Wednesday, 23 July 2008

मुझे बंधुआ बनाना चाहता था लेफ्ट


एजेंसी
Wednesday, July 23, 2008 02:53 [IST]
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वामदलों पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने वामपंथी नेताओं के संदर्भ में आरोप लगाया कि वे मुझसे बंधुआ की तरह व्यवहार करना चाहते थे। उन्होंने मंगलवार को लोकसभा में विश्वास मत पर बहस का जवाब देते हुए बताया कि वामपंथी वार्ता के हर कदम पर वीटो करना चाहते थे। 
सिंह ने वामपंथियों को ‘हमारे दोस्त’ कहकर संबोधित किया और प्रकाश करात पर गलत गणनाएं करने का आरोप लगाया। सिंह ने आडवाणी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने अक्षमता के आरोपों के जवाब में कहा कि भाजपा नेता को गुजरात के जलने और कंधार विमान अपहरणकांड के दौरान निभाई गई भूमिका का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा, ‘क्या हमारा देश ऐसे गृहमंत्री को माफ कर सकता है, जो संसद के दरवाजे तक आतंकियों के घुस आने के बावजूद सोया हुआ था? 
क्या देश ऐसे व्यक्ति को क्षमा कर सकता है, जिसने बाबरी मस्जिद को गिराने की प्रेरणा दी।’उन्होंने आडवाणी को सलाह दी कि वे भारत के हित में अपने ज्योतिषियों को तो बदल लें। पीएम ने कहा कि आडवाणी ने सरकार की आलोचना में खराब शब्द इस्तेमाल किए। मुझे निकम्मा तक कहा।

निडर होकर अपने फैसले करे भारत


भास्कर नेटवर्क
Tuesday, July 22, 2008 14:35 [IST]
नई दिल्ली.लोकसभा में मंगलवार को विश्वास मत पर बहस के दौरान बसपा सांसदों द्वारा किए जा रहे हंगामे और टोका-टोकी के बीच कांग्रेस महासचिव और सांसद राहुल गांधी ने कहा कि 70 फीसदी युवाओं वाले देश भारत को अपने फैसले बिना डरे करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश के लिए ‘अज्ञात का भय’ आगे बढ़ने में बाधा नहीं बनना चाहिए। राहुल ने अपने भावनात्मक भाषण में परमाणु करार के मुद्दे का जोरदार समर्थन किया और इसे आम जनता से जोड़ने की कोशिश की। 
उन्होंने कहा कि देश से गरीबी दूर करने के लिए ऊर्जा सुरक्षा जरूरी है। करार इसी को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। राहुल ने करार के पक्ष में अपने तर्र्को को मजबूती से पेश करने के लिए महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के दो गरीब परिवारों के साथ हुए निजी अनुभव सुनाए। उन्होंने जैसे ही गरीबी के कारण शशिकला और कलावती के परिवार के साथ पेश आ रही कठिनाइयों का जिक्र किया तो विपक्षी सांसदों ने जमकर टोका-टोकी की। कलावती के बारे में बताने के दौरान राहुल को कटाक्षों का सामना भी करना पड़ा। 
‘भारतीय के नाते बोलूंगा’ 
राहुल ने अपने भाषण के प्रारंभ में कहा, ‘मैं यहां एक भारतीय होने के नाते बोलूंगा न कि कांग्रेसी होने के कारण।’ इस पर विपक्ष द्वारा टोका-टोकी करने पर उन्होंने कहा कि भले ही आप मुझसे सहमत नहीं हों लेकिन मेरी बात सुन लीजिए।
वाजपेयी की तारीफ
राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेताअटलबिहारी वाजपेयी की प्रशंसा करके भाजपा को आश्चर्य में डाल दिया। राहुल ने पहले तो देश के ऊर्जा संकट को समझने और इसके समाधान के वास्ते काम करने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रशंसा की, फिर उसी अंदाज में वाजपेयी की यह कहकर तारीफ की कि उन्होंने भी इस समस्या को देखा और इसके लिए काम किया। प्रतिद्वंद्वी पार्टी ने जब इस उदार टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई तो राहुल ने भाजपा सांसदों की बेंचों की ओर देखते हुए कहा, ‘इस पर तो ताली मारिए’। 
बसपा सदस्यों का हंगामा 
राहुल के भाषण के दौरान खासकर बसपा सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। राहुल ने अपना बाकी भाषण लंच के बाद पूरा किया। 
अपहरण का आरोप 
राहुल के भाषण के समय बसपा नेता ब्रजेश पाठक खड़े होकर जोर-जोर से बोलने लगे कि उनकी पार्टी के चार साथियों का अपहरण कर लिया गया है। सदन उनकी शिकायत पर ध्यान दे। बसपा सदस्यों ने पाठक के नेतृत्व में कुछ दस्तावेज लहराते हुए सरकार के खिलाफ कई आरोप लगाए, लेकिन शोरगुल के कारण स्पष्ट रूप से कुछ भी सुनाई नहीं दिया।

Tuesday, 22 July 2008

CNN-IBN, IBN7 के पास सांसदों की खरीद फरोख्त के टेप

Tue, Jul 22, 2008 at 17:54
नई दिल्ली। CNN-IBN, IBN7 के पास सांसदों की खरीद फरोख्त के टेप हैं। पिछले सात दिन से इस बारे में CNN-IBN संवाददाता काम कर रहे थे। टेप को चैनल ने न दिखाने का फैसला किया है। टेप लोकसभा के स्पीकर सोमनाथ चटर्जी को सौंप दिए गए हैं।
CNN-IBN और IBN7 के एडीटर इन चीफ राजदीप सरदेसाई ने बताया कि हमारी जांच के दौरान ये टेप हमारे हाथ आए। इसमें लगे आरोपों की तहकीकात करने का हमें समय नहीं मिला। इससे पहले ही बीजेपी सांसद लोकसभा पहुंच गए। अब हमने ये टेप स्पीकर को सौंप दिए हैं।। ये टेप अब पब्लिक प्रापर्टी हैं और संसद की प्रापर्टी हैं। राजदीप ने कहा कि पत्रकार इंवेस्टिगेशन के दौरान कई मामलों से दो चार होते हैं और उसकी जांच की जाती है। हम खरीद फरोख्त के आरोपों की जांच कर रहे थे।
इस दौरान कुछ चीजें रिकार्ड हुईं। कुछ चीजें रिकार्ड नहीं हुईं। मामला अब इस स्तर पर पहुंच गया है कि हमने ये टेप स्पीकर को दे दिए हैं। अब स्पीकर और दूसरे नेता तय करें कि क्या करना है। हमने पत्रकार के नाते मामले की जांच की। हम तथ्यों को जांच नहीं कर पाए। 


