज़िले मे एक भीड़ भरी रैली को संबोधित करते हुए सोनिया गाँधी ने पूर्ववर्ती सरकार पर तीखे प्रहार किए.
सोनिया गांधी ने कहा कि भाजपा के लोगों की देशभक्ति महज ज़ुबानी है.
सोनिया ने कहा, "मैं पूछना चाहती हूँ कि वो कौन-सी सरकार थी, जिसने आतंकवादियों की मेहमान-नवाज़ी करके उन्हें अफ़ग़ानिस्तान ले जाकर छोड़ा था." आडवाणी पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "अब आडवाणी जी कहते है कि यह फ़ैसला उनकी जानकारी में नहीं था. इससे क्या नतीजा निकालें. क्या यह माना जाए कि तत्कालीन प्रधानमंत्री को अपने गृह मंत्री पर विश्वास नहीं था. अगर विश्वास नहीं था तो क्यों नहीं था."
कांग्रेस अध्यक्षा लालकृष्ण आडवाणी की हाल ही में प्रकाशित हुई किताब का हवाला दे रही थीं जिसमें कथित तौर से कहा गया है कि चरमपंथियों को विमान अपरहण के बाद विदेशमंत्री के साथ अफ़ग़ानिस्तान भेजने के निर्णय की उन्हें जानकारी नही थी.
बिना मौका गंवाए सोनिया गांधी ने कहा कि देश इस मामले की सचाई जानना चाहता है. पूर्ववर्ती विदेशमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं जबकि जॉर्ज फर्नाडिस कुछ और कह रहे हैं.
महंगाई पर सफ़ाई
अदिवासियों की इस रैली में सोनिया गांधी ने महंगाई पर सफ़ाई दी और कहा कि केंद्र सरकार ने बहुतेरे कदम उठाए है ताकि महंगाई कम हो सके.
साथ ही उन्होंने महंगाई के लिए राज्य सरकार पर दोष लगाया. उनकी नज़र में राज्य की भाजपा सरकार भ्रष्ट है और केंद्र से मिली राशि का दुरूपयोग कर रही है.
सोनिया गांधी की यह आम सभा एक तरह से कांग्रेस के चुनाव अभियान की शुरुआत थी.
इसके लिए कांग्रेस ने अदिवासियों के तीर्थस्थल बेनेश्वर को चुना जो गुजरात और राजस्थान की सीमा पर माही और सोम नदियों के संगम पर है.
अपनी इस शुरुआत के ज़रिए कांग्रेस आदिवासियों के बीच अपना खोया हुआ आधार फिर से हासिल करना चाहती है क्योंकि पिछले चुनाव में कांग्रेस को आदिवासी क्षेत्रों में भारी नुकसान उठाना पड़ा था.
उधर भाजपा भी अब आदिवासी अंचलों में जवाबी सभा की योजना बना रही है.

Tuesday, 1 April 2008

रोज़गार गारंटी योजना पूरे देश में लागू





ग़रीबी दूर करने के लिए केंद्र सरकार की अब तक की सबसे बड़ी रोज़गार योजना को मंगलवार से पूरे देश में लागू की जा रही है. राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना केंद्र की सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की सबसे महात्वाकांक्षी योजना है.
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस योजना को पूरे देश में लागू करने के लिए व्यापक तैयारियाँ की हैं. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर इस योजना में सहयोग देने का अनुरोध किया है, ताकि अधिक से अधिक से लोग लाभान्वित हो सकें.
इस योजना के तहत ग़रीब परिवारों के एक सदस्य को साल में कम से कम 100 दिन रोज़गार उपलब्ध कराया जाएगा. इसके तहत काम पाने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 60 रुपए की मजदूरी मिलेगी या दैनिक मजदूरी का भुगतान राज्यों में तय न्यूनतम मजदूरी के बराबर होगा.
पंचायतों की भूमिका
इसको लागू करने में पंचायतों की प्रमुख भूमिका है. रोज़गारी गारंटी विधेयक के प्रावधानों के तहत इस योजना पर ग्राम सभा का नियंत्रण और निगरानी रहती है. इस योजना की शुरूआत फ़रवरी, 2006 में देश के 200 ज़िलों से की गई थी. बाद में इसमें 130 और जिलों को शामिल कर लिया गया था और मंगलवार से देश के बाकी के 274 और ज़िले इसमें शामिल हो जाएँगे. सरकार का कहना है कि इस योजना के तहत वर्ष 2007-08 के दौरान लगभग तीन करोड़ से अधिक परिवारों को रोज़गार मुहैया कराया गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के इरादे नेक हैं.
इसके तहत रोज़गार को बतौर योजना नहीं बल्कि एक क़ानूनी हक़ के तौर पर पेश किया गया है.