हमने अपने पत्रकार धर्म का पालन किया। स्टोरी पूरी नहीं हुई थी इसलिए हमने इसे टेलीकास्ट नहीं किया। राजदीप ने कहा कि हमें किसी पार्टी से कुछ लेना देना नहीं। 


स्पीकर तय करें कि ये टेप जनता के सामने आएं या नहीं। संसद की तरफ से हमसे कोई सम्पर्क नहीं किया गया। हम अपनी तरफ से खुद ही स्पीकर से मिलने गए। 


हमारा किसी राजनीतिज्ञ से कोई लेना देना नहीं है। राजदीप ने कहा कि हम सच की तलाश कर रहे थे। हम सब कुछ बताने को तैयार हैं। हम कुछ छुपाना नहीं चाहते। 


हमारा मकसद केवल और केवल सच था और कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि हमने किसी का नाम नहीं लिया है। बीजेपी जिसका भी नाम ले रही है उससे हमारा कोई मतलब नहीं है।

स्टिंग ऑपरेशन का टेप लोस अध्यक्ष को सौंपेगा चैनल


नई दिल्लीः भारत-अमेरिका न्यूक डील को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा लोकसभा में रखे विश्वासमत प्रस्ताव पर मतदान के दौरान अनुपस्थित रहने के लिए बीजेपी के तीन सांसदों को दिए गए कथित रिश्वत का स्टिंग ऑपेशरन करने वाला टेलीविज़न चैनल इससे संबंधित टेप लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को सौंपने का फैसला किया है। 

सीएनएन आईबीएन के प्रमुख राजदीप सरदेसाई ने उनके चैनल द्वारा इस घटना का स्टिंग किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि बीजेपी के सांसदों को दिए गए कथित रिश्वत का उनके चैनल ने पत्रकारिता के क्षेत्र में होने के कारण स्टिंग ऑपरेशन किया है। उन्होंने कहा कि विश्वासमत प्रस्ताव पर मतदान के दौरान गैरहाज़िर रहने के लिए सांसदों की कथित खरीद-फरोख्त की जानकारी मिलने पर उनके चैनल यह स्टिंग किया। 

सरदेसाई ने कहा कि उनका चैनल किसी भी राजनीतिक खेल में शामिल नहीं है लेकिन जनहित में स्वतंत्र जांच की गई है। सरदेसाई ने कहा कि हमने किसी भी लेनेदेन में शामिल होने की अनुमति नहीं दी थी। टेप में सब कुछ है और हम उस टेप को अध्यक्ष को सौपंने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका चैनल इसका प्रसारण नहीं करेगा क्योंकि इसमें संसद का विशेषाधिकार शामिल है लेकिन जांच में मदद करेगा। 

... तो राजनीति से सन्यास ले लूंगा : अहमद पटेल


एजेंसीTuesday, July 22, 2008 18:26 [IST]
नई दिल्ली.कांगेस नेता अहमद पटेल ने रिश् वत प्रकरण में भाजपा सांसदो द्वारा उनकें नाम को घसीटे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पहली बार किसी ने उनकें ऊपर इतने गंभीर आरोप लगाए हैं और इसकी जांच होनी चाहिए। अहमद पटेल ने दावा किया कि इस संबंध में उनकीं अमर सिंह के साथ कोई बात नहीं हुई थी और अगर उनपर लगाया गया कोई भी आरोप सच साबित हो जाए तो वे राजनीति से संयास ले लेंगे।

पार्टी को बदनाम करने का प्रयास

अहमद पटेल ने कहा है कि उनकों और उनकीं पार्टी को इसमें फंसाने का प्रयास किया गया है और इसकी जांच होनी चाहिए । मैं अगर दोषी पाया जाता हूं तो जो भी सजा हो भुगतने के लिए तैयार हूं।

19 मतों से विश्वासमत जीता यूपीए सरकार ने


 Marwar News!
अमरीका से साथ हुए परमाणु समझौते को लेकर उपजे राजनीतिक विवाद के बाद वामपंथियों का समर्थन खो चुकी सरकार ने आख़िर विश्वासमत जीत लिया है.लोकसभा के विशेष सत्र में दो दिनों तक चली बहस के बाद हुए मतदान में यूपीए ने 256 के मुक़ाबले 275 मतों से जीत हासिल की. वर्तमान संसद में बहुमत के लिए सरकार को 271 सदस्यों के समर्थन की ज़रुरत थी लेकिन सरकार ने इससे चार अधिक सांसदों का मत हासिल किया है. 

दस सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. 
मतदान के पहले तक विश्वासमत के दौरान अनुपस्थित रहने के लिए सांसदों की ख़रीदफ़रोख़्त के आरोप प्रत्यारोपों को लेकर सदन में ज़ोरदार हंगामा होता रहा. उल्लेखनीय है कि मतदान के कुछ ही घंटों पहले भारतीय जनता पार्टी के सांसद नोटों से भरा एक थैला लेकर सदन के भीतर आ गए और फिर नोट दिखाते हुए उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन पर मतदान में अनुपस्थित रहने के लिए यह पैसा देने का आरोप लगाया.लोकसभा टेलीविज़न चैनल पर दिखाए गए इन दृश्यों के बाद संसद की कार्रवाई कई बार बाधित हुई और फिर लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने इस मामले की जाँच का आश्वासन दिया है. विपक्ष के सांसद सदन में विशेष सत्र के पहले दिन से ही आरोप लगा रहे थे कि सौदेबाज़ी और सांसदों की ख़रीद हो रही है.

अंक गणित
लोकसभा में 543 सदस्य होते हैं लेकिन इस समय इसमें से दो सीटें खाली हैं और सदस्यों की कुल संख्या 541 है.

ऐसे में बहुमत के लिए सरकार को 271 सदस्यों का समर्थन चाहिए था. 224 सदस्यों वाली यूपीए पिछले चार साल से वामपंथियों के 59 सांसदों के समर्थन पर चल रही थी.लेकिन यूपीए सरकार के आईएईए में जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ गत आठ जुलाई को वामपंथियों ने समर्थन वापसी की घोषणा कर दी और सरकार अल्पमत में आ गई थी. इसके बाद यूपीए ने समर्थन जुटाने की क़वायद शुरु की और सबसे पहले उसे समाजवादी पार्टी का समर्थन मिला. समाजवादी पार्टी के पास 39 सांसद हैं. हालांकि यह आख़िरी समय तक कयास लगाए जाते रहे कि इनमें से कितने सांसदों का समर्थन यूपीए को मिल सकेगा. यूपीए ने पाँच सांसदों वाले झारखंड    मुक्ति मोर्चा को तो मना लिया था और दो सांसदों वाली नेशनल कांफ़्रेंस ने भी सरकार को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी. लेकिन बहुजन समाज पार्टी से लेकर अजित सिंह के लोकदल का समर्थन सरकार हासिल नहीं कर सकी थी. और आख़िर तक निर्दलियों और एक-एक सांसद वाली छोटी पार्टियों पर निर्भर कर रही थी और लगता है उसे इसमें सफलता भी मिली.

बहस
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को संक्षिप्त भाषण में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की चार साल और दो महीने के काम पर वोट माँगा और बहस की शुरुआत की.जहाँ विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सरकार पर तीखे प्रहार किए वहीं वामपंथी दलों की ओर से मोहम्मद सलीम ने आरोप लगाया कि सरकार ने वामपंथी दलों और देश को धोखा दिया है. विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सरकार का बचाव करते हुए भाजपा और वामपंथी पार्टियों के आरोपों को ख़ारिज कर दिया.दो दिनों की बहस में उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए खड़े हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने जवाब नहीं देने दिया.भाजपा के सदस्य प्रधानमंत्री से इस्तीफ़े की माँग करते हुए नारे लगा रहे थे.इसके बाद प्रधानमंत्री ने अपना जवाब सदन के पटल पर रख दिया.

 

Monday, 21 July 2008

नेपाल के पहले राष्ट्रपति बने रामबरन यादव


एजेंसीMonday, July 21, 2008 16:20 [IST]
काठमांडू.नेपाली कांग्रेस लीडर रामबरन यादव को नेपाल का नया राष्ट्रपति चुन लिया गया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार रामबरन यादव को कुल 308 मत मिले है जबकि उनकें विपक्ष में खड़े हुए रामराजा प्रसाद सिंह को मात्र 282 मत ही मिला हैं। 

इससे पहले शनिवार को संविधान सभा देश के पहले राष्ट्रपति का चयन नहीं कर पाई थी। जबकि 312 वोट हासिल करने वाले मधेसी पीपल्स राइट्स फोरम के नेता परमानंद झा पहले उप राष्ट्रपति निर्वाचित किए गए थे। 

बड़े खिलाड़ी लेकिन वोट नहीं


यूपीए सरकार के विश्वास प्रस्ताव पर बहस चल रही है 
लोकसभा में यूपीए सरकार के विश्वास प्रस्ताव पर बहस चल रही है जहां मतदान भी होना है लेकिन इस राजनीतिक जोड़ तोड़ के लगभग सभी बड़े खिलाड़ी विश्वास प्रस्ताव पर वोट नहीं डालेंगे. 
अगर पिछले पंद्रह बीस दिनों की राजनीतिक हलचल पर नज़र डालें तो महत्वपूर्ण धुरियों के रुप में उभरे नेता या तो राज्यसभा के हैं या फिर विधायक हैं. 

भारत अमरीका परमाणु समझौते पर वाम दलों ने समर्थन वापस लिया जिसे कई लोगों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत की लड़ाई भी क़रार दे दिया था. 

ये दोनों नेताओं की नाक की लड़ाई भले न हो लेकिन ये दोनों महत्वपूर्ण नेता हैं और ये दोनों ही विश्वास प्रस्ताव पर वोट नहीं डालेंगे क्योंकि ये दोनों राज्यसभा के सदस्य हैं और विश्वास प्रस्ताव पर मतदान सिर्फ लोकसभा में होगा. 

इतना ही नहीं पूरे जोड़ तोड़ में सबसे महत्वपूर्ण नेता के तौर पर उभरी मायावती भी वोट नहीं डालेंगी क्योंकि वो यूपी से विधायक हैं. 

इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य भूमिका निभाने वाले समाजवादी पार्टी के दोनों महत्वपूर्ण नेता यानी मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह भी वोट नहीं डालेंगे क्योंकि अमर सिंह राज्यसभा सांसद हैं और मुलायम सिंह विधायक. 

बड़े नेताओं में सिर्फ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ही ऐसे हैं जो लोकसभा सांसद हैं विश्वास प्रस्ताव के दौरान वोट डालेंगे. 

 

विश्वास मत पर चर्चा में राहुल हिस्सा लेंगे


राहुल गांधी का कहना है कि समझौते पर पीछे नहीं हटेंगे 
ख़बरें हैं कि विश्वास मत पर कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी भी चर्चा में हिस्सा लेंगे.
कांग्रेस की ओर से पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, पवन कुमार बंसल, आनंद शर्मा और यूपीए की ओर से आरजेडी नेता लालू यादव, लोक जनशाक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान के चर्चा में हिस्सा लेने की उम्मीद है. 

सीपीआई की ओर से गुरुदास दासगुप्ता, सीपीएम की ओर से मोहम्मद सलीम और रूपचंद पाल अमरीका के साथ परमाणु समझौते को लेकर सरकार पर निशाना साधेंगे. 

भाजपा की ओर से लालकृष्ण आडवाणी पार्टी की कमान संभालेंगे. 

इसके पहले राहुल गांधी ने अमेठी में मीडिया से बातचीत में कहा था कि 'सरकार को ख़तरा है लेकिन प्रधानमंत्री नेतृत्व दिखा रहे हैं और देशहित के लिए सरकार गिरती है तो गिर जाए.' 

उनका कहना था कि प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और अनेक अन्य दलों में युवाओं से उनकी बात हुई है और वे सब भारत-अमरीका परमाणु समझौते के पक्ष में हैं. 

राहुल की खरी खरी

एक सवाल के जवाब में उनका कहना था, "सरकार को रिस्क (यानी ख़तरा) है. प्रधानमंत्री नेतृत्व दे रहे हैं. प्रधानमंत्री ने कहा है कि ये समझौता देश के हित में है और मुझे उन पर पूरा विश्वास है....मैं उनका सौ प्रतिशत समर्थन करुँगा." 


  यदि परमाणु समझौता लोगों के हित में है तो में तो यही कहता हूँ कि प्रधानमंत्री ये ख़तरा दोबारा उठाएँ. यदि सरकार भी गिरती है तो गिर जाए

 
राहुल गांधी 


जब उन्हें सरकार के गिरने के ख़तरे के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "हाँ, ख़तरा है. लेकिन यदि ये लोगों के हित में है तो में तो यही कहता हूँ कि प्रधानमंत्री ये ख़तरा दोबारा उठाएँ. यदि सरकार भी गिरती है तो गिर जाए..." 

राहुल गांधी का कहना था कि जब प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने तय किया है कि ये (परमाणु समझौता) भारत के भविष्य के लिए सही फ़ैसला है तो फिर और कोई निर्णय करने की ज़रूरत नहीं रह जाती है. 

उनका कहना था कि कौन कह सकता है कि परमाणु ऊर्जा अगले कुछ साल में केवल तीन प्रतिशत उपलब्ध होगी, क्या पता है कि भारत का कोई प्रतिभाशाली वैज्ञानिक इससे कही अधिक ऊर्जा भारत के लिए उपलब्ध करा दे. 

  

Sunday, 20 July 2008

मुलायम बरसे लालकृष्ण और लेफ़्ट पर


लोकसभा में 22 जुलाई के विश्वास मत से पहले तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक समीकरणों में वाम मोर्चा, बहुजन समाज पार्टी, यूनाइटेड नेशनल प्रोग्रेसिव एलायंस, राष्ट्रीय लोकदल और जनता दल (एस) ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के विश्वास प्रस्ताव का विरोध करने की घोषणा की है.
महत्वपूर्ण है कि वाम मोर्चे और यूएनपीए की बैठक में प्रकाश कारत और तेलुगुदेशम पार्टी के चंद्रबाबू नायडु के अलावा जनता दल (एस) के एचडी कमारस्वामी, असम गणपरिषद के ब्रिंदावन गोस्वामी और इंडियन नेशनल लोकदल के अजय चौटाला भी मौजूद थे.

इन पार्टियों के नेताओं की बैठक के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नेता मायावती ने कहा, "हमारा केवल एक मुद्दे का एजेंडा है कि 22 जुलाई को विश्वास मत में यीपीए सरकार को हराया जाए." उनकी पार्टी के लोकसभा में 17 सांसद हैं.
उधर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) महासचिव प्रकाश कारत ने कहा, "बसपा, तेलुगुदेशम पार्टी और जनता दल (एस) सभी साथ हैं और हम साथ मिलकर 22 जुलाई को विश्वास मत के दौरान सरकार को हराने की कोशिश करेंगे." वाम मोर्चे के 59 सांसदों के साथ उनके सहयोगी केरल कांग्रेस (थॉमस) के एक सांसद भी हैं.

सोरेन यूपीए के साथ, देवेगौड़ा हुए ख़िलाफ़

लोकसभा की 545 सीटों में से दो स्थान रिक्त हैं. इस तरह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को 543 में से 272 सांसदों का समर्थन हासिल करने है. यूपीए के 224 सांसदों के साथ समाजवादी पार्टी के 39 सांसदों में से 35 का यूपीए को समर्थन मिलने की संभावना है.


लोकसभा में शिबू सोरेन की जीएमएण के पाँच, तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के तीन, देवेगौड़ा के जनता दल (एस) के तीन, राष्ट्रीय लोकदल के तीन सांसदों के साथ निर्दलीयों, छोटे दलों की अहम भूमिका है



इस तरह से सरकार बचाने के लिए यूपीए को कम से कम 13 सांसदों का समर्थन जुटाने की ज़रूरत है और उसे समर्थन मिला है झारखंड मुक्ति मोर्चा का जिसके पाँच सांसद हैं.


शिबू सोरेन को माओवादियों की धमकी

झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबू सोरेन रविवार को अपने अन्य साथियों के साथ यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले.

उन्होंने पत्रकारों को बताया, "हमने अपने सांसदों के साथ मिलकर तय किया है कि 22 जुलाई को विश्वास मत के दौरान यूपीए के समर्थन में वोट देंगे." उन्होंने ये भी कहा, "हाँ, मंत्री पद के बारे में बात हुई है और हम पहले भी मंत्री थे. अब मतदान के बाद मंत्री पद दिया जाएगा और एक राज्य मंत्री भी हमारी पार्टी का बनाया जाएगा."


केंद्र ने लखनऊ एयरपोर्ट का नाम चरण सिंह के नाम पर कर दिया पर कोई लाभ न हुआ

लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा के जनता दल (एस) के तीन सांसदों और अजित सिंह के राष्ट्रीय लोक दल के तीन सांसदों ने तय किया है कि वे विश्वास मत के ख़िलाफ़ वोट देंगे.

महत्वपूर्ण है कि बसपा नेता मायावती देवेगौड़ा से दिल्ली में मिलने उनके निवास पर गईं. हालाँकि, शनिवार को देवेगौड़ा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मिले थे लेकिन उन्होंने मायावती से मिलने के बाद घोषणा की कि उनकी पार्टी के तीनों सांसद विश्वास मत के ख़िलाफ़ वोट देंगे.

अजित सिंह भी विरोध में

राष्ट्रीय लोकदल के अजित सिंह ने रविवार को मायावती से मुलाक़ात के बाद अपने पार्टी नेताओं के साथ बैठक की और यूपीए के ख़िलाफ़ वोट देने की घोषणा की.

उनका कहना था, "हमने पार्टी नेताओं के साथ मिलकर तय किया है कि 22 जुलाई को विश्वास मत के दौरान हम यूपीए सरकार के ख़िलाफ़ वोट देंगे."


मुलायम बरसे लालकृष्ण और लेफ़्ट पर

इसके अलावा रविवार को जहाँ यूपीए अपने गठबंधन और अन्य सांसदों को 'डिनर' पर बुला रहा है तो सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने भी सांसदों को डिनर पर बुलाया है.

ऐसा माना जा रहा है कि डिनर पर जाने वाले सांसदों के आधार पर तस्वीर कुछ साफ़ हो सकती है.

रविवार को यूपीए को झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ-साथ दयानिधि मारन के समर्थन का सहारा भी मिला.

इस बीच हैदराबाद से प्राप्त समाचारों के अनुसार मजलिसे इत्तेहाद उल मुसलमीन के एकमात्र सांसद असद्दुदीन ओवैसी ने भी यूपीए को समर्थन देने की घोषणा की है.

Saturday, 19 July 2008

एसेम्बली में दहाड़ा सिरोही का शेर


भास्कर न्यूज .जयपुर। 
विधानसभा के मानसून सत्र में क्षेत्रीय विधायक संयम लोढा ने काम्बेश्वर महादेव से शिवगंज तक की सड़क निर्माण एवं सिरोही जिले में जलाऊ लकडिय़ों की किल्लत संबधी प्रश्न उठाए। मानसून सत्र के चलते विधानसभा में क्षेत्रीय विधायक संयम लोढा ने कृषि विपणन मंत्री से वर्ष २००८-०९ के लिए केसरपुर से काम्बेश्वर महादेव सड़क नवीनीकरण व मरम्मत का प्रस्ताव किस स्तर पर विचाराधीन है एवं इसकी स्वीकृति कब तक प्रदान कर नवीनीकरण किया जाएगा,इस बाबत सदन में बताने का कहा गया। मंत्री ने कहा कि काम्बेश्वर महादेव की विशेष मरम्मत की स्वीकृति की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। लोढ़ा ने सड़क पर कितनी राशि व्यय की जाएगी, बताने का कहा तब कृषि विपणन मंत्री ने अनुमानित ४३.५० लाख रूपए की लागत प्रस्तावित होना बताया। विधायक लोढ़ा ने वन मंत्री से सिरोही जिले के सरूपगंज डिपो में लम्बे समय से लकड़ी उपलब्ध नहीं होने तथा कब तक उपलब्ध हो पाएगी का सवाल उठाया। जहां मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि अप्रेल माह से लकड़ी सरूपगंज डिपो में उपलब्ध नहीं है तथा विभिन्न स्त्रोतों से लकड़ी प्राप्त होने पर उक्त डिपो पर उपलब्ध हो सकेगी। विधायक लोढ़ा ने वर्ष २००८ में जिले में कितनी लकड़ीया पकड़ी गई एवं उनका क्या उपयोग किया गया। बताने का मंत्री से प्रश्न किया तब मंत्री ने अवगत कराया कि वर्ष २००३ में कुल ९४.५०किवंटल लकड़ी पकड़ी गई, जिसकों बेचा जा चुका है। विधायक लोढ़ा ने विधानसभा में वन मंत्री से प्रश्न किया कि यह सही है कि सिरोही जिले में मृतकों को जलाने के लिए लकड़ी की भारी कमी है एवं कमी दूर करने के लिए सरकार क्या प्रयास कर रही है। सरकार द्वारा शिवगंज के श्मशान पर लकड़ी कब तक उपलब्ध कराई जाएगी। सिरोही जिले में लकड़ी का दूसरा और डिपो खोलने का क्या सरकार विचार रखती है। एवं कब तकï? सदन को अवगत कराए। जिस पर मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि जिलों में विभिन्न कार्यो के लिए लकड़ी की उपलब्धता का आंकलन विभागीय स्तर पर किया जाएगा। शमशान स्थल पर लकड़ी उपलब्ध कराने का उत्तरदायित्व वन विभाग का नहीं है। विभागीय डिपो पर लकड़ी उपलब्ध होने पर जन साधारण को बिक्री की जाती है। सिरोही जिले में स्थित वन क्षेत्रों में लकड़ी का विधिवत विदोहन बंद होने के कारण वन क्षेत्रों से लकड़ी की कम उपलब्धी को देखते हुऐ दूसरा डिपो खोलने की सरकार की कोई योजना नहीं है। यह बात सदन को अवगत कराई। 

Saturday, 12 July 2008

मनमोहन भाईसाहब ने कभी अपना हित नहीं सोचा’

भास्कर न्यूज
Saturday, July 12, 2008 10:23 [IST]
अमृतसर. अमेरिका के साथ परमाणु करार ऐतिहासिक होगा। इसे आने वाली पीढ़ियां सदैव याद रखेंगी। यह कहना है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दोनों भाइयों सुरजीत सिंह कोहली और दलजीत सिंह कोहली का।

दैनिक भास्कर से बातचीत में कोहली बंधुओं ने कहा कि भाईसाहब ने कभी भी अपना हित नहीं सोचा, बल्कि हर समय देश को समर्पित रहे हैं। वह ऐसी कोई पहल नहीं करेंगे, जिससे भारत की तरक्की में रुकावट पैदा हो।

डाक्टर साहिब के बारे में भारत ही नहीं, बल्कि पूरा विश्व जानता है। उन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए अपनी देश के प्रति निष्ठा में किसी भी स्वार्थ को आड़े नहीं आने दिया। आने वाले समय की यही जरूरत है कि जल्द से जल्द करार पर मोहर लगे, ताकि भारत विकास के पथ पर और तेजी से चल सके। उन्होंने सभी नेताओं से राजनीति छोड़ सहयोग करने की अपील की।

एटमी करार के मामले में सिख बुद्धिजीवियों की राय: गुरु नानक स्टडी सर्किल, जीएनडीयू के सीनियर लैक्चरर गुरशरणजीत सिंह का कहना है कि सिखों को खासतौर पर अकाली संगठनों को प्रधानमंत्री के इस फैसले को समर्थन देना चाहिए।

भारत के इतिहास में पहली बार एक सिख को देश की बागडोर संभालने का मौका मिला है। अगर वह कठिनाई के समय में देश हित में कोई फैसला लेते हैं तो कम से कम सिखों को तो इसका समर्थन करना चाहिए। प्रधानमंत्री चाहे किसी भी कम्यूनिटी से क्यों न हो वह विश्व भर में पूरे देश को रिप्रिजेंट करता है।

एटमी करार के मामले में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर फैसला किया है। यह फैसला हरेक के लिए सवरेपरि होना चाहिए। इसके साथ ही राजनीतिक संगठनों को भी चाहिए कि वह गुटबाजी की बजाय देश हित में सोचते हुए इस फैसले का समर्थन करें।
-डा. हरमोहिंदर सिंह बेदी, हैड, हिंदी विभाग, जीएनडीयू

Tuesday, 8 July 2008

सरकार एकदम सुरक्षित :पीएम

नई दिल्ली. परमाणु करार को लेकर वामदलों के समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि संप्रग सरकार को कोई खतरा नहीं है और वह पूरी तरह से सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे संसद में बहुमत साबित करने से पीछे नहीं हटेगें।
ज्ञातत्व हो कि मनमोहन सिंह जी-8 सम्मेलन में भाग लेने के लिए इस समय जापान गए हुए हैं और वे वहां पर अपनी सरकार को लेकर एकदम निश्चिंत हैं।
उधर दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भी पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार संसद में अपना बहुमत साबित कर देगी। उनसे नए समर्थकों के बारे में पूछे जाने पर तिवारी ने कहा संप्रग सरकार एकजुट है और हमारी सरकार पूरी तरह से सुरक्षित है। मनमोहन सिंह के आईएईए में जाने से संबंधित बयान के बारे में पूछे जाने पर तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ऐसा कुछ नहीं कहा जिसे हम पिछले साढ़े चार साल से न कहते आ रहे हों। प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा था कि भारत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए में जाएगा जिस पर वामदलों ने समर्थन वापसी का फैसला किया।
इस घटनाक्रम से निश्चिंत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जी 8 सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और असैन्य परमाणु करार के सिलसिले में समर्थन जुटाने के लिए परमाणु सप्लायर देशों के नेताओं से मुलाकात का कार्यक्रम तय हो चुका है।

प्रधानमंत्री ने आस्तीनें चढ़ाईं

विशेष विमान से. परमाणु करार पर पहली बार सरकार का सख्त चेहरा पेश करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत शीघ्र ही सुरक्षा मानक समझौते पर आईएईए से संपर्क करेगा। उन्होंने कहा, चुनाव जल्दी होने की संभावना नहीं है और हम संसद का सामना करने को तैयार है।
यूपीए सरकार गिरने की आशंकाओं के बीच जी-8 सम्मेलन में भाग लेने जा रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सोमवार को काफी आत्मविश्वास से भरे दिखे। वामदलों की समर्थन वापसी के अल्टीमेटम से बिल्कुल बेफिक्र सिंह ने कहा, वे सहयोगियों की भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन परमाणु समझौता देशहित में है। एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने कहा कि जापान में वे अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से मिलकर उनसे करार के प्रति वचनबद्धता जताएंगे।
पीएम ने कहा, वे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में जाएंगे और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से भी बात करेंगे। ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए समझौता जरूरी है। समझौते को लेकर भाजपा की भी चिंताएं थीं। हमने अटलबिहारी वाजपेयी और ब्रजेश मिश्र से मुलाकात के दौरान उनकी आशंकाएं दूर की थीं। भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा प्रधानमंत्री को इस्तीफा देने की सलाह पर उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह से सुरक्षित है। आडवाणी को सलाह देने की जरूरत नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि परमाणु समझौते पर चीन का क्या रुख रहेगा, उन्होंने कहा कि फिलहाल उम्मीद यही है कि वह इसे लेकर हमारा विरोध नहीं करेगा। परमाणु समझौते को पूरा होने में लगने वाले समय के बारे में उन्होंने कहा कि फिलहाल निश्चित समय तो नहीं बताया जा सकता है, फिर भी जैसे ही आईएईए में जाने का फैसला हो जाएगा तो इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। आईएईए का बोर्ड ऑफ गवर्नर इस पर तत्काल फैसला कर लेगा।
निजी भागीदारी भी संभव : समझौते के बाद परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में निजी भागीदारी के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका भी विकल्प है। बहुत संभव है कि ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में निजी कंपनियों को भी मौका मिले।
समझौते के रास्ते बंद नहीं हुए: नारायणनविशेष विमान से. परमाणु करार पर यूपीए-लेफ्ट के बीच समझौते के रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। इस आशय के संकेत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने अनौपचारिक वार्ता में दिए। उन्होंने कहा कि जी-8 सम्मेलन के बाद 10 या 11 जुलाई को फिर यूपीए-लेफ्ट नेताओं की बैठक होगी। इसमें करार पर वामदलों की तमाम आशंकाओं को दूर कर सहमति बनाने का प्रयास होगा।
हम जल्द ही आईएईए में जाएंगे। जल्द चुनाव की कोई संभावना नहीं है। जब भी जरूरत पड़ेगी हम संसद का सामना करने के लिए तैयार हैं। परमाणु समझौता देश हित में है।-मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री

Saturday, 5 July 2008

बच्चो, निडर होकर चुनौतियों को स्वीकार करो- राहुल



भास्कर न्यूज
Sunday, July 06, 2008 00:01 [IST] भोपाल.अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव व युवा सांसद राहुल गांधी ने आज यहां कहा कि इस देश में जरूरत सवाल करने वालों की है। आगे बढ़ने के लिए बच्चों को सवाल करने की आदत डालनी चाहिए। हमें पूछना चाहिए कि ऐसा क्यों है? जब चुनौती सामने आ जाए तो यह कहने की ताकत होनी चाहिए कि मैं इसे क्यों नहीं कर सकता?
श्री गांधी शनिवार को भास्कर समूह और शारदादेवी चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा प्रवर्तित संस्कार वैली स्कूल के नवनिर्मित आवासीय भवनों के लोकार्पण के बाद विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को संबोधित कर रहे थे। आधे घंटे के उद्बोधन में श्री गांधी ने अपने बचपन से जुड़ी यादगार घटनाओं का जिक्र करते हुए तीन प्रेरक अनुभव बच्चों के साथ बांटे। उन्होंने कहा कि जब वे सिर्फ छह साल के थे तो अंधेरे से काफी डरते थे। तब उनकी दादी श्रीमती इंदिरा गांधी ने सिखाया कि डरो नहीं, अंधेरे का सामना निकट से करो, डर अपने-आप जाएगा।
यह तरकीब काम आई। मैं घुप अंधेरे में गया। धीरे-धीरे मेरे मन से अंधेरे का डर खत्म हो गया। इससे सीख मिली कि हमें विपरीत परिस्थितियों का सामना कैसे करना चाहिए। दूसरी कहानी में राहुल ने अपनी केमिस्ट्री की टीचर श्रीमती मणि को खूब याद किया, जिन्होंने उन्हें सवाल करने की सीख दी। तब उनकी उम्र 15 साल थी। उन्होंने बताया कि दूसरे टीचर मेरे सवालों पर हतोत्साहित करते थे, लेकिन श्रीमती मणि ऐसी नहीं थीं। वे हर सवाल का जवाब धैर्यपूर्वक देती थीं। उन्होंने मुझे यह पूछने की आदत डाली कि ऐसा क्यों है? यह बड़ा ही ताकतवर सवाल है।
उन्होंने कहा कि कॉलेज के दिनों में जब वे 20 के हुए तो फुटबॉल के बाद बॉक्सिंग की ओर आकर्षित हुए। एक कठिन मुकाबले के मौके पर उनके कोच ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में चुनौती को स्वीकार करो और अपने आपसे कहो-क्यों नहीं, मैं कर सकता हूं? राहुल ने कहा कि इस सीख ने जीवन के प्रति मेरा नजरिया ही बदल दिया। मैंने मुकाबला जीता। स्कूल के शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि टीचर को भी यह समझना चाहिए कि बच्च यह सवाल क्यों पूछ रहा है? कांग्रेस महासचिव ने अपने भाषण के अंत में कहा कि इस देश में सवाल करने वालों की जरूरत है।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार और स्कूल के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य शेखर गुप्ता ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समूह के चेयरमैन श्री रमेशचंद्र अग्रवाल ने कहा कि स्कूल की स्थापना के पीछे समाज से जो कुछ अर्जित किया है, उसका कुछ अंश वापस लौटाने का भाव है। संस्कार वैली की सफलता को देखते हुए अब समूह का विचार देश के अन्य स्थानों पर भी स्कूल स्थापित करने का है। स्कूल की गतिविधियों की जानकारी निदेशक श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने दी। समारोह से पूर्व राहुल गांधी ने स्कूल परिसर में बालिकाओं के लिए नवनिर्मित आवासीय भवन ‘प्रेरणा’ और बालकों के लिए ‘क्षितिज’ का लोकार्पण किया।

राहुल क्यों हुए शर्म से लाल!

Bhaskar News! शादी के सवाल पर अच्छे-अच्छे झेंप जाते हैं. कुछ यही हाल हुआ कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी का. भोपाल में एक स्कूल के बच्चों ने जब राहुल से उनके शादी करने के बारे में पूछा तो राहुल झेंप गए.शनिवार को राहुल गांधी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पहुँचे थे.
यहाँ उन्होंने कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. इसी कड़ी में वो राजधानी के संस्कार वेली स्कूल में भी पहुँचे और यहाँ के बच्चों से बातचीत की.
बच्चों के बीच बैठे 38 साल के राहुल गांधी से नौंवी क्लास की एक 13 साल की लड़की मोनिका सत्यवादी ने उनके सामने शादी से जुड़े सवालों की झड़ी लगा दी. इन सवालों पर सब हंस पड़े.
उनका राहुल गाँधी से सवाल था, "आप कब शादी कर रहे हैं? आप जिस लड़की से शादी करना चाहते हैं उसमें क्या-क्या गुण होने चाहिए ताकि वो एक आदर्श जीवनसंगिनी बन सके?"
मोनिका के इस सवाल पर राहुल मुस्कुरा उठे और कहा, " मुझे उम्मीद है कि मेरी शादी जल्द हो जाएगी. मैं नहीं जानता कि मेरे लिए एक आदर्श जीवनसाथी कौन है. अगर मैं जानता होता तो उससे मेरी शादी हो चुकी होती."
राहुल का कहना था, "लेकिन मैं उस लड़की को पसंद करूँगा जो खुले विचारों वाली हो और दुनिया को लोगों के नज़रिए से देखे."
ऐसे सवालों के बाद बच्चों का खुल जाना लाज़मी था और इसके बाद बच्चों ने भी राहुल से कई तरह के सवाल किए और उन्होंने भी बड़े ही सुलझे हुए अंदाज़ में बच्चों को जवाब भी दिए.
राहुल की अभिलाषा
राहुल ने इस स्कूल के बच्चों को पुरस्कार भी बांटे.
बच्चों के एक सवाल पर राहुल ने बताया, "मेरे पिता हवाई जहाज़ के पायलट थे. मैंने सोचा मैं भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलूँ. एक वक्त मैंने भारतीय सेना में जाने की भी सोची. बाद में ऐसा समय भी आया जब मैं अपना ये विचार छोड़ चुका था."
राहुल गांधी पहले भारतीय सेना में जाना चाहते थे लेकिन बाद में उन्होंने अपने विचार बदल दिया
राहुल ने बताया, "मेरी अभिलाषा कभी खास और तय नहीं रही. मैं कभी सेना में जनरल नहीं बनना चाहता था. लेकिन मेरी कामना हमेशा से ये रही है कि मुझे भारत और लोगों के बारे में अच्छी समझ हो ताकि मैं अपनी थोड़ी सी कोशिश के ज़रिए भारत को और आगे बढ़ा सकूँ."
राहुल गांधी ने स्कूली छात्रों को अपनी दादी के बारे में बताते हुए प्रेरित किया.
उन्होंने बताया, "मेरी दादी मेरी शिक्षिका थीं जैसे स्कूलों की शिक्षिकाएँ होती हैं. वो हमेशा कहा करती थीं कि बेटा अगर तुम्हें किसी चीज़ से डर लगता है तो उससे भागो मत. उसके सामने डट कर खड़े हो जाओ. तुम्हारा डर ख़त्म हो जाएगा."

Wednesday, 2 July 2008

छात्रों के लिए 500 करोड़ की योजनाएं

चंडीगढ़.
अनुसूचित जाति और बीपीएल परिवारों के बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मंगलवार को 500 करोड़ रुपए की योजनाएं शुरू करने का ऐलान किया।
हरियाणा निवास में आयोजित समारोह में हुड्डा ने घोषणा की कि बीपीएल परिवार के पहली से पांचवीं कक्षा के बच्चों को हर महीने 75 रुपए, छठी से आठवीं के बच्चों को 100 रुपए और 9वीं से 11वीं के बच्चों को 150 रुपए का वजीफा दिया जाएगा।
11वीं और 12वीं के साइंस स्ट्रीम के बच्चों को 200 रुपए का मासिक वजीफा मिलेगा। कॉलेज में पढ़ने वाले बीपीएल परिवारों के बच्चों को 750 रुपए मासिक वजीफा दिया जाएगा। कॉलेज में पढ़ने वाले अनुसूचित जातियों के स्टूडेंट्स को किताब खरीदने के लिए हर साल दो हजार और प्रत्येक माह एक हजार का वजीफा भी दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फ्री में दी जाने वाली वर्क बुक्स का सैट भी जारी किया।
हुड्डा ने पात्र विद्यार्थियों को वितरित किए जाने वाले मासिक वजीफे की पहली तिमाही किश्त और एकमुश्त भत्ते के 128 करोड़ रुपए बांटने के लिए 17 बैंकों को लैटर भी जारी किए।
एसटी के बच्चों के लिए पहले से है योजनाअनुसूचित जाति के पहली से 12वीं कक्षा के बच्चों के लिए मासिक वजीफे की घोषणा मुख्यमंत्री पहले ही करनाल में हुई दलित सम्मान रैली में कर चुके हैं। इन जातियों के पहली से 5वीं कक्षा के लड़कों को 100 रुपए व लड़कियों को 150 रुपए, छठी से आठवीं कक्षा के लड़कों को 150 व लड़कियों को 200 रुपए, नौवीं से 12वीं कक्षा के लड़कों के 200 और लड़कियों को 300 रुपए का मासिक वजीफा देने का ऐलान किया गया था।

देश के चार करोड़ किसान ऋण मुक्त

नई दिल्ली
केन्द्र में संप्रग सरकार के वित्त मंत्री का दावा है कि उसका छोटे और सीमांत किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने का कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा है। जून का महीना समाप्त होते ही देश के चार करोड़ किसानों का करीब ७२,000 करोड़ रुपए कर्ज माफ हो गया है।
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मंगलवार को यहां स्टेट बैंक की १क्१ नई शाखाओं का एक साथ उद्घाटन करते हुए दावा किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार का ऋणमाफी कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा है। बैंकों ने तय समय सीमा ३क् जून के भीतर सभी छोटे और सीमांत किसानों को ऋण मुक्त कर दिया है।
ये किसान अब बैंक से नया ऋण लेने के फिर से पात्र बन गए हैं। भारतीय स्टेट बैंक के यहां स्थित स्थानीय प्रधान कार्यालय में आयोजित समारोह में वित्त मंत्री ने बैंक की १क्१ शाखाओं का एक साथ उद्घाटन किया और वीडियो कांफ्रें¨सग के जरिए दिल्ली, बडौदा, बैंगलूरु की नई शाखाओं के प्रबंधकों से बातचीत भी की।
उन्होंने इस मौके पर कुछ ऐसे किसानों को नए ऋण के चेक भी प्रदान किए, जिनके ऋण कृषि ऋण माफी योजना के तहत माफ कर दिए गए। उन्होंने महिला स्वंय सहायत समूह. शिक्षा रिण और मेधावी छात्रों को छात्रवृति देने के बैंक की योजना के तहत भी ऋण चेक वितरित किए।
बैंक सेवाओं का विस्तार गांवों में होगा तेज : वित्तमंत्री ने कहा कि बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं को गांवों और छोटे शहरों में विस्तार करने पर जोर दिया जाएगा। स्टेट बैंक के शाखा विस्तार कार्यक्रम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि बैंक ने अपने 202 वें स्थापना दिवस पर १क्१ शाखाएं खोली हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि बैंक 202 शाखाएं खोलकर इस मौके को और सार्थक बना सकता था। गांवों और कस्बों में सरकारी क्षेत्र के बैंकों की मांग है। इन इलाकों के लोग अपने क्षेत्र में सरकारी बैंक की शाखा चाहते हैं।
वित्त मंत्री ने बैंकों के शाखा विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि इस समय सरकारी, निजी, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों सहित कुल ७१,४७९ शाखाएं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही यह आंकड़ा एक लाख तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि छह लाख गांवों के इस देश में एक लाख बैंक शाखाएं भी कोई बड़ी संख्या नहीं है। स्टेट बैंक के अध्यक्ष ओ.पी. भट्ट ने की बैंक की 101 नई शाखाओं के साथ बैंक की शाखाओं की संख्या १क्४८६ हो गई।
चालू वित्त वर्ष में बैंक 2002 नई शाखाएं खोलेगा, जिनमें से 1000 से अधिक शाखाएं छोटे शहरों और गांवों में खोली जाएंगी। सरकार के वित्तीय समावेश के सपने को साकार करने के लिए स्टेट बैंक ने 2010 तक एक लाख बिना बैंक वाले गांवों तक अपनी सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।

अपनी उपलब्धियां गिनाने किताब जारी करेगा यूपीए

Marwar News!

Tuesday, July 01, 2008 19:07 [IST]
नई दिल्ली. चुनावी चर्चाओं के बीच केंद्र की यूपीए सरकार अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को विस्तार से गिनाने के लिए एक पुस्तक जारी करेगी। उधर, रेल मंत्रालय भी अपनी उपलब्धियों पर अलग से एक पुस्तक जारी करेगा। यह जानकारी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है।
यूपीए की ओर से जारी होने वाली पुस्तक में सर्वशिक्षा अभियान, मध्याह्न् भोजन योजना, अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री का नया 15 सूत्रीय कार्यक्रम, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना और एकीकृत बाल विकास कार्यक्रम भी शामिल हैं।
रेलवे की अलग किताब :
रेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक रेलवे की पुस्तक आम यात्रियों के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं, ई-टिकटिंग आदि पर केंद्रित होगी। हिंदी और अंग्रेजी में छपी यह पुस्तक लगभग तैयार है और जल्द ही जारी की जाएगी।
गांवों पर केंद्रित :
यूपीए सरकार की उपलब्धियों वाली पुस्तक में देश के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उठाए गए कदमों, जैसे-राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, विद्युतीकरण, पेयजल व्यवस्था, टेलीफोन सुविधा, गांवों में आवास व सड़कों का निर्माण और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को खासतौर से पेश किया गया है।
गैर-यूपीए राज्य निशाने पर :
पुस्तक को खासतौर पर मध्यप्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे उन राज्यों में वितरित किया जाएगा, जहां यूपीए विपक्ष में है। सरकार आम लोगों को यह बताना चाहती है कि उनके राज्य में गैर-यूपीए सरकार होने के बावजूद केंद्र ने उन्हें क्या-क्या सौगातें दीं।